CJI Surya Kant BR Gavai Supreme Court Chief Justice | CJI सूर्यकांत का नया नियम-ओरल मेंशनिंग बंद, सिर्फ लिखित अनुरोध: केवल मौत की सजा-व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मामलों पर विचार हो सकेगा; 14 महीने का कार्यकाल

CJI Surya Kant BR Gavai Supreme Court Chief Justice | CJI सूर्यकांत का नया नियम-ओरल मेंशनिंग बंद, सिर्फ लिखित अनुरोध: केवल मौत की सजा-व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मामलों पर विचार हो सकेगा; 14 महीने का कार्यकाल


नई दिल्ली43 मिनट पहले

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तस्वीर 24 नवंबर की है। जस्टिस सूर्यकांत ने देश के 53वें CJI पद की शपथ ली।

भारत के नए मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने सोमवार को कार्यभार संभालते ही सुप्रीम कोर्ट की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया। उन्होंने मामलों की अर्जेंट लिस्टिंग के लिए ओरल (मौखिक) मेंशनिंग बंद की है।

सीजेआई सूर्यकांत से पहले पूर्व CJI संजीव खन्ना ने भी मौखिक मेंशनिंग की प्रथा बंद की थी। उनके उत्तराधिकारी पूर्व CJI बी.आर. गवई ने इसे दोबारा शुरू किया था, जिसे अब CJI सूर्यकांत ने फिर सीमित कर दिया है।

उन्होंने कहा…

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अब मामलों की अर्जेंट लिस्टिंग के लिए ओरल (मौखिक) मेंशनिंग स्वीकार नहीं की जाएगी। केवल लिखित मेंशनिंग स्लिप ही मान्य होगी। असाधारण परिस्थितियों, जैसे- डेथ पेनल्टी या व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मामलों में ही मौखिक मेंशनिंग सुनी जाएगी।

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दरअसल, जस्टिस सूर्यकांत ने 24 नवंबर को देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति भवन में हुए समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें पद की शपथ दिलाई। इसके बाद उन्होंने वहां मौजूद बहन और बड़े भाई के पैर छुए। इस कार्यक्रम में उनके परिवार के लोग भी शामिल हुए।

वर्तमान CJI बीआर गवई का कार्यकाल रविवार 23 नवंबर को खत्म हो गया। उनके बाद अब जस्टिस सूर्यकांत यह जिम्मेदारी संभालेंगे। जस्टिस सूर्यकांत 9 फरवरी 2027 को रिटायर होंगे और उनका कार्यकाल लगभग 14 महीने का होगा।

​​​​​​CJI सूर्यकांत के पहले दिन की अन्य महत्वपूर्ण कार्यवाही

  • एक जूनियर वकील को उन्होंने प्रोत्साहित करते हुए कहा- आप दलील दें, तो हम थोड़ा डिस्काउंट भी दे सकते हैं।
  • मणिपुर में कथित फर्जी मुठभेड़ों के पीड़ित परिवारों की याचिका में NIA जांच की स्थिति पर नोटिस जारी किया।
  • इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दाखिल अपील में, जिसमें एक जज के पति को सरकारी वकील पद से हटाने की मांग थी। सीजेआई ने कहा- कृपया किसी व्यक्ति को निशाना न बनाएं। बाद में याचिका वापस ले ली गई।

CJI की शपथ के बाद पहले दिन 17 मामलों की सुनवाई की

CJI के तौर पर पहले पहले दिन जस्टिस सूर्यकांत ने लगभग दो घंटे की कार्यवाही में 17 मामलों की सुनवाई की। इसके बाद उन्होंने जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर के साथ कोर्ट नंबर-1 में 3 जजों की बेंच की अध्यक्षता की। कार्यवाही शुरू होते ही हिमाचल प्रदेश सरकार की याचिका पर पहला फैसला सुनाया।

24 नवंबर: देश के 53वें CJI बने जस्टिस सूर्यकांत

जस्टिस सूर्यकांत ने सोमवार को देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में शपथ ली। शपथ के बाद CJI सूर्यकांत ने PM मोदी समेत अन्य लोगों से मुलाकात की। वे पूर्व CJI बीआर गवई से गले मिले। इस समारोह में ब्राजील समेत सात देशों के मुख्य न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट के जज भी राष्ट्रपति भवन पहुंचे थे।

भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में पहली बार किसी CJI के शपथ ग्रहण में इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय न्यायिक प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी रही। समारोह में भूटान, केन्या, मलेशिया, मॉरिशस, नेपाल और श्रीलंका के मुख्य न्यायाधीश और उनके परिवार के सदस्य भी पहुंचे।

इस दौरान पूर्व CJI गवई ने एक नई मिसाल कायम की। शपथ ग्रहण समारोह के बाद उन्होंने अपनी आधिकारिक गाड़ी राष्ट्रपति भवन में ही अपने उत्तराधिकारी जस्टिस सूर्यकांत के लिए छोड़ दी।

CJI सूर्यकांत की शपथ के फोटोज

शपथ के बाद CJI सूर्यकांत राष्ट्रपति मुर्मू के पास पहुंचे और उनका अभिवादन किया।

CJI सूर्यकांत ने भाई ऋषिकांत (कैप पहने हुए) और बहन राजबाला के भी पैर छुए।

CJI सूर्यकांत ने ससुर राम प्रताप और सास आरती शर्मा के पैर छुए।

CJI सूर्यकांत पीएम मोदी, राजनाथ और अमित शाह से मिलने भी पहुंचे।

CJI सूर्यकांत पूर्व CJI बीआर गवई के गले भी मिले।

शपथ ग्रहण समारोह के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, PM नरेंद्र मोदी, CJI सूर्यकांत, पूर्व CJI बीआर गवई और केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल।

पूर्व वाइस प्रेसिडेंट जगदीप धनखड़ और पूर्व CJI भूषण रामकृष्ण गवई सोमवार को नई दिल्ली में राष्ट्रपति भवन के गणतंत्र मंडप में नजर आए।

CJI सूर्यकांत का कार्यकाल 14 महीने का होगा

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के हेड होंगे CJI सूर्यकांत

CJI सूर्यकांत ने बेंच जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस अतुल एस चंदुरकर के साथ कोर्ट रूम नंबर 1 में आधिकारिक कार्यवाही शुरू की। जस्टिस सूर्यकांत अब पांच मेंबर वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के हेड भी होंगे।

पांच मेंबर वाला कॉलेजियम जो सुप्रीम कोर्ट के जजों को चुनता है और हाईकोर्ट के जजों के ट्रांसफर पर फैसला करता है, उसमें अब CJI कांत और जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस बीवी नागरत्ना, जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस एमएम सुंदरेश शामिल होंगे।

तीन सदस्यों वाले कॉलेजियम में, जो हाईकोर्ट के जजों को चुनता है, CJI और जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस बीवी नागरत्ना सदस्य होंगे। भले ही जस्टिस कांत का CJI के तौर पर लगभग 14 महीने का कार्यकाल है, कॉलेजियम में सिर्फ एक बदलाव होगा, जब जस्टिस माहेश्वरी 28 जून, 2026 को रिटायर होंगे।

जस्टिस पीएस नरसिम्हा कॉलेजियम के सदस्य बनेंगे। CJI कांत के रिटायर होने के बाद, जस्टिस जेबी पारदीवाला कॉलेजियम में शामिल होंगे।

10वीं के बाद पहली बार शहर देखा था

जस्टिस सूर्यकांत के पिता मदनमोहन शास्त्री संस्कृत के शिक्षक और प्रसिद्ध साहित्यकार थे। मां शशि देवी गृहिणी थीं। बड़े भाई ऋषिकांत सेवानिवृत्त शिक्षक हैं, दूसरे भाई शिवकांत डॉक्टर और तीसरे देवकांत आईटीआई से रिटायर्ड हैं। बहन कमला देवी सबसे बड़ी हैं। जस्टिस सूर्यकांत सबसे छोटे हैं। बड़े भाई ऋषिकांत ने बताया, सूर्यकांत ने 10वीं तक पढ़ाई गांव पेटवाड़ में की। इसके बाद पहली बार शहर देखा था।

सूर्यकांत के बड़े भाई देवकांत ने बताया कि जस्टिस सूर्यकांत की पत्नी सविता सूर्यकांत हैं और वह कॉलेज में प्रिंसिपल के पद से रिटायर हुई हैं। वह इंग्लिश की प्रोफेसर रही हैं। उनकी 2 बेटियां हैं- मुग्धा और कनुप्रिया। दोनों बेटियां पढ़ाई कर रही हैं।

भाई ऋषिकांत ने बताया, सूर्यकांत के विवाह की बात चली तो उन्होंने कहा था दहेज में एक चम्मच भी नहीं लूंगा। विवाह 1987 में जींद की सविता शर्मा से हुआ।

जस्टिस सूर्यकांत और उनकी पत्नी सविता। – फाइल फोटो

जस्टिस सूर्यकांत के यादगार फैसले

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत कई कॉन्स्टिट्यूशनल बेंच का हिस्सा रहे हैं। अपने कार्यकाल के दौरान वे संवैधानिक, मानवाधिकार और प्रशासनिक कानून से जुड़े मामलों को कवर करने वाले 1000 से ज्यादा फैसलों में शामिल रहे। उनके बड़े फैसलों में आर्टिकल 370 को निरस्त करने के 2023 के फैसले को बरकरार रखना भी शामिल है।

  • पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट की फुल बेंच का हिस्सा थे जिसने 2017 में बलात्कार के मामलों में डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को लेकर जेल में हुई हिंसा के बाद डेरा सच्चा सौदा को पूरी तरह से साफ करने का आदेश दिया था।
  • जस्टिस सूर्यकांत उस बेंच का हिस्सा थे जिसने कॉलोनियल एरा के राजद्रोह कानून को स्थगित रखा था। साथ ही निर्देश दिया था कि सरकार की समीक्षा तक इसके तहत कोई नई FIR दर्ज न की जाए।
  • सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन समेत समस्त बार एसोसिएशनों में एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित किए जाने का निर्देश देने का श्रेय भी जस्टिस सूर्यकांत को दिया जाता है।
  • जस्टिस सूर्यकांत सात जजों की बेंच में शामिल थे जिसने 1967 के अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के फैसले को खारिज कर दिया था। यूनिवर्सिटी के संस्थान के अल्पसंख्यक दर्जे पर पुनर्विचार का रास्ता खुल गया था।
  • वे पेगासस स्पाइवेयर मामले की सुनवाई करने वाली बेंच का हिस्सा थे, जिसने गैरकानूनी निगरानी के आरोपों की जांच के लिए साइबर एक्सपर्ट का एक पैनल बनाया था। उन्होंने यह भी कहा था कि राष्ट्रीय सुरक्षा की आड़ में खुली छूट नहीं मिल सकती।

बिहार SIR मामले की सुनवाई भी की

जस्टिस सूर्यकांत ने बिहार में SIR से जुड़े मामले की सुनवाई भी की। चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता को रेखांकित करने वाले एक आदेश में जस्टिस सूर्यकांत ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया था कि बिहार में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के बाद ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से बाहर किए गए 65 लाख नामों की डीटेल सार्वजनिक की जाए।

पेटवाड़ के स्कूलों के टॉपर्स को हर साल सम्मानित करने जाते हैं

ऋषिकांत ने बताया, ‘एक भाई डॉक्टर बना तो पिताजी चाहते थे सूर्यकांत इंजीनियर बनें, लेकिन उन्होंने कानून पढ़ा। पढ़ने में तेज थे। सूर्यकांत अभी भी गांव से जुड़े हैं। गांव के दोनों स्कूल के टॉपर्स को सम्मानित करने हर साल आते हैं। गांव में पूर्वजों के नाम पर एक तालाब है। वहां जरूर जाते हैं। जब भी आते हैं बथुआ, बाजरे की रोटी, कढ़ी बनती है।’

हिसार से 50 किमी दूर दस हजार आबादी वाले पेटवाड़ का इतिहास गौरवपूर्ण रहा है। गांव में एक गौरव पट्‌ट लगे हैं। एक शिलालेख पर गांव के 5 स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, दूसरे पर दो शहीद जवान और तीसरे पर बड़े पदों पर पहुंचे 26 लोगों के नाम लिखे हैं। इनमें आईएएस, आईपीएस, वैज्ञानिक, डाॅक्टर आदि शामिल हैं। इसमें सबसे ऊपर जस्टिस सूर्यकांत का नाम है। जस्टिस सूर्यकांत बड़े भाई ऋषिकांत और भाभी राजबाला के साथ गांव में रहते हैं।

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जस्टिस सूर्यकांत के भाई ऋषिकांत ने बताया कि शुरू से ही वह संयुक्त परिवार में रहे हैं। पिता और दो ताऊ सभी एक साथ रहते थे। पिता जातिगत भेदभाव में विश्वास नहीं रखते थे। उनके परदादा टीचर थे। पिता भी संस्कृत के टीचर रहे। इसलिए चारों भाइयों का ऋषिकांत, शिवकांत, देवकांत और सूर्यकांत नाम रखा, ताकि समाज में एक अलग पहचान बने। पूरी खबर पढ़ें…

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