US Vice President says there’s no need for cheap foreign workers | अमेरिकी उपराष्ट्रपति बोले- सस्ते विदेशी नौकरों की जरूरत नहीं: इनपर निर्भर होने से बचना चाहिए; राष्ट्रपति बोले थे- टैलेंट की कमी, स्किल्ड लोगों की जरूरत

US Vice President says there’s no need for cheap foreign workers | अमेरिकी उपराष्ट्रपति बोले- सस्ते विदेशी नौकरों की जरूरत नहीं: इनपर निर्भर होने से बचना चाहिए; राष्ट्रपति बोले थे- टैलेंट की कमी, स्किल्ड लोगों की जरूरत


वॉशिंगटन डीसी6 मिनट पहले

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अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस। (फाइल फोटो)

अमेरिका में H-1B वीजा विवाद के बीच विदेशी मजदूरों को लेकर छिड़ी बहस अब और तेज हो गई है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने विदेशी कर्मचारियों को सस्ते नौकर कहकर संबोधित किया और कहा कि हमें उनकी जरूरत नहीं है।

वेंस ने विपक्षी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि, ‘डेमोक्रेट्स का मॉडल कम वेतन वाले प्रवासियों को देश में लाने पर जोर देता है। इससे अमेरिकी लोगों के रोजगार, वेतन और समृद्धि को नुकसान पहुंचेगा।’ वेंस ने कहा कि ट्रम्प का मॉडल दूसरा है जो अमेरिका में डेवलपमेंट का रास्ता खोलेगा।

उन्होंने कहा, ‘अमेरिकी मजदूरों को तकनीक से मजबूत बनाना चाहिए, न कि सस्ते विदेशी श्रम पर निर्भर होना चाहिए।’ वेंस का बयान ट्रम्प के कुछ दिन पहले दिए उस बयान से अलग है, जिसमें ट्रम्प ने कहा था कि अमेरिका में कुछ खास प्रतिभाओं की कमी है।

ट्रम्प ने कहा था कि देश में कई अहम नौकरियों के लिए पर्याप्त टैलेंटेड लोग नहीं हैं, इसलिए विदेशी स्किल्ड वर्कर्स की जरूरत पड़ती है। वहीं H-1B वीजा को लेकर ट्रम्प की पार्टी एक विधेयक लाने की तैयारी कर रही है, जिससे अमेरिका में भारतीयों की एंट्री मुश्किल हो सकती है।

H-1 B वीजा पूरी तरह खत्म करने की तैयारी में ट्रम्प की पार्टी

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की करीबी और अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की सदस्य मार्जोरी टेलर ग्रीन ने कहा है कि जल्द ही विधेयक लाया जाएगा। रिपब्लिकन पार्टी की मार्जोरी का आरोप है कि H-1B वीजा का दुरुपयोग हो रहा है।

अमेरिका फर्स्ट की नीति के तहत H-1B वीजा कैटेगरी को खत्म किया जाएगा। हालांकि, उन्होंने कहा कि अगले 10 साल तक हर साल 10 हजार डॉक्टरों को H-1B वीजा जारी होंगे। अभी हर साल 85 हजार एच-1 बी वीसा में से लगभग 70% वीसा भारतीयों को जारी होते हैं।

ट्रम्प बोले थे- अमेरिका में टैलेंटेड लोगों की कमी

हाल ही में फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में ट्रम्प ने जॉर्जिया की एक बैटरी फैक्ट्री का उदाहरण दिया था। उन्होंने बताया कि दक्षिण कोरिया की कंपनी ने 500-600 विशेषज्ञों को बैटरी बनाने और अमेरिकी कर्मचारियों को ट्रेनिंग देने के लिए भेजा था।

सितंबर में इमिग्रेशन छापे में इन्हें अवैध बताकर देश से निकालने की कोशिश हुई। ट्रम्प बोले, ‘बैटरी बनाना मुश्किल और खतरनाक काम है। अमेरिका में ऐसी प्रतिभाओं की कमी है, इसलिए H-1B जैसी वीजा जरूरी हैं।’

ट्रम्प बोले- बाहर से टैलेंट लाना होगा

फॉक्स न्यूज की एंकर लॉरा इंग्राहम ने ट्रम्प से पूछा कि क्या H-1B वीजा की संख्या कम की जाएगी, क्योंकि इससे अमेरिकी मजदूरों के वेतन पर असर पड़ता है?

ट्रम्प ने जवाब दिया, “हां, मैं सहमत हूं, लेकिन आपको बाहर से टैलेंट भी लाना होगा।”

जब एंकर ने कहा कि अमेरिका में काफी टैलेंटेड लोग हैं, तो ट्रम्प बोले, “नहीं, कुछ खास क्षेत्रों में हमारे पास टैलेंट नहीं है। आप बेरोजगार लोगों को उठाकर मिसाइल फैक्ट्री में नहीं भेज सकते।”

इससे पहले सितंबर में ट्रम्प प्रशासन ने H-1B वीजा की एप्लिकेशन फीस को 100 गुना बढ़ाकर 1 हजार डॉलर से 1 लाख डॉलर कर दिया है।

ट्रम्प ने 19 सितंबर को H-1B वीजा को लेकर नियमों में बदलाव से जुड़े ऑर्डर पर साइन किए।

विदेशी छात्रों पर ट्रम्प का यू टर्न

विदेश छात्रों को लेकर अपने रुख में यू-टर्न लिया है। ट्रम्प ने कहा है कि विदेशी छात्रों को अमेरिका में पढ़ाई की अनुमति मिलती रहनी चाहिए, क्योंकि वे न सिर्फ देश की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाते हैं बल्कि विश्वविद्यालयों की आर्थिक स्थिति को भी संभालते हैं।

उन्होंने कहा कि अगर चीन और दूसरे देशों से आने वाले विदेशी छात्रों की संख्या घटाई गई, तो अमेरिका के करीब आधे कॉलेजों के बंद होने की नौबत आ जाएगी।

ट्रम्प ने कहा कि दुनियाभर से आने वाले आधे छात्रों को नहीं रोक सकते, ऐसा किया तो हमारे कॉलेज-यूनिवर्सिटी सिस्टम को भारी नुकसान होगा। मैं ऐसा नहीं चाहता। मैं मानता हूं कि बाहर के देशों से छात्रों का आना अच्छा है, मैं दुनिया से रिश्ते बेहतर रखना चाहता हूं।

6 महीने पहले विदेशी छात्रों के इंटरव्यू पर रोक लगाई थी

अमेरिका ने इस साल मई में पहले विदेशी छात्रों के नए वीजा इंटरव्यू पर रोक लगा दी थी। इसका मकसद देश की यूनिवर्सिटीज में यहूदी विरोध और वामपंथी विचारों को रोकना था।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दुनियाभर में अमेरिकी दूतावासों को आदेश जारी कर कहा था- वे स्टूडेंट वीजा के लिए नए इंटरव्यू शेड्यूल न करें, क्योंकि ट्रम्प सरकार अमेरिका आने वाले छात्रों के सोशल मीडिया प्रोफाइल की जांच को और सख्त करने जा रही है।

उन्होंने आगे कहा था- तत्काल प्रभाव से कॉन्सुलर सेक्शन आगे के दिशा-निर्देश जारी होने तक स्टूडेंट या एक्सचेंज विजिटर (F, M और J) वीजा के लिए नए अपॉइंटमेंट की इजाजत नहीं दे।

यह रोक F, M और J वीजा कैटेगरी पर लागू होती है, जो ज्यादातर अंतरराष्ट्रीय छात्रों और एक्सचेंज विजिटर्स को कवर करती हैं। बाद में इंटरव्यू फिर शुरू हुए, लेकिन सोशल मीडिया जांच और सुरक्षा नियम और सख्त कर दिए गए हैं।

अमेरिका जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या 70% गिरी

अमेरिका में पढ़ाई के लिए जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में 70% की गिरावट आई है। ट्रम्प प्रशासन की अंतरराष्ट्रीय छात्रों से जुड़ी नीतियों की वजह से वीजा स्लॉट्स में रुकावट और वीजा रिजेक्शन में अचानक बढ़ोतरी से यह स्थिति बनी है।

दिक्कतों के चलते कई छात्र अब दूसरे देशों में पढ़ाई के विकल्प तलाश रहे हैं।

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