करनाल के कलाकार का माइक्रो आर्ट:सूई के छेद से निकल जाने वाली पतंग, नाखून से छोटी रामायण, लैंस से दिखती हैं कलाकृतियां

करनाल के कलाकार का माइक्रो आर्ट:सूई के छेद से निकल जाने वाली पतंग, नाखून से छोटी रामायण, लैंस से दिखती हैं कलाकृतियां




करनाल के एक व्यक्ति ने शौक-शौक में ऐसी माइक्रो कलाकृतियां बनाई हैं, जिन्हें नंगी आंखों से देख पाना लगभग नामुमकिन है। इन कलाकृतियों को देखने के लिए लैंस की जरूरत पड़ती है। सूई के छेद से आरपार निकल जाने वाली पतंग, 8 एमएम का चरखा, पोस्टकार्ड पर हजारों शब्द और हाथ के नाखून से भी छोटी धार्मिक रचनाएं उनकी कला का उदाहरण हैं। अब वे अपनी इस उपलब्धि को गिनीज बुक रिकॉर्ड तक पहुंचाने की तैयारी कर रहे हैं। बचपन के शौक ने बनाया माइक्रो आर्टिस्ट
गिफ्ट गैलेरी शॉप चलाने वाले करनाल के मिस्टर राजेंद्र वधवा को बचपन से ही माइक्रो आर्ट्स में गहरी दिलचस्पी रही है। समय के साथ यह शौक जुनून में बदलता चला गया। उन्होंने बताया कि शुरू में यह सब केवल प्रयोग के तौर पर किया, लेकिन जब लोगों ने इन चीजों को देखा तो उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली। उनका मानना है कि अगर लगन और धैर्य हो तो असंभव दिखने वाला काम भी संभव हो जाता है। सूई के छेद से निकलने वाली पतंग
राजेंद्र वधवा द्वारा बनाई गई पतंग इतनी छोटी है कि वह सूई के छेद में से भी आरपार निकल जाती है। इस पतंग की कन्नी सिर के बाल से तैयार की गई है। उन्होंने बताया कि अगर इन पतंगों को खाली माचिस के डिब्बे में डाल दिया जाए तो उसमें हजारों पतंगें समा सकती हैं। इस पतंग को बनाने में उन्हें दो से तीन दिन का समय लगा। पहले दो-तीन प्रयास असफल रहे, लेकिन लगातार मेहनत के बाद सफलता मिली। इसे भी एक रिकॉर्ड के तौर पर भेजा जाएगा। 8 एमएम का गांधी जी जैसा चरखा
वधवा ने 8 एमएम का एक चरखा भी तैयार किया है। यह वही चरखा है, जैसा महात्मा गांधी इस्तेमाल किया करते थे। इतने छोटे आकार में चरखे के हर हिस्से को बनाना बेहद चुनौतीपूर्ण था, लेकिन बारीकी से काम कर उन्होंने इसे संभव कर दिखाया। सूक्ष्म लेखन में भी कमाल
माइक्रो आर्ट के साथ-साथ वधवा सूक्ष्म लेखन का काम भी करते हैं। उन्होंने चावल के दानों पर नाम लिखे हुए हैं। इसके अलावा एक पोस्टकार्ड पर 50 हजार से ज्यादा शब्द लिखे हैं। इनमें “मेरा भारत महान” जैसे शब्द भी शामिल हैं, जिन्हें बिना लैंस के पढ़ पाना मुश्किल है। नाखून से भी छोटी रामायण और हनुमान चालीसा
वधवा ने हाथ के नाखून से भी छोटी हनुमान चालीसा तैयार की है। इसी तरह रामायण और शिव चालीसा भी बेहद सूक्ष्म आकार में लिखी हुई हैं। यह काम अत्यधिक एकाग्रता और धैर्य की मांग करता है। बोतलों के अंदर ताजमहल और चारपाई
उन्होंने बोतलों के अंदर भी कई कलाकृतियां बनाई हैं। इनमें चारपाई, अर्जुन का रथ, राष्ट्रीय नेता, हिंदू-मुस्लिम-सिख-ईसाई के प्रतीक और ताजमहल शामिल हैं। वे अपनी बनाई चीजें नेताओं और रिश्तेदारों को गिफ्ट भी करते हैं। पुराने सिक्के और नोटों का संग्रह
वधवा को पुरानी चीजें इकट्ठा करने का भी शौक है। उनके पास 1950 की पुरानी टिकटें मौजूद हैं। 1973 में जारी हुआ 20 रुपए का सिक्का भी उनके संग्रह में है। इसके अलावा कुछ यूनिक नंबर वाले पुराने नोट भी उनके पास सुरक्षित हैं। अखबार से मिली प्रेरणा, गिनीज का सपना
वधवा ने बताया कि एक समाचार पत्र में ऐसी कलाकृतियां देखकर उनके मन में यह शौक पैदा हुआ। उन्होंने सोचा कि जब कोई और यह कर सकता है तो वे क्यों नहीं। पहली बनाई गई आइटम की फोटो भी खिंचवाई थी, लेकिन बाद में बोतल टूट गई और फोटो भी खराब हो गई। अब वे अपनी सभी माइक्रो आइटम्स को गिनीज बुक रिकॉर्ड के लिए भेजने की तैयारी कर रहे हैं। उनका कहना है कि इंसान को कभी भी प्रयास नहीं छोड़ना चाहिए।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

India Fontline News

Subscribe Our NewsLetter!