सोनीपत के अंकित की रूस-युक्रेन युद्ध में मौत:स्टडी वीजा पर विदेश गया; परिवार का इकलौता सहारा था, आज आएगी डेडबॉडी

सोनीपत के अंकित की रूस-युक्रेन युद्ध में मौत:स्टडी वीजा पर विदेश गया; परिवार का इकलौता सहारा था, आज आएगी डेडबॉडी




सोनीपत के इब्राहिमपुर का 30 वर्षीय युवक अंकित, जो बेहतर भविष्य और परिवार की उम्मीदों को पूरा करने के लिए स्टडी वीजा पर रूस गया था, अब यूक्रेन-रूस युद्ध की भेंट चढ़ गया। परिवार ने कर्ज और मेहनत से करीब 5 लाख रुपये जुटाकर उसे विदेश भेजा था, ताकि वह पढ़ाई कर अच्छी नौकरी पा सके और घर की आर्थिक स्थिति सुधार सके। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। अंकित अब जिंदा नहीं, बल्कि ताबूत में अपने गांव लौट रहा है। आज वीरवार को अंकित की डेड बॉडी सोनीपत लाई जाएगी। इस घटना ने न सिर्फ परिवार, बल्कि पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। स्टडी वीजा पर गया, नौकरी के साथ कर रहा था पढ़ाई अंकित 13 मार्च 2025 को एक मेडिएटर के जरिए स्टडी वीजा पर रूस गया था। उसने सोनीपत से अपनी बीए की पढ़ाई पूरी की थी और आगे लैंग्वेज कोर्स करने के लिए विदेश का रुख किया। शुरुआती 5-6 महीनों तक वह मॉस्को में एक होटल में काम करते हुए अपनी पढ़ाई जारी रखे हुए था। लालच और दबाव के बीच सेना में भर्ती मामा संजय के अनुसार, रूस में भारतीय युवाओं को पहले अच्छी सैलरी का लालच दिया जाता है और जो इससे सहमत नहीं होते, उन्हें दबाव डालकर सेना में भर्ती किया जाता है। अंकित को भी एक भारतीय एजेंट के माध्यम से रूस की सेना में शामिल कराया गया। बताया गया कि उसे करीब 2 लाख रुपये मासिक वेतन का लालच दिया गया था। 15 दिन की ट्रेनिंग के बाद सीधे युद्ध में भेजा गया मिली जानकारी के अनुसार, अंकित को 26 अगस्त 2025 को रूस के एवानावा शहर में सेना में भर्ती किया गया। वहां उसे महज 15 दिन की ट्रेनिंग दी गई और तुरंत बाद रूस- यूक्रेन फ्रंटलाइन पर भेज दिया गया। बताया जा रहा है कि फ्रंटलाइन तक पहुंचने के लिए नदी पार करनी पड़ती थी। इसी दौरान लड़ाई में अंकित की मौत हो गई। 12 अक्टूबर के बाद परिवार से टूटा संपर्क अंकित के मामा संजय के अनुसार, 12 अक्टूबर 2025 को आखिरी बार उसकी परिवार से बातचीत हुई थी। इसके बाद से उसका कोई संपर्क नहीं हो पाया। परिवार को उम्मीद थी कि नेटवर्क की समस्या के कारण बात नहीं हो रही, लेकिन उन्हें क्या पता था कि उनका बेटा अब इस दुनिया में नहीं रहा। दूतावास से मिली मौत की सूचना मंगलवार को अंकित की मां और उसके दोस्त जितेंद्र को रूस स्थित भारतीय दूतावास के माध्यम से उसकी मौत की सूचना मिली। इस खबर के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। बुधवार को अंकित का पार्थिव शरीर उसके पैतृक गांव कुराड़ इब्राहिमपुर पहुंचने की संभावना है। परिवार का इकलौता सहारा था अंकित अंकित अपने परिवार का इकलौता बेटा था। उसकी दो बहनें शादीशुदा हैं। पिता पहले ड्राइविंग करते थे, लेकिन बीमारियों के चलते पिछले 6 साल से बिस्तर पर हैं। शुगर की गंभीर बीमारी के कारण उनका एक पैर घुटने तक काटना पड़ा। परिवार के पास महज आधा एकड़ जमीन है और कोई स्थायी आय का साधन नहीं है। मां गृहिणी हैं और पूरे परिवार की उम्मीदें अंकित पर टिकी थीं।
सपनों के साथ टूट गया परिवार
परिवार को उम्मीद थी कि अंकित विदेश से लौटकर घर की हालत सुधारेगा, सुविधाएं बढ़ाएगा और फिर उसकी शादी की जाएगी। लेकिन अब वह सारी उम्मीदें चकनाचूर हो गई हैं। माता-पिता आज भी उस दिन का इंतजार कर रहे थे जब उनका बेटा एक साल पूरा कर घर लौटेगा, लेकिन अब वह इंतजार एक दर्दनाक सच में बदल चुका है।
गांव में मातम
अंकित की मौत के बाद गांव में शोक की लहर है। वहीं इस पूरे मामले ने विदेश भेजने वाले एजेंटों और युवाओं को फंसाकर युद्ध में झोंकने के मामलों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिवार ने मामले की जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। वहीं अन्य भारतीयों के लिए भी मांग उठाई कि अन्य युवकों को सकुशल भारत लाया जाए।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

India Fontline News

Subscribe Our NewsLetter!