कुएं में युवक का शव मिलने से बवाल:पकरिया में 24 घंटे प्रदर्शन, हत्या के आरोप के बाद गांव में पुलिस तैनात
शहडोल जिले के पकरिया गांव में 14 जनवरी से लापता युवक का शव कुएं में मिलने के बाद तनाव फैल गया। परिजनों और ग्रामीणों ने हत्या की आशंका जताते हुए 24 घंटे से अधिक समय तक शव रखकर प्रदर्शन किया। स्थिति को देखते हुए पूरे गांव में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। यह घटना बुढार थाना क्षेत्र की केशवाही चौकी अंतर्गत पकरिया गांव की है। गांव निवासी शिवपाल भरिया 14 जनवरी से लापता थे। लगभग नौ दिन बाद उनका शव गांव के पास एक खुले कुएं में तैरता हुआ मिला। शव मिलने की खबर फैलते ही परिजन और ग्रामीण आक्रोशित हो गए। परिजनों ने आरोप लगाया है कि पड़ोस में रहने वाले एक व्यक्ति ने शिवपाल की हत्या कर शव कुएं में फेंका है। उनका कहना है कि यह कोई दुर्घटना नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश है। आक्रोशित ग्रामीणों ने शव को पोस्टमार्टम के लिए ले जाने से रोक दिया। आरोप है कि पुलिस द्वारा शव को जबरन उठाने की कोशिश के दौरान परिजनों और पुलिस के बीच झड़प भी हुई, जिससे स्थिति और बिगड़ गई। हालात को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया। गांव में फिलहाल तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और पुलिस स्थिति पर लगातार नजर रख रही है। इस घटना की सूचना मिलने पर कांग्रेस के पूर्व विधायक सुनील सराफ भी मौके पर पहुंचे और परिजनों के साथ धरने पर बैठ गए। उन्होंने पुलिस पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। पूर्व विधायक सराफ ने खुले मंच से थाना प्रभारी को फटकार लगाते हुए कहा कि क्षेत्र की पुलिस अवैध धंधों जैसे सट्टा, जुआ और कबाड़ में उलझी हुई है, जिसके कारण गंभीर अपराधों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। इस दौरान पूर्व विधायक और थाना प्रभारी के बीच हुई तीखी नोकझोंक का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिससे जिले की राजनीति और पुलिस महकमे में हलचल मच गई। मामले में विकास पाण्डेय ने बताया कि 14 जनवरी से लापता युवक का शव खुले कुएं में मिला था। परिजनों द्वारा हत्या की आशंका जताते हुए विरोध किया गया, जिन्हें समझाइश देकर शांत कराया गया है। कुछ संदेहियों से पूछताछ की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल पकरिया गांव में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। यह घटना न सिर्फ एक परिवार के लिए गहरे शोक का कारण बनी है, बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक जवाबदेही पर भी बड़े सवाल खड़े कर रही है।
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