अंजड़ में नर्मदा परिक्रमा कर रहे साधु का निधन:समाजसेवियों ने विधि-विधान से किया अंतिम संस्कार; परिक्रमा के दौरान बिगड़ी थी तबीयत
नर्मदा परिक्रमा पर निकले साधु चंपालाल का उपचार के दौरान निधन हो गया। बड़वानी के अंजड़ में सोमवार को तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। मंगलवार को नगर के समाजसेवियों ने आपसी सहयोग और विधि-विधान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया। परिक्रमा के दौरान बिगड़ी थी तबीयत मूल रूप से खरगोन जिले के कसरावद निवासी साधु चंपालाल पिछले कुछ समय से नर्मदा परिक्रमा पर थे। सोमवार को अचानक स्वास्थ्य खराब होने पर स्थानीय समाजसेवियों ने उन्हें अंजड़ के सिविल अस्पताल पहुंचाया, जहां से उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। साधु चंपालाल ने विवाह नहीं किया था और वे नावड़ा टवड़ी में नर्मदा किनारे कुटिया बनाकर रहते थे। कुटिया क्षतिग्रस्त होने के बाद वे परिक्रमा पर निकल पड़े थे। समाजसेवियों ने परिजनों को ढूंढा निधन की सूचना मिलने के बाद समाजसेवी सतीश परिहार और उनके साथियों ने साधु के परिवार की तलाश शुरू की। काफी प्रयासों के बाद उनके शिष्य और उज्जैन के कथावाचक पंडित कमल किशोर शुक्ल से संपर्क हो पाया। पुलिस की मौजूदगी में पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी करने के बाद शव अंतिम संस्कार के लिए समाजसेवियों को सौंपा गया। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ दी गई विदाई मंगलवार को समाजसेवी सतीश परिहार, देवेंद्र यादव, राजू प्रजापत और अजरुद्दीन मंसूरी ने मिलकर अंतिम संस्कार की व्यवस्थाएं कीं। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ उन्हें मुखाग्नि दी गई। अंतिम यात्रा में शामिल लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। देर शाम उज्जैन से पहुंचे उनके शिष्य पंडित शुक्ल ने बताया कि चंपालाल जी धार्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ति थे और अपना पूरा जीवन नर्मदा सेवा में समर्पित कर दिया था।
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