​डिग्री के लिए रिसर्च नहीं, कमाई के लिए स्टार्टअप करो:HBTU में एक्सपर्ट बोले- लैब के मॉडल को बाजार में युवा बेचना सीखें

​डिग्री के लिए रिसर्च नहीं, कमाई के लिए स्टार्टअप करो:HBTU में एक्सपर्ट बोले- लैब के मॉडल को बाजार में युवा बेचना सीखें




अक्सर इंजीनियरिंग और रिसर्च की दुनिया में कई शानदार आइडिया कागज पर या लैब की फाइलों में ही दम तोड़ देते हैं। लेकिन अब समय बदल रहा है। एचबीटीयू कानपुर में आयोजित एंटरप्रेन्योरशिप कॉन्क्लेव ‘आरंभ-26’ में इसी बात पर मंथन हुआ कि कैसे छात्र अपने रिसर्च को सिर्फ डिग्री तक सीमित न रखकर उसे कमाई का जरिया बना सकते हैं। लैब के प्रोटोटाइप को फैक्ट्री तक पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती
कॉन्क्लेव के दौरान पैनल डिस्कशन का मुख्य विषय ‘रिसर्च से रेवेन्यू तक’ रहा। विशेषज्ञों ने जोर देकर कहा कि एक अच्छा प्रोटोटाइप बनाना केवल पहला कदम है। असली चुनौती तब शुरू होती है, जब उस प्रोटोटाइप को मैन्युफैक्चरिंग यानी बड़े पैमाने पर उत्पादन की स्थिति में लाया जाता है। पैनलिस्ट्स ने स्पष्ट किया कि रिसर्च तब तक वास्तविक प्रभाव नहीं डालती, जब तक वह आम लोगों के इस्तेमाल के लिए बाजार में उपलब्ध न हो। अक्सर तकनीकी रूप से मजबूत प्रोजेक्ट तैयार करने के बाद भी लोग इसलिए पिछड़ जाते हैं क्योंकि वे मैन्युफैक्चरिंग की बारीकियों को नहीं समझ पाते। अकादमिक ज्ञान और बिजनेस के बीच की खाई कम करना जरूरी चर्चा में यह बात भी सामने आई कि यूनिवर्सिटी की पढ़ाई और बाजार की जरूरतों के बीच बड़ी दूरी है। छात्र यह तो जानते हैं कि मशीन कैसे काम करेगी, लेकिन इसे बिजनेस मॉडल में कैसे बदला जाए, इसकी जानकारी कम होती है। विशेषज्ञों ने सलाह दी कि केवल इनोवेशन काफी नहीं है, बल्कि उसकी मार्केटिंग और उसे बड़े स्तर पर ले जाने की रणनीति भी जरूरी है। जब रिसर्च लैब से निकलकर समाज की किसी बड़ी समस्या का समाधान करती है, तभी निवेशक उसमें दिलचस्पी दिखाते हैं और फंडिंग के रास्ते खुलते हैं। इनक्यूबेशन सेंटर बनेंगे करियर का नया आधार एचबीटीयू टेक्नोलॉजी बिजनेस इंक्यूबेशन फाउंडेशन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को यह समझाना था कि उनके पास केवल डिग्री ही नहीं, बल्कि सफल स्टार्टअप शुरू करने की क्षमता भी है। पैनल में मौजूद विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि छात्रों को प्रोटोटाइप बनाते समय ही उत्पाद की लागत और बाजार की मांग का गहराई से अध्ययन शुरू कर देना चाहिए। इससे रिसर्च के दौरान ही स्पष्ट हो जाता है कि कौन-सा आइडिया आगे चलकर रेवेन्यू यानी आय का मजबूत स्रोत बन सकता है।



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