पद्मश्री पुरस्कार:अंतर्राष्ट्रीय भपंग वादक गफरुद्दीन मेवाती को मिलेगा पद्मश्री, 48 देशों में दे चुके हैं प्रस्तुति
कैथवाड़ा निवासी अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त भपंग वादक गफरुद्दीन मेवाती को पद्मश्री पुरस्कार देने की घोषणा की गई है। जैसे ही केंद्र सरकार ने इसकी घोषणा की उनके गांव में जश्न का माहौल बन गया और इसे बृज मेवात क्षेत्र की बड़ी उपलब्धि बताया गया। 26 सितम्बर 1962 को कैथवाड़ा में जन्मे गफरुद्दीन मेवाती भपंग वादन और पांडुक का कड़ा के लोकगायक है। पांडुक के कड़ा के एक मात्र कलाकार हैं। उन्हें इससे पहले राष्ट्रपति पुरस्कार के अलावा संगीत अकादमी का फैलोशिप सम्मान सहित अनेक राज्य स्तरीय पुरस्कार मिल चुके है। मेवाती ने भास्कर को बताया कि जब वे चार वर्ष के थे तो अपने पिता बुद्धसिंह जोगी के साथ गावो में जाकर अपनी शैली में विभिन्न हिंदू देवी देवताओं की पौराणिक कहानियां सुनाते थे। उनके पिता को सारंगी में महारत हांसिल थी। पांचवी तक शिक्षा गांव में पाने के बाद वे सीकरी पढ़ने आते थे क्लास 9 में स्कूल में हुए वार्षिकोत्सव में भपंग वादन की प्रस्तुति पर उन्हें पहला गोल्ड मेडल मिला इसके बाद उन्हें लगातार तीन गोल्ड मेडल मिले। उन्होंने बचपन से ही महाभारत, रामायण, भगवान श्री कृष्ण, शिवजी का ब्याहबला आदि का ज्ञान कर लिया और उसे भपंग के साथ सुनाने लगे।धीरे धीरे प्रसिद्धि बढ़ती गई और राज्य स्तर के कार्यक्रमों में बुलाया जाने लगा।उन्हें पाण्डुन का कड़ा के 2500 से अधिक दोहे याद है।वे रामायण को भी अपनी शैली में गाते है उनका कहना है कि मेवात में इसे लंका चढ़ाई के नाम से प्रसिद्धि मिली।इसके अलावा उन्होंने समाज को जागरूक करने के भी कई भजन गाए। गांव कैथवाड़ा में जश्न, पहली बार सीकरी में मिला था गोल्डमेडल 1992 में कनाड़ा में दी पहली प्रस्तुति गफरुद्दीन मेवाती अभी तक 48 देशों में अपनी प्रस्तुति दे चुके है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1992 में वे पहली बार कनाडा जाकर भपंग वादन करके आए थे।इसके बाद अंतर्राष्ट्रीय स्तर का सिलसिला शुरु हो गया और फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, लंदन सहित कुल 48 देशों में जाकर इस कला को प्रस्तुत कर चुके है। राष्ट्रपति पुरस्कार से हो चुके सम्मानित मेवाती 2024 में राष्ट्रपति पुरस्कार प्रदान किया गया था। इसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें यह सम्मान दिया था। इसके अलावा वर्ष 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने उन्हें सम्मानित किया था। इसके अलावा 2024 में उन्हें संगीत अकादमी का फैलोशिप सम्मान भी मिल चुका है।
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