मिश्रित खेती व जैविक मॉडल से बढ़ी आय:हजारीबाग की किसान संगीता देवी ने लिखी सफलता की कहानी, हरहद गांव के किसानों की बदली सोच
खेती को घाटे का सौदा मानने की धारणा को हजारीबाग जिले के कटकमसांडी प्रखंड के हरहद गांव की महिला किसानों ने पूरी तरह बदल कर रख दिया है। रसायन मुक्त और जैविक खेती के साथ मिश्रित फसल प्रणाली अपनाकर गांव की गुलाब आजीविका महिला मंडल की महिला किसान चिन्ता देवी, संगीता देवी, सम्फुल देवी, मीना देवी सहित अन्य आज न केवल आत्मनिर्भर बन चुकी हैं, बल्कि आसपास के किसानों के लिए प्रेरणा का केंद्र भी बन गई हैं। महिला किसानों ने परंपरागत एकल फसल प्रणाली को छोड़ते हुए मिश्रित खेती (मल्टी-क्रॉप मॉडल) को अपनाया। एक ही खेत में अनाज, दलहन, तिलहन, मौसमी सब्जियों और फलदार पौधों की खेती शुरू की गई। मिश्रित खेती के तहत आम, लीची, अमरूद, केला, पपीता, कटहल और नींबू जैसे फलदार पौधों लगाए गए। फलदार पौधों के बीच सब्जी और अन्य फसलों की खेती से अतिरिक्त आमदनी का रास्ता खुला। फलदार पौधे दीर्घकालिक आय का स्रोत बने, जबकि सब्जियां और मौसमी फसलें नियमित नकद आय देती रहीं। इससे खेती मौसम की अनिश्चितताओं और बाजार के उतार-चढ़ाव से काफी हद तक सुरक्षित हो गई। रासायनिक खादों के दुष्प्रभावों को जान रहे हैं लोग खेती की बढ़ती लागत और रासायनिक खादों के दुष्प्रभावों को देखते हुए महिला किसानों ने पूरी तरह जैविक पद्धति अपनाने का निर्णय लिया। खेत के पास ही वर्मी कम्पोस्ट यूनिट स्थापित कर केंचुआ खाद का उत्पादन शुरू किया गया। जैविक खाद के उपयोग से मिट्टी की उर्वरता में सुधार हुआ, फसलों की गुणवत्ता बढ़ी और उत्पादन पर सकारात्मक असर पड़ा। रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर होने वाला खर्च लगभग समाप्त हो गया, जिससे मुनाफा सीधे बढ़ा। जैविक खेती की पूछ बढ़ी, उसके उत्पाद की बाजार कीमत भी अधिक महिला किसान मीना देवी और सम्फुल देवी बताती हैं कि जैविक खेती से लागत कम होने के साथ-साथ बाजार में उपज की बेहतर कीमत मिल रही है। रसायन मुक्त सब्जियों और फलों की मांग स्थानीय बाजारों में लगातार बढ़ रही है। कम खर्च और अच्छे दाम के कारण आज वे खेती से आत्मनिर्भर बन चुकी हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से कहीं अधिक मजबूत हुई है। जानिए… कौन हैं संगीता देवी हरहद गांव की संगीता देवी के तीन बच्चे एक बेटा और दो बेटी हैं। पति अशोक उरांव मजदूरी व खेती करते है। महिला किसानों की इस सफलता को देखकर आसपास के गांवों के किसान उनके खेतों का दौरा कर रहे हैं और मिश्रित खेती व जैविक पद्धति को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। आत्मा के टेक्निकल मैनेजर अनिकेत टुडुवार और लीड्स के परियोजना समन्वयक आलोक वर्मा के सहयोग से महिलाएं खेती में नई तकनीक सीख आय बढ़ाने के साथ पर्यावरण संतुलन के लिए भी प्रेरित हो रही हैं।
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