खन्ना ब्लाक समिति चुनाव के बाद AAP- कांग्रेस आमने-सामने:कांग्रेस ने बोली- बीडीपीओ दफ्तर में जड़ेंगे ताला- विधायक बोले- सरकारी ऑफिस, ऐसा नहीं होने देंगे
लुधियाना के खन्ना ब्लॉक समिति के चेयरमैन और उप चेयरमैन के चुनाव के बाद स्थानीय राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस ने सोमवार को बीडीपीओ कार्यालय को ताला लगाने की घोषणा की है, जिसके जवाब में खन्ना के विधायक और पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्री तरूणप्रीत सिंह सौंध ने कड़ी चेतावनी जारी की है। कैबिनेट मंत्री तरूणप्रीत सिंह सौंध ने अपने सोशल मीडिया पेज पर लिखा कि यह कांग्रेस का नहीं, बल्कि पंजाब सरकार का सरकारी कार्यालय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी को भी सरकारी कामकाज में बाधा डालने या कार्यालय को ताला लगाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। मंत्री ने कहा कि यदि किसी पार्टी को चुनाव प्रक्रिया पर आपत्ति है तो लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन किया जा सकता है, लेकिन सरकारी दफ्तर में बाधा डालना कानून के विरुद्ध है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने कार्रवाई की तो बाद में ‘धक्केशाही’ के आरोप न लगाए जाएं। दो पार्टियों के आमने सामने आने से तनाव मंत्री के इस बयान के बाद सियासी तनाव और बढ़ गया है। कांग्रेस ने भी तुरंत पलटवार किया। पूर्व मंत्री गुरकीरत सिंह कोटली ने कहा कि वे किसी से डरते नहीं हैं और न ही डरेंगे। उन्होंने दोहराया कि सोमवार को बीडीपीओ कार्यालय को ताला अवश्य लगाया जाएगा और कांग्रेस कार्यकर्ता इसके लिए पूरी तरह तैयार हैं। इस राजनीतिक टकराव के कारण खन्ना में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस आमने-सामने आ गई हैं। स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं में भी उत्साह देखा जा रहा है। अब सबकी निगाहें सोमवार को होने वाले विरोध प्रदर्शन पर टिकी हैं कि स्थिति किस प्रकार सामने आती है और प्रशासन इसे कैसे संभालता है। सियासी तनाव से पुलिस भी सतर्क इसी बीच पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह अलर्ट हो गया है। डीएसपी करमजीत सिंह ग्रेवाल ने कहा कि किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि किसी पार्टी को चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी लगती है तो वह चुनाव आयोग के पास जा सकती है, लेकिन किसी सरकारी दफ्तर को ताला लगाना कानूनी तौर पर गलत है और इस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। सियासी माहौल की इस गरमाहट ने खन्ना की राजनीति को एक बार फिर सूबे भर में चर्चा का विषय बना दिया है। अब देखना यह होगा कि सोमवार को कांग्रेस अपना ऐलान किस हद तक लागू करती है और सरकार व प्रशासन इस स्थिति से कैसे निपटते हैं। इतना तय है कि इस विरोध प्रदर्शन ने खन्ना की सियासत को पूरी तरह गर्मा दिया है।
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