एलपीजी सिलेंडर की किल्लत जारी, उपभोक्ता परेशान:गैस एजेंसियों के बाहर लगी लंबी लाइन, लोग लकड़ी-कोयले के चूल्हों पर खाना बनाने को मजबूर

एलपीजी सिलेंडर की किल्लत जारी, उपभोक्ता परेशान:गैस एजेंसियों के बाहर लगी लंबी लाइन, लोग लकड़ी-कोयले के चूल्हों पर खाना बनाने को मजबूर




झारखंड में एलपीजी सिलेंडर की किल्लत लगातार जारी है। पिछले पांच दिनों से उपभोक्ता सिलेंडर लेने के लिए परेशान हैं। खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध का असर अब भारत में भी दिखने लगा है, जिससे झारखंड सहित पूरे देश में एलपीजी सिलेंडर की कमी महसूस की जा रही है। बोकारो, कोडरमा, धनबाद, गुमला, गिरिडीह समेत कई जिलों में सुबह से ही एलपीजी सिलेंडर लेने के लिए लंबी कतारें देखी जा रही हैं। महिलाएं, पुरुष, बच्चे और बुजुर्ग सभी अपने काम छोड़कर घरेलू गैस प्राप्त करने के लिए कतार में खड़े हैं। खाड़ी देशों में युद्ध शुरू होने के बाद सरकार ने घोषणा की थी कि कुछ समय के लिए व्यावसायिक सिलेंडरों की आपूर्ति में समस्या आ सकती है। इसके बाद से ही देश भर में व्यावसायिक सिलेंडरों के साथ-साथ घरेलू गैस सिलेंडरों की भी कमी शुरू हो गई। लोग गैस एजेंसियों के बाहर उमड़ पड़े
सरकार द्वारा बुकिंग की अवधि ग्रामीण क्षेत्र बढ़ाकर 45 दिन किए जाने की घोषणा के बाद उपभोक्ताओं में निराशा फैल गई। इसके परिणामस्वरूप, लोग जल्द से जल्द सिलेंडर बुक कराने की होड़ में गैस एजेंसियों के बाहर उमड़ पड़े। कई स्थानों पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल तैनात करना पड़ा है। इस किल्लत के कारण उपभोक्ता काफी परेशान हैं। सिलेंडर न मिलने से घरों में भोजन पकाने में समस्या आ रही है। लोग अब इलेक्ट्रिक चूल्हे के साथ-साथ कोयला और लकड़ी के चूल्हों का उपयोग करने को मजबूर हो गए हैं। शहरों में इलेक्ट्रिक चूल्हों की मांग बढ़ गई
महिलाएं लकड़ी और कोयले के चूल्हों पर खाना पकाने के लिए विवश हैं। शहरों में इलेक्ट्रिक चूल्हों की मांग बढ़ गई है, वहीं कोयले और लकड़ी के चूल्हों की बिक्री में भी वृद्धि देखी जा रही है। बाजार में लोहे और टीन से बने चूल्हों की मांग भी बढ़ी है। लकड़ी व कोयले के चूल्हों की बिक्री में इजाफा
लकड़ी के चूल्हे के विक्रेता मोहित सिन्हा ने बताया कि जब से लोगों के बीच यह खैबर फैली है कि एलपीजी सिलिंडर की किल्लत हो रही है, तब से उनके यहां लकड़ी व कोयले के चूल्हों की बिक्री में इजाफा हो गया है। खासकर ग्रामीण क्षेत्र के रहने वाले लोग इनके यहां लगातार आ रहे हैं और इन चूल्हों की डिमांड कर रहे हैं। इधर, कोडरमा की रहने वाली किरण कुमारी ने बताया कि उनकी शादी को 5 वर्ष हो चुके हैं। अब तक उन्होंने हमेशा गैस पर ही खाना पकाया है। लेकिन बीते 4-5 दिनों से वे लकड़ी के चूल्हे पर खाना पकाने को विवश हैं। गिरिडीह में गैस कमी की अफवाह से एजेंसियों पर उमड़ी भीड़ इधर, गिरिडीह में घरेलू गैस सिलेंडर की कमी की अफवाह के कारण शुक्रवार को भी जिले के शहरी और प्रखंड क्षेत्रों की विभिन्न गैस एजेंसियों पर लोगों की भारी भीड़ देखने को मिली। सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग खाली सिलेंडर लेकर एजेंसियों पर पहुंच गए और लंबी कतार में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते रहे। कई उपभोक्ताओं को घंटों इंतजार के बाद भी गैस सिलेंडर नहीं मिल सका, जिससे लोगों में असमंजस की स्थिति बनी रही। इसी दौरान लाइन में लगने को लेकर कई जगहों पर विवाद भी देखने को मिला। बताया जाता है कि कई लोग सुबह से लाइन में खड़े थे, जबकि कुछ लोग बाद में आकर आगे की ओर जाने की कोशिश कर रहे थे। इसे लेकर उपभोक्ताओं के बीच कहासुनी और हंगामा की स्थिति उत्पन्न हो गई। सूचना मिलने पर नगर थाना की पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को समझाकर मामला शांत कराया। ओटीपी नहीं मिलने के कारण गैस सिलेंडर की डिलीवरी
उपभोक्ताओं का कहना है कि कंपनी की ओर से ओटीपी नहीं मिलने के कारण गैस सिलेंडर की डिलीवरी में परेशानी हो रही है। कई लोगों ने बताया कि कॉल करने के बाद भी देर तक ओटीपी नहीं मिल रहा, जिसके कारण एजेंसी परिसर में घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। हालांकि ओटीपी मिलने के बाद उपभोक्ताओं को तुरंत सिलेंडर उपलब्ध करा दिया जा रहा है। गैस की कमी की अफवाह का असर शहर के होटल और घरों में भी देखने को मिल रहा है। कई छोटे होटल और ढाबों के साथ-साथ कुछ घरों में एहतियात के तौर पर कोयले के चूल्हे पर खाना बनाया जा रहा है। वहीं, एजेंसी संचालकों का कहना है कि घरेलू गैस सिलेंडर का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। नेटवर्क और साइट की तकनीकी समस्या के कारण ओटीपी मिलने में देरी हो रही है। उन्होंने लोगों से गैस शॉर्टेज की अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की है। जमशेदपुर में एमजीएम अस्पताल
यहां किचन में 5 दिन का स्टॉक है। वेंडर ने प्राथमिकता के आधार पर अस्पतालों को गैस उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है, पर आपूर्ति की अनिश्चितता बरकरार है। एलपीजी की किल्लत के चलते टाटा स्टील में छह कैंटीन को बंद कर दिया गया था। जो कैंटीन चल रही हैं, वहां रोटी नहीं मिल रही है। इसके चलते कर्मचारियों को घर से टिफिन लेकर जाना पड़ा। गुरुवार को लगभग हर कर्मचारी के हाथ में टिफिन बॉक्स दिखाई पड़ा। बोकारो में गैस एजेंसियों के बाहर लगी लंबी कतार
बोकारो में भी रसोई गैस सिलेंडर की किल्लत देखी जा रही है। गैस एजेंसियों के बाहर सिलेंडर लेने वालों की लंबी कतार देखी जा रही है। बोकारो के सेक्टर 4 में भी ऐसा ही नजारा देखा गया, जहां गैस लेने के लिए खाली गैस सिलेंडर के साथ लोगो की भीड़ देखी गई। लोगों का कहना है कि घंटों से सिलेंडर लेने के लिए खड़े हैं लेकिन गैस सिलेंडर नहीं मिल रहा है। वहीं, गैस एजेंसी का कहना है कि गैस सिलेंडर की कोई किल्लत नहीं है। सभी को गैस सिलेंडर मिल रहा है। एंट्री करने में थोड़ा टाइम लग रहा है। सभी को गैस उपलब्ध हो जाएगा। हालांकि आगे देखना है कि गैस की क्या स्थिति रहती है।



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