अजमेर में जेएलएन अस्पताल का रिटायर कर्मचारी गिरफ्तार:कई विभागों-अफसरों के नाम की 27 मोहर जब्त, 5 साल से फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट बना रहा था
फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनाकर सरकारी नौकरियां दिलाने वाले गिरोह का पुलिस ने एक और बड़ा खुलासा किया है। सिविल लाइंस थाना पुलिस ने मामले में चौथे आरोपी जेएलएन अस्पताल से रिटायर कर्मचारी दिलीप वैष्णव को गिरफ्तार किया। आरोपी के पास से मेडिकल, शिक्षा और निगम सहित अलग-अलग विभागों की 27 फर्जी सीलें मिली हैं। पुलिस जांच में सामने आया है कि वह पिछले पांच साल से फर्जी दिव्यांगता प्रमाण-पत्र बनाने के काम में लिप्त था। इसका फायदा दिलाया गया। थानाप्रभारी शंभु सिंह ने बताया कि आरोपी के कब्जे से डॉ. महेश गुप्ता, ईएनटी डॉ. संजीव नैनीवाल, विभाग, नेत्ररोग विभाग, मनोरोग विभाग, हड्डी रोग विभाग, आयुर्वेदिक, शिक्षा, मेडिकल, नगर निगम व कॉलेज सहित अन्य विभागों की 27 फर्जी सीलें बरामद हुई हैं, यह सीलें कहां से बनवाई हैं इस बारे में जांच की जा रही है। मालूम हो कि इससे पहले फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनाकर आरपीएससी में तीन साल स्टेनोग्राफर की नौकरी करने वाले डेगाना (नागौर) निवासी अरुण शर्मा के अलावा, ई-मित्र संचालक रामनिवास और उसका सहयोगी मोडूराम चौधरी को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें से अरुण, रामनिवास और और मोडूराम को कोर्ट के आदेशों पर जेल भेजा जा चुका है। जबकि दिलीप से पूछताछ की जा रही है। 20 को फर्जी दिव्यांगता व 300 लोगों को अन्य फर्जी प्रमाण बनाकर दिए पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों का नेटवर्क अजमेर, नागौर, टोंक, भीलवाड़ा, जयपुर, कोटा, बीकानेर, जोधपुर, उदयपुर, भरतपुर सहित कई अन्य जिलों में फैला हुआ है। अजमेर से दूसरे जिलों के 300 से ज्यादा लोगों को फर्जी प्रमाण पत्र बनाकर दिए गए हैं। इनमें 20 से ज्यादा फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र भी शामिल हैं। कई ऐसे लोग भी शामिल हैं, जिन्होंने सरकारी सेवा में फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट तक इनसे बनवाए हैं।
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