करनाल में सरकारी कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन:बोले- कच्चे कर्मचारियों को पक्का किया जाए, हाईकोर्ट के आदेशों का पालन नहीं कर रही सरकार
करनाल में अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ से जुड़े सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा ने राष्ट्रीय मांग दिवस पर करनाल में जोरदार प्रदर्शन किया। कर्मचारी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे और नारेबाजी करते हुए जिला सचिवालय पहुंचे। किसी भी स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन की ओर से भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। प्रदर्शनकारी कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने समेत कई मांगों को लेकर डीसी को ज्ञापन सौंपने पहुंचे। एसकेएस जिला प्रधान सुशील कुमार और सीटू जिला सचिव जगपाल राणा ने बताया कि अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ का 18वां राष्ट्रीय सम्मेलन बीती 23 से 26 जनवरी तक शिरडी, महाराष्ट्र में हुआ था। सम्मेलन में दस सूत्रीय मांग पत्र को उठाने का प्रस्ताव पारित किया गया। इसी के तहत 26 फरवरी को राष्ट्रीय मांग दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा कि इसी कड़ी में डीसी करनाल को हरियाणा के मुख्य सचिव के नाम ज्ञापन सौंपा गया है। सरकार पर लगाए आरोप कर्मचारी नेताओं ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार मजदूर, कर्मचारी और किसान विरोधी नीतियां ला रही है। उन्होंने कहा कि दिसंबर माह में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने का फैसला दिया था और इसके लिए 28 फरवरी की समय सीमा तय की गई थी। आज 26 फरवरी हो चुकी है, लेकिन सरकार ने अब तक कोई कदम नहीं उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कच्चे कर्मचारियों को हरियाणा कौशल रोजगार निगम में समायोजित करना चाहती है, जबकि कर्मचारी सीधे नियमितीकरण की मांग कर रहे हैं। BMS पर भी उठाए सवाल सुशील कुमार और जगपाल राणा ने कहा कि भारतीय मजदूर संघ भाजपा की यूनियन है। उन्होंने आरोप लगाया कि बुधवार को किए गए उनके प्रदर्शन में कर्मचारियों की नहीं, बल्कि सरकार की भाषा बोली गई। उन्होंने कहा कि भारतीय मजदूर संघ कौशल की मांग उठा रहा है, जबकि एसकेएस हाईकोर्ट के फैसले के अनुसार कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने की मांग कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर मांगों को नहीं माना गया तो आगामी दिनों में बड़ा आंदोलन किया जाएगा। दस सूत्रीय मांग पत्र की प्रमुख बातें
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