जगराओं राइस मिलर्स का FCI दफ्तर पर धरना:भेदभाव, रिश्वतखोरी और स्टोरेज घटाने के आरोप, राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी

जगराओं राइस मिलर्स का FCI दफ्तर पर धरना:भेदभाव, रिश्वतखोरी और स्टोरेज घटाने के आरोप, राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी




लुधियाना जिले में जगराओं राइस मिलर्स एसोसिएशन ने अपनी मांगों को लेकर भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) दफ्तर के बाहर धरना दिया। एसोसिएशन ने सरकारी विभागों पर भेदभाव, मिलीभगत और रिश्वतखोरी के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने जगराओं प्रोक्योरमेंट और मिलिंग सेंटर के लिए स्टोरेज स्पेस कम करने तथा लोड को अन्य सेंटरों की ओर मोड़ने का भी आरोप लगाया। धरने का नेतृत्व एसोसिएशन के अध्यक्ष अंकुर गुप्ता ने किया। इस दौरान राइस मिल मालिक कर्नल इंदरपाल सिंह धालीवाल ने राइस मिलर्स के बीच कथित गुटबाजी और विभागों में रिश्वतखोरी के खेल का खुलासा किया। उन्होंने कहा कि कुछ मिलर्स अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं, जिससे समस्याएं बढ़ रही हैं। धालीवाल ने आरोप लगाया कि गुटबाजी का फायदा उठाकर अधिकारी अपनी फीस बढ़ा रहे हैं। उन्होंने मिलर्स से एकजुट होने का आह्वान करते हुए कहा कि जब तक सभी मिलर्स एकजुट नहीं होते, तब तक समस्याओं का समाधान संभव नहीं है। मिलिंग सेंटर के साथ किया जा रहा भेदभाव एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि जगराओं प्रोक्योरमेंट और मिलिंग सेंटर के साथ जानबूझकर भेदभाव किया जा रहा है। जहां अन्य सेंटरों को 42 से 45 प्रतिशत तक स्टोरेज स्पेस दिया जा रहा है, वहीं जगराओं को केवल 30 से 32 प्रतिशत तक सीमित रखा गया है। मिलर्स का कहना है कि जगराओं में जगह की कमी होने के बावजूद धान का लोड और मूवमेंट जानबूझकर अन्य सेंटरों की ओर डायवर्ट किया जा रहा है। इन अन्य सेंटरों को अतिरिक्त सुविधाएं भी दी जा रही हैं, जिससे जगराओं के मिलर्स को आर्थिक नुकसान हो रहा है और उनका काम प्रभावित हो रहा है। राज्य स्तर पर आंदोलन की चेतावनी अध्यक्ष अंकुर गुप्ता ने बताया कि इस मुद्दे को एफसीआई, डीएफएससी, जिला प्रशासन और मार्कफेड, पनसप तथा पीएसडब्ल्यूसी जैसी एजेंसियों के समक्ष कई बार उठाया गया है। हालांकि, हर बार केवल आश्वासन ही मिला और कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही स्टोरेज और मूवमेंट नीति की समीक्षा कर जगराओं के साथ हो रहे भेदभाव को समाप्त नहीं किया गया, तो मिलर्स मजबूर होकर राज्य स्तर पर बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले सीजन में मिलिंग कार्य प्रभावित हो सकता है और प्रदेश में स्टोरेज संकट भी उत्पन्न हो सकता है।



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