संजय सेतु के ज्वाइंटर उखड़े, राहगीर सहमे:बाराबंकी में 45 साल पुराने पुल में दरारें, कंपन से खतरा
बाराबंकी-बहराइच राष्ट्रीय मार्ग पर स्थित संजय सेतु के ज्वाइंटर जगह-जगह से उखड़ गए हैं। करीब डेढ़ किलोमीटर लंबा यह पुल 45 वर्ष पुराना है, जिसका निर्माण 9 अप्रैल 1981 को पूरा हुआ था। पुल से गुजरते वाहनों को तेज झटके लग रहे हैं, जिससे यात्रियों में भय का माहौल है। भारी वाहनों के निकलने पर पुल में कंपन भी महसूस होता है, जिससे इसकी मजबूती और सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं। पिछले दो वर्षों में पुल के ज्वाइंटर खुलने और बेयरिंग खिसकने की कई घटनाएं सामने आई हैं। हर बार अस्थायी मरम्मत करके काम चलाया गया, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं हो सका। इन मरम्मत कार्यों के दौरान कई बार दो-दो किलोमीटर लंबा जाम लग चुका है, जिससे मरीज, स्कूली बच्चे और आम यात्री घंटों फंसे रहे। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने पुल की स्थायी मरम्मत के लिए इसे दो माह तक पूरी तरह बंद करने का प्रस्ताव शासन को भेजा था। इस दौरान यातायात को अयोध्या और सीतापुर के लंबे डायवर्जन मार्गों से संचालित करने की योजना थी। प्रस्ताव की जानकारी मिलने पर गोंडा, बलरामपुर, बहराइच और श्रावस्ती के जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर जनता की परेशानी से अवगत कराया। इसके बाद यह सहमति बनी कि पुल बंद करने से पहले एक अस्थायी पीपे (पांटून) पुल का निर्माण किया जाएगा। संजय सेतु की मरम्मत में लगभग तीन करोड़ रुपये का अनुमान है, जबकि अस्थायी पांटून पुल पर करीब आठ करोड़ रुपये की लागत बताई जा रही है। यह आर्थिक पहलू ही फिलहाल निर्णय में देरी का मुख्य कारण माना जा रहा है।
यह पुल सूबे की राजधानी लखनऊ को पूर्वांचल और नेपाल सीमा तक जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण मार्ग है। गोंडा सहित कई जिलों के लोग इसी रास्ते से आवागमन करते हैं, और यह व्यापारिक गतिविधियों के लिए भी एक मुख्य कड़ी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक नया पुल नहीं बन जाता, तब तक मौजूदा सेतु की मजबूत और स्थायी मरम्मत बेहद आवश्यक है। लगातार बढ़ते कंपन और उखड़ते ज्वाइंटरों के कारण राहगीरों की मांग है कि सरकार जल्द से जल्द इस विषय पर निर्णय ले और इस महत्वपूर्ण पुल को सुरक्षित बनाए।
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