हिमाचल में अयोग्य विधायकों की पेंशन रोकने का बिल पेश:दल-बदल पर सरकार का वार, पेंशन का हक खत्म होगा, सील्ड रोड का परमिट महंगा

हिमाचल में अयोग्य विधायकों की पेंशन रोकने का बिल पेश:दल-बदल पर सरकार का वार, पेंशन का हक खत्म होगा, सील्ड रोड का परमिट महंगा




हिमाचल प्रदेश में दल-बदल करने वाले विधायकों की पेंशन रुक सकती है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कानून में इसका प्रावधान करने के लिए बुधवार को विधानसभा में ‘हिमाचल प्रदेश विधानसभा (सदस्यों के भत्ते और पेंशन) संशोधन विधेयक, 2026’ पेश कर दिया है। विधानसभा में इस विधेयक पर गुरुवार को चर्चा के बाद पारित किया जा सकता है। इसके बाद इसे राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। राज्यपाल की स्वीकृति मिलने के बाद यह कानून लागू हो जाएगा। इस विधेयक में प्रावधान किया गया है कि यदि कोई विधायक दल-बदल के चलते संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्य घोषित करार होता है, तो उसे पेंशन का लाभ नहीं मिलेगा। यह व्यवस्था 14वीं विधानसभा या उसके बाद निर्वाचित विधायकों पर लागू होगी। अयोग्य घोषित होने पर पेंशन नहीं मिलेगी यह संशोधन विधेयक वर्ष 1971 के मूल अधिनियम में बदलाव से जुड़ा है, जिसके तहत विधायकों को भत्ते और पेंशन दी जाती है। मौजूदा प्रावधानों के अनुसार, पांच वर्ष तक विधायक रहने वाले सदस्य को 50 हजार रुपए मासिक पेंशन मिलती है और अतिरिक्त कार्यकाल पर प्रत्येक वर्ष के लिए एक हजार रुपए की बढ़ोतरी का प्रावधान है। दल-बदल को हतोत्साहित करने के मकसद से संशोधन विधेयक के उद्देश्य और कारणों में कहा गया है कि मौजूदा कानून में दल-बदल को हतोत्साहित करने के लिए कोई विशेष प्रावधान नहीं था। ऐसे में जनादेश की रक्षा, लोकतांत्रिक मूल्यों के संरक्षण और दलबदल जैसी प्रवृत्तियों पर रोक लगाने के लिए यह संशोधन आवश्यक माना गया है। सरकार का मानना है कि पेंशन जैसे दीर्घकालिक लाभ को जोड़कर दलबदल पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा। खास बात यह है कि इस संशोधन से राज्य पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा। ड्रग्स तस्करी में शामिल लोग चुनाव नहीं लड़ पाएंगे हिमाचल सरकार ने आज एक और महत्वपूर्ण बिल विधानसभा में पेश किया। इसमें सरकार हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (संशोधन) विधेयक, 2026 में संशोधन करने जा रही है। इस बिल में संशोधन करने के ड्रग्स तस्करी में शामिल लोगों के पंचायत चुनाव लड़ने पर पूरी तरह रोक लग जाएगी। इस बिल को भी कल विधानसभा में पारित किया जाना है। राज्य में 31 मई से पहले पंचायत चुनाव होने है। ऐसे में नया प्रावधान महत्वपूर्ण है। शिमला में सील्ड रोड पर परमिट लेना महंगा कांग्रेस सरकार ने आज सदन में एक विधेयक पारित किया। इसमें सरकार ने शिमला में सील्ड रोड पर जुर्माने की कई गुणा बढ़ाई है। शिमला के सील्ड रोड पर परमिट के लिए आवेदन शुल्क 100 रुपए से बढ़ाकर 500 रुपए और परमिट की सालाना फीस 2500 हजार से बढ़ाकर 10 हजार रुपए किया। एक दिन के लिए सील्ड रोड परमिट के लिए 200 रुपए के बजाय 1,000 रुपए देने होंगे। नियम तोड़ने पर सजा का प्रवधान किया गया। परमिट की शर्तें तोड़ने पर 2,000 रुपए जुर्माना या 10 दिन की जेल होगी। अन्य नियम उल्लंघन पर 3,000 रुपए जुर्माना या 15 दिन की जेल का प्रावधान है। या फिर आधा जुर्माना देकर मौके पर चालान निपटाया जा सकेगा।



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