जयपुर में जुटेंगे देशभर से 250 से अधिक डॉक्टर्स:कैंसर के खिलाफ जागरूकता का देंगे संदेश, 17 मई को जलेब चौक में होगी वॉकथॉन

जयपुर में जुटेंगे देशभर से 250 से अधिक डॉक्टर्स:कैंसर के खिलाफ जागरूकता का देंगे संदेश, 17 मई को जलेब चौक में होगी वॉकथॉन




वर्ल्ड एब्डोमिनल कैंसर डे के अवसर पर इस वर्ष दुनियाभर के विभिन्न शहरों में कैंसर जागरूकता को लेकर बड़े स्तर पर अभियान चलाया जाएगा। इसी कड़ी में जयपुर में 17 मई को मल्टीसिटी वॉक और 19 मई को प्रिवेंटिव जीआई ऑन्कोलॉजी पर विशेष पैनल डिस्कशन का आयोजन किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य लोगों को एब्डोमिनल कैंसर के प्रति जागरूक करना, शुरुआती जांच के महत्व को समझाना और समय रहते उपचार के लिए प्रेरित करना है। यह आयोजन एब्डोमिनल कैंसर ट्रस्ट की ओर से फोर्टिस हॉस्पिटल और इंस्टीट्यूट ऑफ इवेंट मैनेजमेंट एंड रिसर्च (आईआईईएमआर) के सहयोग से किया जा रहा है। कार्यक्रम के तहत गुरुवार को कैंसर जागरूकता से जुड़ी टी-शर्ट और बिब का भी अनावरण किया गया। इस अवसर पर संस्कृति युवा संस्थान के अध्यक्ष पंडित सुरेश मिश्रा, एब्डोमिनल कैंसर ट्रस्ट के फाउंडर एवं वर्ल्ड एब्डोमिनल कैंसर डे के संस्थापक डॉ. संदीप जैन, फोर्टिस हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. मनीष अग्रवाल, मुकेश गुप्ता, जयपुर रनर्स क्लब के कार्यकारी अध्यक्ष दीपक शर्मा, एडवोकेट कमलेश शर्मा, प्रो. एस.एस. शर्मा और आईआईईएमआर के निदेशक मुकेश मिश्रा सहित कई विशेषज्ञ उपस्थित रहे। दुनियाभर के शहरों में एक साथ होगी मल्टीसिटी वॉक 17 मई को जयपुर के जलेब चौक सहित दुनिया के विभिन्न शहरों में एक साथ मल्टीसिटी वॉक आयोजित की जाएगी। इस वॉक का उद्देश्य लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और कैंसर के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करने का संदेश देना है। जयपुर में जलेब चौक से सुबह छह बजे यह वॉकथॉन आयोजित होगी। आयोजकों के अनुसार, इस वैश्विक पहल के जरिए यह संदेश दिया जाएगा कि कैंसर से लड़ाई केवल इलाज से नहीं, बल्कि जागरूकता, समय पर जांच और सही जीवनशैली से भी जीती जा सकती है। जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार : डॉ. संदीप जैन एब्डोमिनल कैंसर डे के संस्थापक डॉ. संदीप जैन ने कहा कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार जागरूकता है। उन्होंने कहा कि एब्डोमिनल कैंसर अक्सर शुरुआती चरण में पकड़ में नहीं आता, जिसके कारण कई बार मरीज गंभीर स्थिति में पहुंच जाते हैं। उन्होंने कहा कि यदि लोग समय रहते जांच करवाएं और शरीर में दिखाई देने वाले संकेतों को गंभीरता से लें, तो हजारों लोगों की जान बचाई जा सकती है। उनका कहना था कि एब्डोमिनल कैंसर केवल एक बीमारी नहीं, बल्कि तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य चुनौती है, जिससे लड़ने के लिए समाज की भागीदारी बेहद जरूरी है। 19 मई को विशेषज्ञों का बड़ा मंथन वर्ल्ड एब्डोमिनल कैंसर डे के अवसर पर 19 मई को होटल हॉलिडे इन में प्रिवेंटिव जीआई ऑन्कोलॉजी पर विशेष पैनल डिस्कशन आयोजित किया जाएगा। इसमें देश के प्रमुख गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट, सर्जन, ऑन्कोलॉजिस्ट और चिकित्सा विशेषज्ञ शामिल होंगे। वैज्ञानिक सत्रों में आधुनिक तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित एंडोस्कोपी, शुरुआती पहचान और कैंसर की रोकथाम पर विशेष चर्चा होगी। प्रमुख विषयों लुमिनल GI कैंसर की शुरुआती पहचान में AI एंडोस्कोपी की भूमिका, मरीजों में जांच और इलाज में देरी के कारण बढ़ते GI कैंसर, गॉल ब्लैडर कैंसर की रोकथाम और प्रोफाइलेक्टिक कलेक्टोमी, कोलोरेक्टल कैंसर की शुरुआती स्क्रीनिंग और कोलोनोस्कोपी, शराब से संबंधित लिवर सिरोसिस, HCC और इसकी रोकथाम शामिल है। इन विषयों पर डॉ. एस.एस. शर्मा, डॉ. आर.के. जेनॉ, डॉ. जीतेन्द्र चावला, डॉ. सुधीर महाऋषि, प्रो. वी.ए. सारस्वत, डॉ. सौरभ कालिया, डॉ. जया माहेश्वरी, डॉ. दिनेश अग्रवाल सहित देश के कई वरिष्ठ विशेषज्ञ विचार साझा करेंगे। नियमित जांच को जीवनशैली का हिस्सा बनाना जरूरी : डॉ. मनीष अग्रवाल डॉ. मनीष अग्रवाल ने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य केवल बीमारी की जानकारी देना नहीं, बल्कि लोगों को नियमित स्वास्थ्य जांच के लिए प्रेरित करना भी है। उन्होंने कहा कि आधुनिक चिकित्सा तकनीकों के कारण आज कई प्रकार के कैंसर की शुरुआती पहचान संभव हो चुकी है। यदि मरीज समय पर डॉक्टर से संपर्क करें तो उपचार की सफलता की संभावना काफी बढ़ जाती है। क्या होता है एब्डोमिनल कैंसर? एब्डोमिनल कैंसर में वे कैंसर शामिल होते हैं जो पेट (एब्डोमेन) के भीतर मौजूद विभिन्न अंगों को प्रभावित करते हैं। आमतौर पर कैंसर (गैस्ट्रिक), लिवर, पैंक्रियाटिक, कोलन और रेक्टल, गॉल ब्लैडर, ओवेरियन, पेरिटोनियल, किडनी और छोटी आंत के कैंसर एब्डोमिनल कैंसर की श्रेणी में आते हैं। हर प्रकार के कैंसर के लक्षण, निदान और उपचार अलग-अलग होते हैं। जागरूकता, समय पर पहचान और नियमित जांच से न केवल इन कैंसर का जल्दी पता लगाया जा सकता है, बल्कि प्रभावी उपचार के माध्यम से इनसे निजात भी पाया जा सकता है।



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