झारखंड में बेमौसम बारिश का फसलों पर असर:खीरा और ककड़ी जैसे फसलों के फूल झड़े, आम के मंजर भी हुए बर्बाद, नई फसलों को लाभ

झारखंड में बेमौसम बारिश का फसलों पर असर:खीरा और ककड़ी जैसे फसलों के फूल झड़े, आम के मंजर भी हुए बर्बाद, नई फसलों को लाभ




झारखंड में पिछले दो दिनों से मौसम का मिजाज अचानक बदल गया है। बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी और स्थानीय गर्मी के प्रभाव से पूरे प्रदेश में झमाझम बारिश हो रही है। कई जिलों में बारिश के साथ ओलावृष्टि भी दर्ज की गई है। इस बदलाव से जहां एक ओर लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर किसानों के लिए यह परेशानी का कारण बन गया है। तेज हवाओं के साथ हुई बारिश ने खेतों में खड़ी फसलों को प्रभावित किया है। ग्रामीण इलाकों में कई जगहों पर तेज हवा के कारण फसलें झुक गईं, जबकि ओलावृष्टि ने सब्जियों और बागानों को खासा नुकसान पहुंचाया है। अचानक बदले मौसम ने जनजीवन पर भी असर डाला है। सब्जियों और आम के बागानों को नुकसान प्रदेश में हुई बारिश और ओलावृष्टि का सबसे ज्यादा असर सब्जियों की खेती और आम के बागानों पर देखा जा रहा है। कोडरमा के कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. अजय कुमार राय के अनुसार, हल्की और मध्यम बारिश वाले क्षेत्रों में नई फसलों को कुछ लाभ हुआ है। अच्छी पैदावार की उम्मीद है। विशेष रूप से मूंग की फसल के लिए यह बारिश फायदेमंद साबित हुई है। हालांकि, जिन इलाकों में तेज हवाओं के साथ बारिश और ओलावृष्टि हुई है, वहां नुकसान अधिक हुआ है। खेतों में लगी खीरा और ककड़ी जैसी सब्जियों के नए फूल झड़ गए हैं। जिससे उत्पादन में कमी की आशंका जताई जा रही है। वहीं, आम के पेड़ों पर आए मंजर भी बड़ी संख्या में गिर गए हैं, जिससे आम उत्पादक किसानों को भारी क्षति हुई है। किसानों को सतर्क रहने की सलाह मौसम विभाग के अनुसार आने वाले 2-3 दिनों तक मौसम में सुधार की संभावना नहीं है। ऐसे में किसानों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। विशेषज्ञों का कहना है कि खेतों में पानी निकासी की समुचित व्यवस्था कर नुकसान को कुछ हद तक कम किया जा सकता है। गेहूं जैसे खेतों में तैयार फसलों को खराब होने से बचाने के लिए जमीन पर प्लास्टिक बिछाकर खुले में फैलाने की सलाह दी गई है। इससे धूप निकलने पर उसे सुखाया जा सके। वैज्ञानिकों का मानना है कि प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान की भरपाई पूरी तरह संभव नहीं है, लेकिन सही प्रबंधन से आगे की क्षति को रोका जा सकता है। लगातार बदलते मौसम ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। वे आने वाले दिनों को लेकर आशंकित हैं।



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