3 माह बाद भी प्रशिक्षण नहीं:कांग्रेस में जिला, मंडल व बूथ स्तर संगठन का विस्तार रूका, काम नहीं कर पा रहे जिलाध्यक्ष
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस के जिलाध्यक्षों की नियुक्ति के तीन माह से अधिक बीत चुके हैं। लेकिन, अब तक उनकी 10 दिवसीय ट्रेनिंग ही नहीं हो पाई है। नतीजा वे ना तो विधिवत अपना कामकाज संभाल पा रहे हैं और ना ही संगठन की निचली इकाइयों का गठन और विस्तार हो रहा है। जिलाध्यक्षों की नियुक्ति के बाद जिला, मंडल और बूथ स्तर पर कार्यकारिणी का गठन होना है। ट्रेनिंग के अभाव में जिला अध्यक्ष अब तक काम ही शुरू नहीं कर पाए हैं। हालांकि कुछ जिला अध्यक्ष अपने स्तर पर और प्रदेश कांग्रेस के निर्देश पर राज्य सरकार और स्थानीय सत्ता के खिलाफ धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। उनके कामों को प्रदेश के बड़े नेताओं से सराहना तो मिलती है लेकिन ऐसी गतिविधियां अध्यक्ष के खाते में उपलब्धि के रूप में दर्ज नहीं हो रही हैं। प्रदेश कांग्रेस ने 28 नवंबर को छत्तीसगढ़ के 41 संगठन जिलों के लिए जिला अध्यक्षों की नियुक्ति की। नियुक्ति के बाद जिला अध्यक्षों का प्रशिक्षण होना था। इसका सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बूथ मैनेजमेंट है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और अन्य वरिष्ठ नेता अक्सर वन-टू-वन चर्चा कर जिलों की जमीनी रिपोर्ट लेते हैं। अंत में हर अध्यक्ष को एक परफॉर्मेंस रिपोर्ट मॉडल समझाया जाता है। इसी के आधार पर उनके काम का मूल्यांकन होता है। राजनीति और रणनीति के साथ योग-व्यायाम का भी प्रशिक्षण
ट्रेनिंग पूरी तरह अनुशासित और आवासीय होती है, जहां सुबह योग-व्यायाम से लेकर देर रात तक रणनीतिक सत्र चलते हैं। इसमें अध्यक्षों को वोटर लिस्ट के वेरिफिकेशन, फर्जी वोटरों की पहचान और पन्ना प्रमुख रणनीति का तकनीकी ज्ञान दिया जाता है। हर बूथ पर सक्रिय और समर्पित कार्यकर्ताओं की फौज तैयार करने का तरीका बताया जाता। विरोधियों के नैरेटिव का तथ्यों के साथ मुकाबला करने, सोशल मीडिया सेल, फेक न्यूज को रोकने और प्रभावी प्रेस कॉन्फ्रेंस के तरीके बताए जाते। 4 मई के बाद ही हो सकेगी ट्रेनिंग
विधानसभा चुनावों की वजह से केंद्रीय नेतृत्व ने ट्रेनिंग के लिए अब तक तारीख तय नहीं की है। असम, केरल व पुडुचेरी में 9 अप्रैल, तमिलनाडु में 23 अप्रैल जबकि पश्चिम बंगाल में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोटिंग होगी। सभी राज्यों के चुनाव परिणाम 4 मई को आएंगे। सूत्रों का कहना है कि इसके बाद ही ट्रेनिंग की तारीख तय हो पाएगी। ट्रेनिंग होने के बाद प्रत्येक जिला अध्यक्ष की परफार्मेंस रिपोर्ट तैयार की जाएगी। तह यह तय होगा कि कौन से जिलाध्यक्ष अपनी जिम्मेदारी सही से निभा रहे हैं। इसी आधार पर जिलाध्यक्षों का भविष्य तय होगा।
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