Wild elephants create havoc in Ramgarh | रामगढ़ में जंगली हाथियों का उत्पात: एक ही दिन में चार को मौत के घाट उतारा, 42 हाथियों का झुंड मचा रहा आतंक – Ramgarh (Jharkhand) News

Wild elephants create havoc in Ramgarh | रामगढ़ में जंगली हाथियों का उत्पात: एक ही दिन में चार को मौत के घाट उतारा, 42 हाथियों का झुंड मचा रहा आतंक – Ramgarh (Jharkhand) News



रामगढ़ जिले के घाटो ओपी क्षेत्र में हाथियों के हमले से एक ही दिन में चार लोगों की मौत हो गई। लगातार हुई इन घटनाओं से पूरे इलाके में दहशत और आक्रोश का माहौल है। हाथियों के हमले में जान गंवाने वालों में अमित रजवार, 35 वर्षीय अमूल महतो, 40 वर्षीय पार्वत

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शाम से देर रात तक हाथियों ने बरपाया आतंक

पहली घटना बुधवार शाम करीब 4 बजे हुई, जब हाथियों ने अमित रजवार पर हमला कर दिया। बताया जा रहा है कि हाथियों ने उन्हें पटक-पटक कर मार डाला। इसके कुछ घंटे बाद ही गिद्दी निवासी अमूल महतो को भी हाथियों ने अपना शिकार बना लिया।

अमूल महतो खाना खाने के बाद मोटरसाइकिल से ड्यूटी जाने के लिए निकले थे, तभी रास्ते में हाथियों के झुंड ने उन्हें घेर लिया और कुचल दिया। देर रात हाथियों का आतंक और बढ़ गया। हाथियों के झुंड ने महावीर मांझी की पत्नी पार्वती देवी और स्वर्गीय लखन करमाली की पत्नी सावित्री देवी को भी मार डाला। एक के बाद एक हुई इन घटनाओं ने ग्रामीणों को झकझोर कर रख दिया।

सड़क जाम कर की मुआवजे की मांग

चार लोगों की मौत से आक्रोशित ग्रामीणों ने आर-4 नंबर सड़क को जाम कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग की लापरवाही के कारण उन्हें अपनी जान गंवानी पड़ रही है। लोगों ने आरोप लगाया कि हाथियों की आवाजाही की जानकारी होने के बावजूद न तो समय पर पेट्रोलिंग की गई और न ही ग्रामीणों को सतर्क किया गया।

सड़क जाम की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीण मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने और स्थायी समाधान की मांग पर अड़े हुए हैं। स्थिति को देखते हुए इलाके में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

42 हाथियों का झुंड, तीन हिस्सों में घूम रहा

जानकारी के अनुसार, इस क्षेत्र में 42 हाथियों का एक बड़ा झुंड सक्रिय है। यह झुंड मांडू, घाटो और कुजू के जंगलों में घुम रहा है। तीन अलग-अलग टुकड़ियों में बंटा हुआ है। हाथियों के लगातार गांवों की ओर बढ़ने से लोगों में भय बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक हाथियों को सुरक्षित जंगल की ओर नहीं खदेड़ा जाएगा, तब तक ऐसी घटनाएं रुकने वाली नहीं हैं। एक ही दिन में चार मौतों ने वन विभाग और प्रशासन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।



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