डिग्री में गलतियां लेकर भटक रहें DDU के स्टूडेंट्स:VC बोलीं- डिग्री प्रिंट होने से पहले सुधार के होते तीन मौके, महाविद्यालयों की लापरवाही

डिग्री में गलतियां लेकर भटक रहें DDU के स्टूडेंट्स:VC बोलीं- डिग्री प्रिंट होने से पहले सुधार के होते तीन मौके, महाविद्यालयों की लापरवाही




दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय और संबद्ध महाविद्यालयों के छात्र इन दिनों डिग्री में हो रही गलतियों को लेकर परेशान हैं। आएं दिन AD बिल्डिंग के परीक्षा विभाग में तमाम छात्र इस समस्या को लेकर पहुंच रहे हैं। ज्यादातर स्टूडेंट्स के हिंदी नामों में गड़बड़ियां देखी जा रही हैं। किसी की मात्रा गलत है, तो किसी का नाम ही। स्टूडेंट्स को इससे काफी दिक्क्तों का सामना कर पड़ रहा है। वहीं इस मामले कुलपति का कहना है कि डिग्री प्रिंट होने से पहले स्टूडेंट्स के पास सुधार के तीन मौके होते है। अगर वे ध्यान दे दें तो कोई गलती नहीं होगी। हिंदी नाम में गलती से ‘छमा’ की जगह ‘कसमा’ डिग्री सही करवाने आई DDU की छमा ने बताया कि उनके हिंदी नाम में गलती से छमा की जगह कसमा हो गया है। जबकि यह इंग्लिश की स्पेलिंग का उच्चारण है। उन्होंने कहा कि मुझे अब इसे लेकर यहां तक आना पड़ा है। जब मैंने गलती देखी तो घबरा गई क्योंकि नाम में गलती मतलब डिग्री बर्बाद। लेकिन फिर मैंने पता किया कि कैसे सही करवाना है और यहां आई हूं। ‘श’ के जगह ‘स’ से नाम में हुई गलती
वहीं लहसड़ी के राम विलास कॉलेज के प्रियेश ने बताया कि उन्होंने बीएड की डिग्री के लिए अप्लाई किया था। जब डिग्री आई तो नाम में गलती मिला। उन्होंने बताया कि मैं सरकारी नौकरी की तैयारी करता हूं। अगर डिग्री में नाम मैच नहीं करता है तो फॉर्म ही रिजेक्ट हो जाएगा। इसलिए यहां सुधार करवाने आया हूं। अब कुछ दिन इंतजार करना पड़ेगा , तब फॉर्म डाल सकूंगा। ‘इ’ के बजाय ‘ई’ की मात्रा ऐसा ही कुछ समस्या है कौड़ीराम के सर्वोदय महाविद्यालय की प्रीति के साथ। प्रीति जब अपना M. A. का डिग्री कॉलेज से ली तो देखा कि उनके हिंदी नाम में मात्रा गलत है। ‘त’ पर ‘इ’ के बजाय ‘ई’ की मात्रा है, जबकि वह अपना नाम हिंदी में लिखने के लिए त पर छोटी ई का इस्तेमाल करती हैं। उन्होंने बताया कि अब कॉलेज वालों ने बताया कि डीडीयू में ही इसका सुधार होगा तुम्हें वहीं जाना पड़ेगा। बस इसी काम के लिए मुझे अपना काम छोड़ कर स्पेशली यहां आना पड़ा। सभी काम कम्प्यूटराइज होते, जो डेटा मिलेगा, वहीं प्रिंट होगा हालांकि इस मामले में कुलपति प्रोफेसर पूनम टंडन का कहना है कि विश्वविद्यालय छात्रों की ओर से प्राप्त जानकारी के हिसाब से ही काम करता है। DDU के स्टूडेंट्स खुद सभी जानकारी देते हैं, वहीं संबद्ध महाविद्यालयों से मिली डेटा के हिसाब से वहां के स्टूडेंट्स की डिग्री प्रिंट की जाती है। हमारे पास हिंदी और इंग्लिश दोनों टाइपिस्ट हैं। वे अपना काम डिग्री के लिए मिली जानकारी के हिसाब से अच्छे से करते हैं। सभी काम कम्प्यूटराइज होते हैं, तो जो डेटा मिलेगा, वहीं प्रिंट होगा। सही डेटा भरना छात्रों की पहली जिम्मेदारी
उन्होंने बताया कि डिग्री प्रिंट करने से पहले स्टूडेंट्स के पास लगभग 3 मौके होते हैं, जिससे वे किसी भी तरह की गलती का सुधार करवा सकते हैं। पहला कि फॉर्म खुद स्टूडेंट्स या महाविद्यालय की ओर से भरा जाता है, जिसमें सही डेटा भरना उनकी पहली जिम्मेदारी है। करेक्शन के लिए मिलते करीब 15 दिन
कुलपति प्रोफेसर पूनम टंडन का कहना है कि दूसरा कि डिग्री प्रिंट होने से पहले महाविद्यालयों के लिए पोर्टल खोला जाता है और करीब 15 दिनों का समय दिया जाता है कि उसमें करेक्शन कर लें। उनमें किसी भी तरह कि त्रुटि को पॉइंट आउट कर सकें और फिर उचित सुधार करके डिग्री प्रिंट की जाए। अब इन 15 दिनों में जब कोई गलती निकल कर नहीं आती तो यह मान लिया जाता है कि सब डेटा सही हैं। फिर डिग्री प्रिंट हो जाती है। डिजिलॉकर पर भी कर सकते चेक उन्होंने बताया कि तीसरी मौका तब होता है जब कॉन्वोकेशन के कुछ ही दिन बाद डिग्री पहले डिजिलॉकर पर अपलोड कर दी जाती है। उसके बाद प्रिंट होने में कम से कम डेढ़ से दो महीने लग जाते हैं। उस समय भी स्टूडेंट्स ध्यान नहीं देते कि अगर कोई गलती रह गई हो तो सुधार पोर्टल पर सही करवाने आवेदन डाल दें। ताकि प्रिंट होने से पहले उसमें सुधार करा दिया जाए। उन्हें सतर्कता से देखना चाहिए। जिससे उन्हें सहूलियत हो। इतने मौके मिलने के बाद भी जब स्टूडेंट्स ध्यान नहीं देते तो उन्हें कॉलेज का चक्कर न लगाना पड़ता। हालांकि विश्वविद्यालय की ओर से आवेदन पर उनकी डिग्रियां जल्द से जल्द सुधार करवा नई डिग्री प्रोवाइड करवाई जाती है। गूगल ट्रांसलेटर को करवाया बंद
कुलपति ने आगे कहा- पहले इंफॉर्मेशन टाइप करने के लिए गूगल टाइपिंग का इस्तेमाल किया जाता था लेकिन हमने इसे बंद करवा कर हिंदी टाइपिस्ट को रखा। अब हिंदी के लिए यूनिकोड के माध्यम से होता है। हिंदी और इंग्लिश दोनों फॉर्मेट में शुरू करवाई फॉर्म
कुलपति ने बताया कि डिग्री के अप्लाई करने के लिए स्टूडेंट्स जो फॉर्म भरते थे उसमें केवल इंग्लिश का ही ऑप्शन होता था। लेकिन हिंदी की मात्राओं और नामों में हो रही गलतियों को देखते हुए हमने 2024-25 सेशन से फॉर्म का फॉर्मेट हिंदी और इंग्लिश दोनों रखा है। जिसकी वजह से काफी हद तकइसमें सुधार देखा जा रहा।



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