फैशन शो में दिखी वेस्ट मैटेरियल से बनाई ड्रेस:भारतीय कलाओं को संवारने वाली महिला आर्टिजंस को मिला अवॉर्ड, पारम्परिक कलाओं को मिला मंच
वेस्ट मैटेरियल से बनाए फैशन कलेक्शन ने सबसे ज्यादा चर्चा बटोरी। स्टूडेंट्स के बनाए कलेक्शन को स्टूडेंट्स मॉडल्स ने फैशन शो में प्रस्तुत किया। मौका था, आर्च कॉलेज ऑफ डिजाइन एंड बिजनेस के 26वें स्थापना दिवस पर हुए फैशन शो का। इस दौरान वुमन इन डिजाइन- आर्टिसनल एक्सीलेंसी अवॉर्ड्स का भी आयोजन किया गया। इस अवसर पर शिल्प, रचनात्मकता और महिला सशक्तिकरण को समर्पित विविध गतिविधियों का आयोजन किया गया, जिसमें डिजाइनर, कारीगर, शिक्षाविद और छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन और सरस्वती वंदना से हुई। इसके बाद एक ऑडियो-विजुअल प्रस्तुति के माध्यम से कॉलेज की 26 वर्षों की यात्रा और डिजाइन शिक्षा, नवाचार तथा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण से जुड़ी उपलब्धियों को साझा किया गया। संस्थान की संस्थापक एवं निदेशक अर्चना सुराना ने स्वागत संबोधन में कहा कि कॉलेज का उद्देश्य डिजाइन थिंकिंग के माध्यम से परंपरा, ज्ञान और नवाचार को जोड़ते हुए महिलाओं और कारीगर समुदाय को सशक्त बनाना है। पैनल चर्चा में शिल्प और रचनात्मक अर्थव्यवस्था पर विमर्श कार्यक्रम के दौरान दो महत्वपूर्ण पैनल चर्चाएं आयोजित की गईं। पहली चर्चा विविंग द फ्यूचर: क्राफ्ट कल्चर एंड क्रिएटिव इकोनोमी विषय पर केंद्रित रही, जिसमें पारंपरिक शिल्प को डिजाइन नवाचार और रचनात्मक अर्थव्यवस्था से जोड़ने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श हुआ। दूसरी चर्चा हैरिटेज टू मार्केटप्लेस: रिमेंबरिंग क्राफ्ट थ्रू डिजाइन विषय पर आधारित थी, जिसमें पारंपरिक शिल्प को आधुनिक बाजार से जोड़कर कारीगरों के लिए स्थायी आजीविका के अवसर बनाने पर चर्चा की गई। फैशन शो में छात्रों के कलेक्शन ने दिखाया परंपरा और आधुनिकता का संगम कार्यक्रम का सबसे आकर्षक हिस्सा छात्रों द्वारा प्रस्तुत फैशन शो रहा, जिसमें डिजाइन विद्यार्थियों ने पारंपरिक भारतीय शिल्प को समकालीन फैशन के साथ जोड़ते हुए अनूठे कलेक्शन पेश किए। छात्रों के कलेक्शन में हैंड ब्लॉक प्रिंट, ब्लू पॉटरी, एप्लीक और एम्ब्रॉयडरी, जूट शिल्प, लाक शिल्प और तारकशी जैसे पारंपरिक शिल्पों को आधुनिक परिधानों में रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया गया। कुछ कलेक्शनों में राजस्थान की लोक परंपरा से प्रेरित रंग संयोजन और टेक्सचर का प्रयोग किया गया, वहीं कई डिजाइनों में टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल फैब्रिक्स का उपयोग कर सस्टेनेबल फैशन की अवधारणा को भी दर्शाया गया। फैशन शो में प्रस्तुत डिजाइनों ने यह दर्शाया कि कैसे पारंपरिक कारीगरी को नए डिजाइन दृष्टिकोण के साथ जोड़कर वैश्विक फैशन परिदृश्य में नई पहचान दी जा सकती है। ‘आर्टिसनल एक्सीलेंसी अवॉर्ड्स’ से महिला कारीगरों का सम्मान इस अवसर पर विभिन्न शिल्प क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली महिला कारीगरों को ‘आर्टिसनल एक्सीलेंसी अवॉर्ड्स’ से सम्मानित किया गया। इनमें लकड़ी शिल्प, जूट शिल्प, ज्वेलरी डिजाइन, हैंड ब्लॉक प्रिंटिंग, ठीकरा कला और तारकशी जैसी विधाओं से जुड़ी कारीगरों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. आशु चौधरी (रजिस्ट्रार, राजस्थान विश्वविद्यालय) और पद्मिनी कुमारी (‘रॉयल ट्रेजर’ की संस्थापक) उपस्थित रहीं। उन्होंने महिला कारीगरों को सम्मानित करते हुए भारतीय शिल्प परंपरा के संरक्षण में उनके योगदान की सराहना की। इसके अलावा सोनल चित्तलांशी (सीईओ, FORHEX) और रमणिका कौर (स्टेट प्रोजेक्ट मैनेजर, राजीविका) ने भी कारीगर समुदाय के सशक्तिकरण और ग्रामीण आजीविका को मजबूत बनाने की दिशा में सहयोगात्मक पहल की आवश्यकता पर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम के अंत में छात्रों द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया।
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