झज्जर में परशुराम भवन विवाद:FIR दर्ज होने के बाद मीडिया के सामने आए MLA वत्स, कहा-राज्यसभा चुनाव में उन पर बिकने के लगाए थे आरोप।
झज्जर में भगवान परशुराम भवन के शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान हुए बवाल और ब्राह्मण सभा के महासचिव संत सुरहेती के साथ मारपीट का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। अब इस पूरे प्रकरण में बादली हलके से कांग्रेस विधायक कुलदीप वत्स सामने आए हैं और उन्होंने इस घटना को राजनीतिक षड़यंत्र करार दिया है। FIR के बाद गरमाई राजनीति बताया जा रहा है कि संत सुरहेती की ओर से विधायक कुलदीप वत्स, उनके परिवार के सदस्यों और कुछ समर्थकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। इस मामले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है और स्थानीय स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है। “पहले से रची गई थी साजिश” – कुलदीप वत्स मीडिया से बातचीत में कुलदीप वत्स ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम की पटकथा पहले से ही उनके विरोधियों द्वारा तैयार की गई थी। उन्होंने दावा किया कि उन्हें पहले ही इस षड़यंत्र का अंदेशा था और उन्होंने कार्यक्रम में जाने से मना भी कर दिया था। लेकिन समाज के कुछ लोगों और आयोजकों के दबाव के चलते वह कार्यक्रम में शामिल हुए। मंच से की गई बेइज्जती, फिर बनाया निशाना” वत्स ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम के दौरान मंच से कई बार उनकी बेइज्जती की गई और उन पर छींटाकशी की गई। उन्होंने कहा कि वह सब कुछ सहते रहे, लेकिन इसके बावजूद बाद में उन्हें ही पूरे विवाद में आरोपी बना दिया गया। एफआईआर से नहीं डरता, सच सामने आना चाहिए कांग्रेस विधायक ने साफ कहा कि वह इस तरह की एफआईआर से डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अगर शिकायतकर्ता के पास सबूत हैं तो वह खुद कार्रवाई करवाने के लिए तैयार हैं। साथ ही उन्होंने समाज के लोगों से अपील की कि पूरे घटनाक्रम की वीडियो देखकर निष्पक्ष फैसला करें। पूर्व विधायक पर भी उठाए सवाल वत्स ने पूर्व विधायक नरेश शर्मा पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा कि कार्यक्रम के दौरान “30-40 युवकों को लाने” की बात आखिर क्यों कही जा रही है। राज्यसभा चुनाव का भी जिक्र विधायक ने कहा कि राज्यसभा चुनाव के दौरान उनके विरोधियों ने उन पर “बिकने” जैसे आरोप लगाए थे। अब वह इस मामले में कानूनी सलाह ले रहे हैं और जल्द ही विरोधियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे। कुलदीप वत्स ने इस पूरे मामले को महाभारत के “चक्रव्यूह” से जोड़ते हुए कहा कि उन्हें अभिमन्यु की तरह फंसाने की कोशिश की जा रही है। झज्जर का यह विवाद अब केवल सामाजिक नहीं बल्कि राजनीतिक रूप ले चुका है। एफआईआर, आरोप-प्रत्यारोप और बयानबाजी के बीच यह मामला और ज्यादा पेचीदा होता जा रहा है। आने वाले दिनों में इस पर कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तर पर बड़ी हलचल देखने को मिल सकती है।
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