रिटायरमेंट के बाद भी 70 के उम्र में देश सेवा:सैकड़ों युवाओं को सेना में जाने का निशुल्क प्रशिक्षण देते हैं रामायण महतो

रिटायरमेंट के बाद भी 70 के उम्र में देश सेवा:सैकड़ों युवाओं को सेना में जाने का निशुल्क प्रशिक्षण देते हैं रामायण महतो




“ए सोल्जर इज़ नेवर ऑफ ड्यूटी” – इस कथन को मंसूरचक प्रखंड क्षेत्र के कस्टोली गांव निवासी सेवानिवृत्त सूबेदार रामायण महतो अपने जीवन से सत्य साबित कर रहे हैं। सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद भी वे आज देश सेवा में निरंतर जुटे हुए हैं और अपने जीवन का प्रत्येक क्षण राष्ट्र के नाम समर्पित कर रहे हैं। करीब 70 वर्ष की उम्र में भी रामायण महतो का उत्साह और देशभक्ति का जज्बा युवाओं के लिए प्रेरणा है। वे हर साल कई युवाओं को भारतीय सेना में भर्ती होने के लिए तैयार कर रहे हैं, जिससे गांव और आसपास के क्षेत्रों के नौजवानों में सेना के प्रति खास आकर्षण पैदा हुआ है। देशभक्ति की मिसाल बने रामायण महतो का चयन 19 दिसंबर 1983 को भारतीय सेना में सिपाही के पद पर हुआ था। उन्होंने 28 वर्षों तक निष्ठा और ईमानदारी से देश की सेवा की और सेवानिवृत्त हुए। हालांकि, उनका देश के प्रति समर्पण रिटायरमेंट के साथ समाप्त नहीं हुआ, बल्कि उसके बाद और भी मजबूत हुआ। सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्होंने यह ठान लिया कि वे राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभाते रहेंगे। इसी संकल्प के साथ वे आज भी युवाओं को अनुशासन, मेहनत और देशप्रेम का पाठ पढ़ा रहे हैं, ताकि अधिक से अधिक युवा सेना में जाकर देश की रक्षा कर सकें। सूबेदार पद से हुए थे रिटायर्ड अपने सैन्य जीवन में उन्होंने लांस नायक, नायक, हवलदार, नायक सूबेदार और सूबेदार जैसे महत्वपूर्ण पदों पर सेवा दी और 31 दिसंबर 2011 को सेवानिवृत्त हुए। 28 वर्षों तक देश की सेवा करने के बाद भी उनका उत्साह और जज्बा कम नहीं हुआ। सेवानिवृत्ति के बाद जहां अधिकांश लोग आराम करना पसंद करते हैं, वहीं रामायण महतो आज भी प्रतिदिन सुबह पांच बजे कस्टोली चौर में सैकड़ों युवक-युवतियों को सेना में भर्ती की तैयारी के लिए निशुल्क प्रशिक्षण देते हैं। कस्टोली चौर में सुबह से ही रहती है युवती चहल-पहल उनके प्रयासों से पहले वीरान रहने वाला कस्टोली चौर अब सुबह से ही चहल-पहल से गुलजार रहता है। आसपास के गांवों के बुजुर्ग भी यहां सुबह की सैर के लिए पहुंचते हैं। रामायण महतो ने बताया कि बरसात के मौसम में आंधी-बारिश के कारण प्रशिक्षण लेने वाले युवाओं को काफी परेशानी होती थी और स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता था। इस समस्या को देखते हुए उन्होंने अपने भाइयों से बात कर प्रशिक्षण स्थल के लिए कुछ जमीन बिहार सरकार के नाम कर दी, ताकि वहां स्थायी सुविधा विकसित की जा सके। युवाओं के लिए लाइब्रेरी निर्माण की घोषणा की गई है उन्होंने बताया कि स्थानीय विधायक एवं बिहार सरकार के तत्कालीन खेल मंत्री तथा वर्तमान डेयरी, मत्स्य एवं पशुपालन मंत्री सुरेंद्र मेहता ने एक चक्रवात आश्रय स्थल के उद्घाटन समारोह के दौरान युवाओं की मांग पर एक लाइब्रेरी निर्माण की घोषणा की थी। हालांकि, यह घोषणा अब तक पूरी नहीं हो सकी है। युवाओं को अब भी उम्मीद है कि मंत्री उनकी मांग पूरी कर उनके भविष्य निर्माण में सहयोग करेंगे। रामायण महतो का यह प्रयास न केवल युवाओं को प्रेरित कर रहा है, बल्कि समाज में देशभक्ति और सेवा भावना की मिसाल भी पेश कर रहा है।



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