Tihar Cow Therapy: तिहाड़ में बनी गौशाला: क्या है काऊ थैरेपी और कैदियों के लिए कितनी फायदेमंद?

Tihar Cow Therapy: तिहाड़ में बनी गौशाला: क्या है काऊ थैरेपी और कैदियों के लिए कितनी फायदेमंद?



Prison Cow Shelter: तिहाड़ जेल में कैदियों की मेंटल हेल्थ को बेहतर बनाने के लिए एक नया कदम उठाया गया है. अब यहां बंदियों को अकेलापन और इमोशनल तनाव से उबरने में मदद करने के लिए काऊ थैरेपी दी जाएगी. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बुधवार 19 नवंबर को उपराज्यपाल वी. के. सक्सेना और दिल्ली के गृह मंत्री आशीष सूद ने जेल परिसर में बनी नई गौशाला का उद्घाटन किया

तिहाड़ की गौशाला में अभी कितनी गायें?

फिलहाल तिहाड़ जेल में 10 गायों को रखा गया है. कुछ खरीदी गईं और कुछ दान में मिली हैं. गौशाला की क्षमता और 10 गायों को रखने की भी है. रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रामीण बैकग्राउंड से आने वाले कुछ कैदियों को गायों को चारा खिलाने और उनकी देखभाल की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है. दिल्ली के गृह मंत्री ने बताया कि 1 जनवरी से 19 जनवरी के बीच दिल्ली पुलिस को आवारा और छोड़ दी गई गायों से जुड़े 25,000 से अधिक मामले मिले हैं. उन्होंने कहा कि राजधानी में गायों की संख्या बहुत ज्यादा है, लेकिन गौशालाएं कम हैं.

उन्होंने कहा कि “हमारी मौजूदा गौशालाओं की क्षमता 19,800 है, लेकिन इनमें 21,800 से ज्यादा पशु ठहरे हुए हैं. ऐसे में तिहाड़ जेल की पहल छोटी जरूर दिख सकती है, लेकिन यह दूर की सोच वाला कदम है.” उन्होंने यह भी जोड़ा कि इससे आवारा पशुओं की देखभाल, संरक्षण और सेवा का दायरा बढ़ेगा.

कैसे मदद करेगी काऊ थैरेपी?

अब जान लेते हैं कि यह थैरेपी कैसे मदद करेगी. इसको लेकर गृह मंत्री आशीष सूद  ने इसे काऊ थैरेपी का नाम देते हुए कहा कि यह कदम उन कैदियों के लिए उम्मीद की नई किरण है जो अकेलेपन से जूझते हैं. उनके मुताबिक, गायों के साथ समय बिताने से अकेलेपन की भावना कम होती है. साथ ही, यह थैरेपी कैदियों को भावनात्मक तनाव से उबरने, झगड़ों को कम करने और आपसी करुणा बढ़ाने में भी मदद कर सकती है.

जेल महानिदेशक एस. बी. के. सिंह ने बताया कि इस विचार की प्रेरणा देश और विदेश के ऐसे कार्यक्रमों से मिली है, जहां पशुओं की मदद से कैदियों की मानसिक हालत सुधारने की कोशिश की गई.

तिहाड़ में भी कई कैदी ऐसे हैं जिन्हें परिवार से न फोन आते हैं और न मुलाकात, जिससे वे तनाव और अकेलेपन में चले जाते हैं. आपको बता दें कि 2018 में हरियाणा की जेलों में भी इसी तरह का प्रयोग किया गया था और स्वीडन जैसे देशों की कुछ कम सुरक्षा वाली जेलों में पशु-सहायता कार्यक्रम पहले से चल रहे हैं.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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