Indrajaal Ranger Launched: India’s First Mobile AI Anti-Drone VehicleMeta Description | दुनिया का पहला एंटी-ड्रोन पैट्रोल व्हीकल इंद्रजाल रेंजर लॉन्च: AI की मदद से 10km दूर से ड्रोन डिटेक्ट करेगा, 4km दूर तक मारक क्षमता

Indrajaal Ranger Launched: India’s First Mobile AI Anti-Drone VehicleMeta Description | दुनिया का पहला एंटी-ड्रोन पैट्रोल व्हीकल इंद्रजाल रेंजर लॉन्च: AI की मदद से 10km दूर से ड्रोन डिटेक्ट करेगा, 4km दूर तक मारक क्षमता


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नई दिल्ली4 घंटे पहले

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दुनिया का पहला फुली मोबाइल AI-इनेबल्ड एंटी-ड्रोन पैट्रोल व्हीकल ‘इंद्रजाल रेंजर’ लॉन्च किया गया है। ये सिंगल मूवमेंट में ही ड्रोन को 10 किलोमीटर दूर से डिटेक्ट और ट्रैक कर सकता है। यही नहीं 4 किलोमीटर दूर से न्यूट्रलाइज भी कर सकता है।

इसे हैदराबाद की एरियल डिफेंस सिस्टम वाली कंपनी इंद्रजाल ड्रोन डिफेंस ने बनाया है। कंपनी ने इसे शहरों और बॉर्डर एरिया में बिना इजाजत उड़ने वाले ड्रोन्स को ढूंढकर रोकने के लिए डिजाइन किया है।

हैदराबाद में चल रहे स्टार्टअप इन्क्यूबेटर इवेंट ‘टी-हब’ में इसे पेश किया गया, जहां लाइव डेमो भी दिया गया। इवेंट में कंपनी के CEO किरण राजू ने कहा कि ये गाड़ी बॉर्डर पर ड्रग्स, हथियारों और विस्फोटकों की स्मगलिंग को रोकने के काम आएगी।

गाड़ी में AI से चलने वाला कमांड सिस्टम

इस गाड़ी में शरारती ड्रोन्स से निपटने के लिए ढेर सारे गैजेट्स लगे हैं, जैसे ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (GNSS) स्पूफिंग, रेडियो फ्रीक्वेंसी (RF) जैमिंग और एक स्प्रिंग वाला किल स्विच भी है, जो ड्रोन को तुरंत मार गिरा सकता है।

ये पूरी तरह घूमने-फिरने लायक व्हीकल है और इसमें AI से चलने वाला कमांड सिस्टम भी फिट है, जिसका नाम स्काईओएस है। इस पूरे सिस्टम को ग्रीन रोबोटिक्स ने बनाया है, जो सारे ऑपरेशंस को ऑटोमेटिकली कंट्रोल करता है।

मिलिट्री ग्रेड के साथ 100% मेड इन इंडिया

इंद्रजाल रेंजर की ऑफिशियल प्राइस नहीं बताई गई है। कंपनी ने कहा है कि ये 100% मेड इन इंडिया है। इसका डिप्लॉयमेंट बॉर्डर रोड्स, कैनाल्स, एग्रीकल्चर बेल्ट्स, क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर और अर्बन एरियाज में अगले कुछ महीनों में शुरू होगा। बुकिंग या ऑर्डर के लिए इंद्रजाल की वेबसाइट या डायरेक्ट कॉन्टैक्ट का ऑप्शन है। ARDTC-सर्टिफाइड होने से ये मिलिट्री और सिविल यूज के लिए रेडी है।

एक्सटीरियर: 4×4 ऑल-टेरेन व्हीकल इंद्रजाल रेंजर एक 4×4 ऑल-टेरेन व्हीकल है, यानी हर तरह के सतह पर चल सकता है। इसका एक्सटीरियर 4×4 टोयोटा हाइलक्स पर बेस्ड है। फ्रंट में रग्ड बंपर और सेंसर दिए गए हैं, जो हाई-थ्रेट जोन्स में स्टेबल रहने के लिए डिजाइन किए गए हैं। साइड में रेनफोर्स्ड साइड पैनल्स और एक्सटर्नल एंटिना सेटअप है, जो मूविंग डिटेक्शन को सपोर्ट करता है। रियर में इंटीग्रेटेड जैमर और लेजर यूनिट्स लगे हैं।

इंद्रजाल रेंजर की फ्रंट प्रोफाइल।

इंद्रजाल रेंजर की रियर प्रोफाइल।

इंटीरियर: मल्टी टच डिस्प्ले के साथ टेक-लोडेड कैबिन

अंदर इंटीरियर मिलिट्री-स्टाइल है, जो ऑपरेटर्स के लिए फंक्शनल है। डैशबोर्ड पर सेंट्रल कंट्रोल कंसोल है, जिसमें 10-12 इंच की मल्टी-टच स्क्रीन्स लगी हैं। इसमें एक थ्रेट मॉनिटरिंग के लिए और दूसरा नेविगेशन और कमांड्स के लिए काम आती है।

स्टीयरिंग व्हील पर क्विक-एक्सेस बटन्स हैं, जो RF जैमिंग या सॉफ्ट किल को एक्टिवेट करते हैं। सीट अपहोल्स्ट्री वाटर-रेजिस्टेंट फैब्रिक वाली हैं।

परफॉरमेंस: ऑल व्हील ड्राइव सेटअप के साथ ड्राइव मोड

इंद्रजाल रेंजर में टोयोटा हाइलक्स वाला ही 2.8 लीटर का डीजल इंजन दिया गया है, जो 201hp की पावर और 500Nm का टॉर्क जनरेट करता है। इसकी टॉप स्पीड 180kmph है और ये 0-100kmph की स्पीड 10 सेकेंड्स में हासिल कर सकता है। इसमें 4×4 ऑल व्हील ड्राइव सेटअप के साथ ऑफ-रोड मोड्स (सैंड, मड, रॉक) मिलते हैं।

सेफ्टी फीचर्स: थ्रेट न्यूट्रलाइजेशन वाली प्रोटेक्शन

व्हीकल सेफ्टी में के लिए एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम (ABS), इलेक्ट्रॉनिक ब्रेक डिस्ट्रीब्यूशन (EBD), 6 एयरबैग्स, 360-डिग्री कैमरा और टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम हैं। ARDTC सर्टिफिकेशन से मिलिट्री-ग्रेड प्रोटेक्शन मिलता है।

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भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट तैयार:300 किलो तक के सैटेलाइट अंतरिक्ष में ले जाएगा; मोदी ने उद्घाटन किया, अगले साल लॉन्चिंग

पीएम मोदी ने गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भारत के पहले प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-I को दुनिया के सामने रखा। इस रॉकेट की ऊंचाई 26 मीटर यानी करीब 85 फीट है। रॉकेट को प्राइवेट स्पेस कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस ने बनाया है। इस रॉकेट को 2026 में लॉन्च किया जाएगा। यह अपने साथ 300 किग्रा सैटेलाइट ले जाने में सक्षम है।

पीएम ने रॉकेट के अलावा कंपनी के नए इनफिनिटी कैंपस का भी इनॉगरेशन किया। इस कैंपस में कई लॉन्च व्हीकल के डिजाइन, डेवलपमेंट, इंटीग्रेशन और टेस्टिंग का काम किया जाएगा। कैंपस तेलंगाना के हैदराबाद में बना है। कंपनी का हेड ऑफिस भी यहीं है। पूरी खबर पढ़ें

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