Show shops, dummy stock… this is how fake current accounts were opened | दिखावे की दुकानें, डमी स्टॉक…ऐसे खुलते थे फर्जी करंट अकाउंट: मजदूर के खाते से खुला ऑनलाइन सट्टे का रास्ता; कमीशन फिक्स-सेविंग 10, करंट अकाउंट ₹26,500 – Betul News
बैतूल जिले से साइबर अपराध का बड़ा मामला सामने आया है। दुबई से संचालित अवैध ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए पुलिस ने 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में खुलासा हुआ कि यह गिरोह क्रिकेट, कैसीनो और अन्य खेलों पर सट्टा लगवाने वाली विदेशी व
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मामले का खुलासा तब हुआ, जब खेड़ी सावलीगढ़ निवासी एक मजदूर के बैंक खाते में अचानक करोड़ों रुपए का लेन-देन दिखाई दिया। जांच में पता चला कि गांव के सामान्य लोगों और एक मृत व्यक्ति तक के बैंक खाते म्यूल अकाउंट के रूप में इस्तेमाल किए जा रहे थे। ठगों ने बैंकिंग सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाकर खातों पर कब्जा किया और अवैध रकम को वैध दिखाने की कोशिश की।
डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर बैतूल पुलिस की साइबर सेल की जांच इंदौर तक पहुंची, जहां से मास्टर आईडी की बिक्री और पैसों की लेन-देन की पूरी व्यवस्था संचालित की जा रही थी। पुलिस अब नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है।
अब पढ़िए पूरा मामला…दुबई से ऑपरेट होता था नेटवर्क
पुलिस जांच में सामने आया कि यह गिरोह दुबई से संचालित अवैध ऑनलाइन बेटिंग वेबसाइटों से जुड़ा था। cretaexch.com, hulk44.com, diamondexch99.now और winjoy365.com जैसी साइटों के जरिए क्रिकेट, कैसीनो और अन्य गेमिंग गतिविधियों पर अवैध सट्टा लगाया जा रहा था।
इन वेबसाइटों की मास्टर आईडी भारत में बेचने का जिम्मा इंदौर निवासी बुलियन व्यापारी ब्रजेश महाजन के पास था। वह प्रत्येक मास्टर आईडी ₹25 हजार से ₹2 लाख तक में बेचता था। बेटिंग से अर्जित अवैध रकम को वैध दिखाने के लिए म्यूल खातों (फर्जी बैंक खातों) का इस्तेमाल किया जाता था। इन खातों के माध्यम से पैसों को घुमाकर बाद में रियल एस्टेट, गोल्ड ट्रेडिंग और लग्जरी कारों में निवेश किया जाता था, ताकि काली कमाई को सफेद किया जा सके।
ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क चलाने वालों को बैतूल पुलिस ने पकड़ा है।
एक मजदूर के खाते से खुला पूरा नेटवर्क
खेड़ी सावलीगढ़ निवासी मजदूर बिसराम इवने के बैंक खाते में अचानक करोड़ों रुपए का लेन-देन सामने आने के बाद पूरा साइबर बेटिंग नेटवर्क उजागर हुआ।
बिसराम ने जब इसकी शिकायत की तो पुलिस जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। पता चला कि उसके खाते के साथ-साथ गांव के छह अन्य लोगों के बैंक खाते भी साइबर गिरोह द्वारा म्यूल अकाउंट के रूप में इस्तेमाल किए जा रहे थे। इनमें एक मृत व्यक्ति राजेश बर्दे का खाता भी शामिल था, जिसका लंबे समय से दुरुपयोग किया जा रहा था।
जांच में यह भी सामने आया कि बैंक का एक अस्थायी कर्मचारी खातों से जुड़ी गोपनीय जानकारी गिरोह को उपलब्ध कराता था। इसके बाद आरोपी ई-केवाईसी प्रक्रिया के दौरान खाताधारकों के मोबाइल नंबर बदलवाते, नए एटीएम कार्ड जारी कराते और इंटरनेट बैंकिंग सक्रिय कर खातों पर पूरा नियंत्रण हासिल कर लेते थे। इन्हीं खातों के जरिए करोड़ों रुपए का लेन-देन कर अवैध रकम को आगे ट्रांसफर किया जाता था, जिससे पूरा नेटवर्क संचालित हो रहा था।
बैंक ऑफ महाराष्ट्र खेड़ीसांवलीगढ़ में काम करने वाला एक कर्मचारी भी फ्राड में शामिल था।
इंदौर था नेटवर्क का केंद्र, अब तक 9 आरोपी गिरफ्त में
बैतूल पुलिस की साइबर सेल ने जब डिजिटल ट्रेल की गहन जांच की, तो इस साइबर बेटिंग नेटवर्क के तार इंदौर से जुड़े मिले। बैंक ऑफ महाराष्ट्र खेड़ीसांवलीगढ़ का अस्थाई कर्मचारी राजा उर्फ आयुष चौहान लोगों के खाते में ईकेवाईसी में नंबर बदलकर एटीएम कार्ड लेकर अपने इंदौर निवासी जीजा अंकित राजपूत को देता था। वह ऑनलाइन ठगी के रुपए इन खातों में ट्रांसफर करता था। अंकित का कर्मचारी नरेंद्र सिंह राजपूत एटीएम में जाकर राशि निकालकर लाकर देता था।
कार्रवाई में 20 नवंबर को पहली कार्रवाई में राजा उर्फ आयुष चौहान, अंकित राजपूत और नरेंद्र सिंह राजपूत को गिरफ्तार किया गया। जांच आगे बढ़ने पर 7 दिसंबर को इंदौर से अमित अग्रवाल को पकड़ा गया, जिसने अवैध कमाई से BMW कार और आलीशान बंगला खरीदा था। 11 दिसंबर को पुलिस ने इंदौर में दबिश देकर राजेंद्र राजपूत और इस पूरे नेटवर्क के मास्टरमाइंड ब्रजेश महाजन को गिरफ्तार किया।
14 दिसंबर को पुलिस ने तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें अश्विन धर्मवाल (खंडवा), प्रवीण जयसवाल (खंडवा) और पीयूष राठौड़ (बैतूल) शामिल हैं। जांच में सामने आया कि अश्विन धर्मवाल ने ‘अश्विन एग्रो’ नाम से फर्जी फर्म बनाकर म्यूल खातों में करोड़ों रुपए का फंड ट्रांसफर किया। इस फर्म के खाते से ₹10 करोड़ से अधिक का लेन-देन पाया गया। वहीं, प्रवीण जयसवाल ने फर्जी दुकानें खड़ी कर बैंक खातों को वैध दिखाने की व्यवस्था की, जबकि पीयूष राठौड़ अवैध सिम कार्ड उपलब्ध कराकर बायोमेट्रिक प्रक्रिया का दुरुपयोग करता था।
दुकानों में डमी स्टॉक सजाया गया, ताकि ट्रोजैक्शन सीमा को बढ़ाया जा सके।
दिखावे की दुकानें, खुलते थे फर्जी खाते
बैंक को गुमराह करने के लिए आरोपियों ने फर्जी दुकानों और फर्मों को खोला। कागजों में कारोबार दिखाने के लिए खाली बोतलों में नकली केमिकल के लेबल लगाए गए और दुकानों में डमी स्टॉक सजाया गया। बैंक निरीक्षण के दौरान सब कुछ वास्तविक लगे, इसके लिए फर्जी साइन बोर्ड और नामपट्ट भी लगाए जाते थे।
खाता खुलने के बाद चेकबुक, एटीएम कार्ड, पासबुक और ओटीपी समेत पूरी बैंकिंग किट गिरोह के पास पहुंचा दी जाती थी। करंट अकाउंट की ऊंची ट्रांजैक्शन सीमा और खातों पर डेबिट फ्रीज न होने का फायदा उठाकर इन्हीं खातों से करोड़ों रुपये का लेन-देन किया गया। इस तरीके से अवैध ऑनलाइन बेटिंग और साइबर ठगी की रकम को आसानी से घुमाया जाता रहा।
पुलिस ने प्रेस कांफ्रेंस में पूरे मामले का खुलासा किया।
कमीशन के लालच में खाते बेचते थे
जांच में सामने आया कि पीयूष राठौड़ जैसे सिम एजेंट अवैध रूप से बायोमेट्रिक प्रक्रिया का दुरुपयोग कर दो सिम एक साथ जारी करते थे। एक सिम ग्राहक को दी जाती थी, जबकि दूसरी अपराधियों को। दो सिम का सौदा ₹5,000 तक में होता था।
जांच में पता चला कि खातों के लिए दरें भी तय थीं। सेविंग अकाउंट ₹10,000 और करंट अकाउंट ₹26,500 का रहता था। आरोपीगण लाभ के लिए जानबूझकर अपने बैंक खाते, एटीएम और ओटीपी गिरोह को सौंपते थे।
एसपी वीरेंद्र जैन और एएसपी कमला जोशी के निर्देशन में गठित साइबर सेल और एसआईटी ने डिजिटल साक्ष्य, बैंकिंग डेटा और सिम लिंकिंग की ट्रेसिंग कर पूरे नेटवर्क का खुलासा किया। फर्जी फर्म, म्यूल खातों और सिम की बिक्री की पूरी श्रृंखला अब पुलिस की पकड़ में है।
जप्त सामग्री और आगे की कार्रवाई
एसपी वीरेंद्र जैन ने कहा आरोपियों से मोबाइल फोन, पासबुक, एटीएम कार्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए हैं। इन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। पुलिस ने दुबई कनेक्शन की जानकारी केंद्रीय एजेंसियों को भेज दी है और मनी ट्रेल की गहन जांच जारी है। बैतूल पुलिस की नीति साइबर और आर्थिक अपराधों पर जीरो टॉलरेंस की है। हर कड़ी तक पहुंचकर कार्रवाई की जाएगी।

