बदनाम रहे गांव की पहचान बदली:गांव की पहचान बदलने पानी में उतरी बेटियां… जीत लाईं पदक
गलत कारणों से बदनाम ‘सूखा करार टप्पा’ गांव की बेटियों ने इसे ‘खिलाड़ियों का गांव’ के तौर पर नई पहचान दी है। मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के इस गांव के युवाओं ने खेल को ही अपना करिअर बना लिया है। इन्हें रास्ता दिखाया है गांव की बेटियों गंगा और जमना ने। इन दोनों का सबसे पहले वॉटर स्पोर्ट्स एकेडमी भोपाल में चयन हुआ। गंगा को असम राइफल्स में नौकरी मिल गई। इसके बाद गांव के दूसरे युवाओं ने खेलों में करिअर तलाशना शुरू किया। गांव की 10-12 बेटियां जिला और राज्य स्तर पर खेल रही हैं। गांव की मेघा ने भारतीय खेल प्राधिकरण एलेप्पी (केरल) में हुई ऑल इंडिया रोइंग चैम्पियनशिप में फोर और ऐट इवेंट में दो रजत पदक जीते। जमना ने इसी प्रतियोगिता में ऐट इवेंट में कांस्य पदक जीता। निरंजना ने भी इसी चैम्पियनशिप में ऐट इवेंट में रजत पदक जीता। जानकी ने भोपाल में हुई 34वीं नेशनल जूनियर कैनो स्प्रिंट में सी4 1000 मीटर और सी4 500 मीटर में गोल्ड, सी2 500 मीटर में पदक जीते। अभय राज्य वॉटर स्पोर्ट्स अकेडमी महेश्वर में प्रशिक्षण ले रहे हैं।
गांव के बच्चे रोज चार घंटे मैदान में अलग-अलग खेलों का अभ्यास करते हैं। सुबह 5 से 6:30 बजे और शाम को 5 से 7 बजे तक बच्चे मैदान में जुटे रहते हैं। छठवीं में पढ़ने वाली प्राची और 8वीं की भारती बताती हैं कि वे पढ़ाई करती हैं, लेकिन खेलों को पूरा समय देती हैं। गांव की बेटियां ऑल इंडिया रोइंग चैम्पियनशिप में भी मेडल लाई हैं। 2008 में शुरू हुए थे प्रयास
खेल एवं युवा कल्याण विभाग के भानू यादव ने बताया कि 2008 से गांव की पहचान बदलने का प्रयास शुरू हुआ। गंगा और जमना ने विधायक ट्रॉफी के फाइनल में गांव की ओर से खेला और कप जीता। इसके बाद इस गांव के बच्चों को प्रशिक्षण देना शुरू किया गया।
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