Patna’s Ishan Kishan will play in the T20 World Cup | 2 साल बाद T-20 वर्ल्डकप में ईशान किशन की वापसी: पटना के ईशान की कप्तानी में झारखंड ने जीती सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी – Bihar News

Patna’s Ishan Kishan will play in the T20 World Cup | 2 साल बाद T-20 वर्ल्डकप में ईशान किशन की वापसी: पटना के ईशान की कप्तानी में झारखंड ने जीती सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी – Bihar News


टी-20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए भारतीय टीम का ऐलान कर दिया गया है। पटना के ईशान किशन की वापसी हुई है। ईशान किशन 2 साल से भारतीय क्रिकेट टीम से बाहर चल रहे थे। 2 दिन पहले ईशान किशन की कप्तानी में झारखंड ने सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी जीती थी।

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विकेटकीपर बल्लेबाज ईशान किशन ने सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में शानदार प्रदर्शन किया है। उन्होंने पुणे में खेले गए फाइनल में 49 गेंदों पर 101 रन की पारी खेलकर झारखंड को पहली बार चैंपियन बनाया।

ईशान मौजूदा सीजन में मुश्ताक अली ट्रॉफी के टॉप स्कोरर रहे, जहां उन्होंने 10 मैचों में 197.32 के स्ट्राइक रेट से 517 रन बनाए। इस दौरान उनके बल्ले से 2 शतक और 2 अर्धशतक निकले।

शुभमन गिल बाहर, ईशान किशन की वापसी

पहले भारतीय टीम में उनकी जगह अभी पक्की नहीं मानी जा रही थी। ओपनर की पोजिशन के लिए अभिषेक शर्मा, शुभमन गिल और संजू सैमसन को मजबूत दावेदार माना जा रहा था।

इसके अलावा ईशान करीब दो साल से टीम इंडिया से बाहर चल रहे थे, जिससे उनके चयन की राह काफी मुश्किल थी।

ऐसे में उन्हें मौका तभी मिलता, जब शुभमन गिल खराब परफॉर्मेंस के चलते बाहर होते। हालांकि, शुभमन गिल अब बाहर हो गए हैं, जिसकी वजह से ईशान किशन को मौका मिला।

ईशान की कप्तानी में झारखंड ने पहली बार जीता डोमेस्टिक टूर्नामेंट का टाइटल

झारखंड टीम ने पहली बार टी-20 फॉर्मेट के डोमेस्टिक टूर्नामेंट का टाइटल जीता। भारतीय विकेटकीपर ईशान किशन की कप्तानी वाली झारखंड की टीम ने हरियाणा को 69 रन के अंतर से हराया। दोनों टीमें पहली बार फाइनल मैच खेल रहीं थी।

झारखंड की जीत में ईशान किशन की कप्तानी पारी का बड़ा योगदान रहा। उन्होंने 49 बॉल पर 101 रन बनाए। कुमार कुशाग्र ने 38 बॉल पर 81 रन की विस्फोटक पारी खेली। ईशान किशन प्लेयर ऑफ द फाइनल रहे, जबकि अनुकूल रॉय को प्लेयर ऑफ द सीरीज चुना गया।

झारखंड की खराब शुरुआत, 3 रन पर पहला झटका टॉस हारकर बैटिंग कर रही झारखंड की शुरुआत खराब रही। टीम ने 3 रन के स्कोर पर पहला विकेट गंवा दिया था। यहां पर अंशुल कम्बोज ने विराट सिंह को अमित राणा के हाथों कैच कराया। टीम ने पावरप्ले में एक विकेट पर 69 रन बनाए थे।

ईशान का शतक, कुशाग्र के साथ 177 रन जोड़े पहला विकेट जल्दी गंवाने के बाद कप्तान ईशान किशन ने कुमार कुशाग्र के साथ मिलकर बड़े स्कोर की नींव रखी। दोनों ने तीसरे विकेट के लिए 82 बॉल पर 177 रनों की तेज साझेदारी की। पारी के 15वें ओवर में ईशान किशन को सुमित कुमार ने बोल्ड कर दिया। ईशान 49 बॉल पर 6 चौके और 10 छक्कों के सहारे 101 रन बनाए। किशन के बाद कुमार कुशाग्र भी 38 बॉल पर 81 रन बनाकर पवेलियन लौट गए।

ट्रॉफी की फोटो शूट के दौरान ईशान किशन और हरियाणा के कप्तान अंकित कुमार।

वर्ल्ड कप के लिए भारतीय टीम

सूर्यकुमार यादव (कप्तान), अक्षर पटेल (उपकप्तान), अभिषेक शर्मा, तिलक वर्मा, संजू सैमसन, हार्दिक पंड्या, रिेंकू सिंह, शिवम दुबे, कुलदीप यादव, वॉशिंगटन सुंदर, हर्षित राणा, वरुण चक्रवर्ती, जसप्रीत बुमराह और अर्शदीप सिंह ईशान किशन।

भारत अपने वर्ल्ड कप अभियान की शुरुआत 7 फरवरी को मुंबई में USA के खिलाफ करेगा। उसके बाद 12 फरवरी को नामीबिया से दिल्ली, 15 फरवरी को पाकिस्तान से कोलंबो और 18 फरवरी को नीदरलैंड से अहमदाबाद में मैच होंगे।

अब जानिए ईशान किशन के क्रिकेटर बनने की कहानी

इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे तेज दोहरा शतक लगाने वाले ईशान किशन ने खेल के लिए स्कूल छोड़ दिया था। ईशान की क्रिकेट के प्रति दीवानगी से टीचर भी परेशान थे, बार-बार क्लास में खड़ा किए जाने के बाद भी ईशान ग्राउंड में टिके रहते।

टीचर ने साफ कह दिया कि पढ़ाई और क्रिकेट एकसाथ नहीं चल सकता है, ईशान को दोनों में से एक रास्ता चुनना होगा। ईशान ने टीचर से साफ कह दिया कि वह खेल के लिए पढ़ाई भी छोड़ सकते हैं।

ईशान के बचपन के दोस्त यशस्वी सिंह बताते हैं कि ईशान के जैसा क्रिकेट का दीवाना नहीं देखा। वह खाना-पीना सब भूल जाते थे। ऐसा लगता था कि ईशान के लिए क्रिकेट से बढ़कर कुछ भी नहीं। वह कब खेलने के लिए पटना से रांची पहुंच जाते थे कुछ पता ही नहीं चल पाता था।

स्कूल से बाहर कर दिए जाने के बाद भी ईशान को कोई तकलीफ नहीं थी, क्योंकि वह जानते थे कि उनका बल्ला एक न एक दिन भारत के लिए इतिहास बनाएगा। यशस्वी बताते हैं कि वे क्लास 9 में ईशान के साथ डीपीएस पब्लिक स्कूल में पढ़ते थे। इस स्कूल से ईशान को निकाल दिया गया था। बाद में ईशान ने फुलवारी के एक प्राइवेट स्कूल से मैट्रिक किया था।

ईशान किशन (बाएं से दूसरे) अपने दोस्त यशस्वी (बाएं से तीसरा) के साथ।

7 साल की उम्र में पकड़ा था बल्ला

पटना के बेली रोड के आशियाना में 7 साल की उम्र में ही बल्ला पकड़ने वाले ईशान बेहतरीन विकेट कीपर और बैट्समैन हैं। वे झारखंड की ओर से रणजी खेलते थे। ईशान का टैलेंट कोच और टीम इंडिया के पूर्व कप्तान राहुल द्रविड़ के मार्गदर्शन में निखरा और उन्हें अंडर-19 टीम की कप्तानी का मौका मिला।

ईशान बचपन से ही क्रिकेट के दीवाने रहे। क्रिकेट के प्रति उनका जुनून ऐसा था कि वे पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पाते थे। उनके इस जुनून के चलते वे पढ़ाई में पीछे हो गए थे।

डिफिनिट के नाम से बुलाते हैं दोस्त

ईशान को उनके दोस्त डिफिनिट बुलाते हैं। यह नाम फिल्म गैंग्स ऑफ वासेपुर में जिशान कादरी द्वारा निभाए गए डिफिनिट खान के किरदार से आया था। दोस्तों का मानना है कि किशन जो एक बार तय कर लेते हैं, उसे पूरा ही करते हैं। इसलिए लोग उन्हें इसी नाम से पुकारते हैं।

ईशान एडम गिलक्रिस्ट, राहुल द्रविड़ और धोनी के बहुत बड़े प्रशंसक हैं। क्रिकेट के अलावा, ईशान को टेबल टेनिस और बिलियर्ड्स खेलना काफी पसंद है।

ईशान किशन (ऊपर से पहले) अपने बड़े भाई राज (ऊपर से दूसरे), मां-दादी और पिता (बाएं से क्रमशः) के साथ।

बड़े भाई के त्याग ने बना दिया क्रिकेट का बादशाह

ईशान की सफलता के पीछे उनके बड़े भाई का भी बड़ा त्याग है। यशस्वी बताते हैं कि लगभग 15 साल पहले स्कूल गेम फेडरेशन की बिहार टीम मुंबई खेलने के लिए गई थी। इस टीम में दोनों भाई ईशान और राज किशन सिलेक्ट हुए थे।

बड़े भाई राज किशन ओपनर थे इसलिए प्रदर्शन कर पाए, जबकि छोटे भाई ईशान किशन को मौका ही नहीं मिला। छोटे भाई को थोड़ी निराशा हुई, लेकिन उस निराशा को बड़े भाई ने बाद में क्रिकेट छोड़कर दूर कर दिया।

ईशान किशन और उनके बड़े भाई राज किशन की यह कहानी बड़े त्याग की मिसाल है। तब ईशान की उम्र 9 साल थी, राज किशन अच्छे खिलाड़ी थे। राज किशन का कहना है कि दोनों भाई क्रिकेट खेलते थे, लेकिन छोटे भाई का क्रिकेट के प्रति पूरा डिवोशन था। बेहतर करने की क्षमता थी। वह पहले ही भांप गए थे, एक न एक दिन ईशान इतिहास रच देगा।

आज ईशान ने इतिहास रच दिया है, इस सफलता पर पूरा परिवार जश्न में डूबा है। छोटे भाई ईशान को आगे बढ़ाने वाले बड़े भाई की खुशी का तो ठिकाना नहीं है। राज और ईशान के बीच त्याग और दोस्ती की मिसाल है। बड़े भाई राज किशन डॉक्टर और छोटे भाई ईशान देश लिए क्रिकेट में इतिहास रच रहे हैं। हालांकि बड़े भाई राज किशन भी स्टेट लेवल पर क्रिकेट खेल चुके हैं।

ईशान किशन (बाएं से तीसरे) अपने भाई और दादा-दादी के साथ।

ईशान की पटना में हो गई थी पिटाई

इंटरनेशनल क्रिकेट में इतिहास रचने वाले ईशान की पटना में एक बार पिटाई हो गई थी। पटना के लोग उन्हें पहचान तक नहीं पाए। हादसा उस वक्त हुआ था जब पटना में ईशान की कार से एक ऑटो की टक्कर हो गई थी। घटना में 4 लोग मामूली रूप से जख्मी हो गए थे। इसके बाद मौके पर मौजूद लोगों ने ईशान को पहचाना नहीं और भीड़ ने उनकी पिटाई कर दी। बाद में मौके पर पहुंची कंकड़बाग पुलिस ने उन्हें वहां से निकाला।

ईशान में बचपन से आत्म विश्वास

ईशान जब भी पटना आते हैं, यशस्वी के साथ पुरानी याद ताजा करने के लिए उनके घर जरूर आते हैं। यशस्वी का कहना है कि ईशान बचपन से ही काफी आत्मविश्वासी रहे। ईशान काफी मजाकिया रहे हैं। वs जिसके भी साथ रहे खुलकर रहे, दोस्तों के लिए एक अच्छे गार्जियन की भूमिका निभाते थे। वे एक अच्छे दोस्त के साथ अच्छी सलाह देने वाले हैं। वे काफी केयरिंग है। परिवार से लेकर दोस्तों की वह काफी केयर करते हैं। जब भी टाइम मिलता है, फोन घुमा लेते हैं।

क्रिकेटर ईशान किशन (लाल कुर्ते में) ने नवादा में अपने घर पर छठ मनाते हुए।

कोरोना काल में ईशान के साथ हर दिन मुलाकात

स्कूली समय के बाद ईशान के साथ यशस्वी सिंह का समय कोरोना काल में बीता। यशस्वी ने बताया कि कोरोना के दौरान जब देशभर में लॉकडाउन था तब हर दिन ईशान से बात होती थी। कोरोना से थोड़ी राहत मिली और देश अनलॉक की तरफ बढ़ा तो ईशान पटना आ गए। ईशान तब काफी दिनों तक पटना में रहे। हर दिन हमारी मुलाकात होती थी। कभी ईशान यशस्वी के घर आया करते थे और कभी यशस्वी ईशान के घर पहुंच जाते थे। दोनों का समय वैसा बीता जैसा बचपन में बीतता था।

रांची में एक हजार के रेंट वाला कमरा

यशस्वी बताते हैं कि ईशान की सफलता उनकी कड़ी मेहनत का नतीजा है। उसने काफी त्याग किया है। रांची में जब वह क्रिकेट खेलते था तो एक बहुत छोटा कमरा रेंट पर ले रखा था। वहीं खाना और रहना होता था। इसका किराया एक हजार रुपए था। जब ईशान ने स्कूल छोड़ा तो उसी समय उनका अंडर 16 में सिलेक्शन हुआ, इसके बाद अंडर-19 भारतीय टीम के कैप्टन बन गए। अब भारतीय टीम का मान बढ़ा रहे हैं। ईशान किशन विजय हजारे, सैयद मुश्ताक अली टूर्नामेंट, रणजी ट्रॉफी टूर्नामेंट सहित कई मैच में अपनी क्षमता का लोहा मनवा चुके हैं। ईशान का जज्बा ही उसे भारतीय टीम में अपनी जगह बनाने में सफल हुए।

दोस्तों के लिए मेंटर हैं ईशान

यशस्वी बताते हैं कि ईशान अपने दोस्तों के लिए मेंटर हैं। ईशान ने अपनी लाइफ में इतना स्ट्रगल किया है कि वह हमेशा अपने दोस्तों को खूब प्रोत्साहित करते हैं। अगर किसी दोस्त को जरा भी तनाव होता है या काम का प्रेशर होता है, ईशान से अपना दर्द साझा करता था। ईशान से बात करने के बाद वह राहत महसूस करता है। ईशान सभी दोस्तों के लिए एक इंस्पिरेशन की तरह हैं।



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