ex judges lawyers letter to cji Suryakant remarks on rohingyas | रोहिंग्याओं पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी,पूर्व जजों-वकीलों ने आपत्ति जताई: CJI सूर्यकांत को लेटर लिखा; कहा था- क्या घुसपैठियों को रेड कार्पेट वेलकम देना चाहिए

ex judges lawyers letter to cji Suryakant remarks on rohingyas | रोहिंग्याओं पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी,पूर्व जजों-वकीलों ने आपत्ति जताई: CJI सूर्यकांत को लेटर लिखा; कहा था- क्या घुसपैठियों को रेड कार्पेट वेलकम देना चाहिए


नई दिल्ली3 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक

सुप्रीम कोर्ट ने 2 दिसंबर को भारत में रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों के कानूनी दर्जे पर सवाल उठाए थे। इसे लेकर पूर्व जजों, वकीलों और कैंपेन फॉर ज्यूडिशियल अकाउंटेबिलिटी एंड रिफॉर्म्स ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत को लेटर लिखकर आपत्ति जताई है।

CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने एक हैबियस कॉर्पस याचिका पर सुनवाई करते हुए पूछा था कि अगर कोई गैर-कानूनी तरीके से भारत में घुस आता है, तो क्या उसे ‘रेड कार्पेट वेलकम’ देना चाहिए, जबकि देश के अपने नागरिक ही गरीबी से जूझ रहे हैं?

लेटर में कहा गया है कि रोहिंग्या पर की गई टिप्पणी अमानवीय और संविधानिक मूल्यों के खिलाफ है। रोहिंग्या को दुनिया के सबसे उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों में बताया गया है। साथ ही रोहिंग्या लोगों को अनुच्छेद 21 के तहत सुरक्षा का अधिकार बताया गया।

CJI सिर्फ एक कानूनी अधिकारी ही नहीं हैं बल्कि गरीबों के अधिकारों के कस्टोडियन और आखिरी फैसला सुनाने वाले भी हैं, जिनकी बातों का देश की सोच में वजन होता है और उनका असर दूर तक होता है।

लेटर की 4 बड़ी बातें

  • म्यांमार में रोहिंग्या एक एथनिक माइनॉरिटी हैं, जिन्हें वहां के बौद्ध बहुल समाज में लंबे समय से हिंसा और भेदभाव का सामना करना पड़ा है। उन्हें म्यांमार की नागरिकता नहीं मिली, इसलिए वे बिना किसी देश के माने जाते हैं।
  • पिछले कई वर्षों में वे बड़ी संख्या में पड़ोसी देशों में शरण लेने के लिए भागे हैं। इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस ने म्यांमार की सेना की कार्रवाई को उनके खिलाफ जातीय सफाया और नरसंहार बताया है। अब वे भारत भी आ रहे हैं, जैसे पहले भी कई शरणार्थी सुरक्षा की तलाश में आते रहे हैं।
  • यूनाइटेड नेशंस ने भी रोहिंग्या को दुनिया में सबसे ज्यादा सताया जाने वाला माइनॉरिटी बताया है। आगे शरणार्थियों को अवैध घुसपैठिया कहने से न्यायपालिका की नैतिक विश्वसनीयता कमजोर होने की चेतावनी भी दी गई।
  • सीजेआई के शब्दों का सिर्फ कोर्टरूम में ही नहीं बल्कि देश की अंतरात्मा में भी वजन होता है और इसका हाईकोर्ट, लोअर ज्यूडिशियरी और दूसरी सरकारी अथॉरिटीज पर सीधा असर पड़ता है।

CJI ने कहा:

  • अगर किसी के पास भारत में रहने की कानूनी अनुमति ही नहीं है और वह घुसपैठिया है, तो हम उसे सभी सुविधाएं कैसे दे सकते हैं?”
  • भारत गरीबों का देश है… पहले अपने नागरिकों की देखभाल जरूरी है।
  • कोई अवैध रूप से सीमा पार करके आए और फिर कहे कि अब मुझे भोजन, घर और बच्चों की पढ़ाई का अधिकार चाहिए-क्या कानून को इतना खींचा जा सकता है?”

एक्टिविस्ट रीता मनचंदा ने याचिका में आरोप लगाया था कि दिल्ली पुलिस ने कुछ रोहिंग्या लोगों को मई में उठा लिया और अब उनकी कोई जानकारी नहीं है। याचिकाकर्ता ने 2020 के सुप्रीम कोर्ट आदेश का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि रोहिंग्या को कानूनी प्रक्रिया के तहत ही वापस भेजा जा सकता है।

केंद्र सरकार की दलील

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि याचिका किसी प्रभावित व्यक्ति नहीं, बल्कि एक एक्टिविस्ट ने दायर की है। इसलिए उसका कानूनी अधिकार नहीं बनता। इस पर कोर्ट ने कहा था कि पहले ये तय करना होगा कि रोहिंग्या शरणार्थी हैं या गैर-कानूनी तरीके से आए विदेशी।

कोर्ट ने तीन याचिका को तीन ग्रुप में बांटा

अदालत ने सभी याचिकाओं को तीन समूहों में बांट दिया है। अब इनकी सुनवाई अलग-अलग होगी। अगली सुनवाई 16 दिसंबर को होगी।

पिछली सुनवाइयों में कोर्ट ने क्या कहा-

  • 16 मई: कुछ याचिकाकर्ताओं ने दावा किया था कि 43 रोहिंग्या को अंडमान सागर में छोड़ दिया गया। कोर्ट ने कहा कि देश कठिन समय से गुजर रहा है और ऐसे “कल्पनिक दावे” नहीं करने चाहिए।
  • 8 मई: कोर्ट ने कहा था कि अगर रोहिंग्या भारतीय कानून के तहत विदेशी पाए जाते हैं, तो उन्हें वापस भेजना ही होगा। अदालत ने यह भी कहा था कि संयुक्त राष्ट्र (UNHCR) का पहचान पत्र भारतीय कानूनों में बहुत मददगार नहीं है।

———————————-

ये खबर भी पढ़ें…

रोहिंग्या शरणार्थी बच्चे सरकारी स्कूल में एडमिशन ले सकेंगे:सुप्रीम कोर्ट का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रोहिंग्या बच्चे सरकारी स्कूलों में एडमिशन ले सकते हैं। एडमिशन देने से मना किए जाने पर वे हाईकोर्ट जा सकते हैं। कोर्ट ने यह आदेश UNHRC कार्ड रखने वाले शरणार्थी रोहिंग्या बच्चों के लिए दिया है। पूरी खबर पढ़ें…

खबरें और भी हैं…



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

India Fontline News

Subscribe Our NewsLetter!