दहेज हत्या के आरोपी बरी, कोर्ट ने पुलिस को फटकारा:सांप के काटने से हुई थी मौत, 3 साल जेल में रहे आरोपी
बुलंदशहर की एक अदालत ने दहेज हत्या के एक मामले में 32 वर्षीय युवक और उसके माता-पिता को बरी कर दिया है। अदालत ने पाया कि 24 वर्षीय महिला की मौत किसी आपराधिक कृत्य से नहीं, बल्कि सांप के काटने से हुई थी। तीनों आरोपियों ने इस मामले में तीन साल जेल में बिताए, जिसे अदालत ने गंभीर अन्याय मानते हुए राज्य सरकार को प्रत्येक आरोपी को एक-एक लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। साथ ही, जांच में लापरवाही के लिए संबंधित जांच अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे) शहजाद अली की अदालत ने गुरुवार को यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। अदालत ने उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को निर्देश दिया है कि मामले की खराब विवेचना के लिए जिम्मेदार जांच अधिकारी के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए। बचाव पक्ष के अधिवक्ता इक़बाल ने बताया कि यह मामला ममता देवी से जुड़ा है, जिनकी शादी मई 2017 में दुकानदार सुमित कुमार से हुई थी। बच्चे को जन्म देने के लगभग 15 दिन बाद ममता अपने घर पर बेहोशी की हालत में मिली थीं और अस्पताल में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया था। इसके बाद ममता के परिजनों ने दहेज उत्पीड़न और हत्या का आरोप लगाया था। खुर्जा थाना पुलिस ने सुमित, उसके पिता देवेंद्र और मां रूपवती के खिलाफ आईपीसी की धारा 498ए, 304बी तथा दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3/4 के तहत मुकदमा दर्ज किया था। मुकदमे की सुनवाई के दौरान, चिकित्सकीय और फॉरेंसिक साक्ष्यों से यह बात सामने आई कि महिला की मौत सांप के विष के कारण हुई थी। बचाव पक्ष के अधिवक्ता इकबाल अहमद खान ने अदालत में दलील दी कि विसरा रिपोर्ट में पाए गए तत्व सांप के काटने (एनवेनोमेशन) से मेल खाते हैं। अदालत ने आरोपियों को बरी करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। न्यायालय ने यह भी नोट किया कि मृतका के परिजनों द्वारा दहेज मांग या उत्पीड़न की कोई पूर्व शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी। इसके अलावा, यह भी रिकॉर्ड पर आया कि ससुराल पक्ष ही महिला को तुरंत स्थानीय चिकित्सक के पास ले गया, जहां उसे सांप काटने का मामला बताया गया था। तहसीलदार की रिपोर्ट में भी मौत का कारण सांप का काटना दर्ज था। इसके बावजूद पुलिस ने उपलब्ध साक्ष्यों की अनदेखी कर दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज कर दिया। अदालत ने यूपी डीजीपी और राज्य सरकार को यह भी निर्देश दिए कि जघन्य अपराधों की जांच के लिए सक्षम और प्रशिक्षित जांच अधिकारियों की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि निर्दोष लोगों का गलत अभियोजन न हो। साथ ही, जांच अधिकारी डीएसपी गोपाल सिंह के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी दिए गए हैं
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