उदयपुर में ठाकुरजी के संग खेली होली:जगदीश मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब, चंग की थाप पर झूम उठे भक्त; ग्रहण के बाद दूसरे दिन उड़ा गुलाल
उदयपुर में होली के तीसरे दिन फाल्गुनी बयार बह रही है और फिजाओं में अबीर-गुलाल की महक है। शहर के ऐतिहासिक जगदीश मंदिर में गुरुवार को आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा कि हर कोई ठाकुरजी की भक्ति के रंग में रंगा नजर आया। मंदिर में सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा और चंग की थाप पर फाग के गीतों ने पूरे माहौल को उत्सवमय बना दिया। जगदीश मंदिर में सुबह 10 बजे से ही श्रद्धालु अपने आराध्य को गुलाल अर्पित करने और उनके संग होली खेलने के लिए पहुंचने लगे थे। मंदिर परिसर के बाहर की सीढ़ियों से लेकर मुख्य द्वार तक भक्तों की लंबी कतारें देखी गईं, जहां लोग घंटों अपनी बारी का इंतजार करते रहे। कल चंद्र ग्रहण होने के कारण जगदीश मंदिर में ठाकुरजी को पारंपरिक होली नहीं खेलाई जा सकी थी। ग्रहण के चलते दोपहर बाद मंदिर के पट भी बंद कर दिए गए थे। यही वजह रही कि गुरुवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और भगवान के साथ होली खेलकर अपनी मुराद पूरी की। मंदिर के भीतर का नजारा अद्भुत था, जहां चंग की थाप पर होली के रसिया गीत गाए जा रहे थे। इन गीतों पर बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक ने जमकर नृत्य किया। महिलाएं और युवा भगवान की भक्ति में लीन होकर झूमते दिखाई दिए, जिससे पूरा मंदिर परिसर जयकारों से गूंज उठा और हर तरफ गुलाल की चादर सी बिछ गई। उदयपुर की इस पारंपरिक और भव्य होली का आकर्षण सिर्फ स्थानीय लोगों तक ही सीमित नहीं रहा। लेकसिटी घूमने आए देसी और विदेशी पर्यटक भी इस विशेष आयोजन का हिस्सा बने। विदेशी सैलानियों ने ठाकुरजी के साथ गुलाल उड़ाते हुए मेवाड़ी संस्कृति का आनंद लिया और इस पल को अपने कैमरों में कैद किया। उत्सव की शुरुआत में भगवान को पंचामृत स्नान कराया गया, जिसके बाद विशेष श्रृंगार हुआ और फिर फाग का दौर शुरू हुआ। वैष्णव परंपरा के अनुसार, अब रंग पंचमी तक डोल उत्सव के तहत कृष्ण मंदिरों में इसी तरह होली की धूम रहेगी और ठाकुर जी के साथ गुलाल की होली का दौर जारी रहेगा।
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