chhattisgarh raigarh violence police stone pelting jpl jansunwai | रायगढ़ कोयला खदान बवाल…महिला TI को मारी लात,VIDEO: बेहोश होकर जमीन पर गिरीं, भीड़ ने फूंकी पुलिस गाड़ी-एंबुलेंस, SDOP समेत कई पुलिसकर्मी घायल – Chhattisgarh News
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में पुलिस पर प्रदर्शनकारियों ने हमला कर दिया। थाना प्रभारी को लात मारी।
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में JPL कोयला खदान के खिलाफ धरने पर बैठे प्रदर्शनकारियों को हटाने गई पुलिस पर ग्रामीणों ने हमला कर दिया। महिलाओं ने तमनार थाना की थाना प्रभारी कमला पुषाम को लात मारी। हमले में TI घायल हो गईं। वह बेहोश होकर जमीन पर गिर गईं।
.
वहीं SDOP अनिल विश्वकर्मा समेत कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। कुछ घायलों को स्थानीय हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जबकि कुछ को रायगढ़ रेफर किया गया। हमले के बाद हालात इतने बिगड़े कि पुलिस की गाड़ियां और एम्बुलेंस तक जला दी गईं। प्रदर्शनकारी अभी भी मौके पर मौजूद हैं।
रायगढ़ कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने बताया कि 15 दिनों से सभी ग्रामीण धरना स्थल पर शांति पूर्वक बैठे थे। इसी बीच दोपहर ढाई बजे के आसपास कुछ लोगों ने प्रदर्शनकारियों को भड़का दिया। इसके बाद लोगों ने पथराव कर दिया। पुलिसकर्मियों को चोटें आई हैं।
उन्होंने बताया कि सुरक्षाकर्मी अपनी जान बचाकर मौके से भागे। इसके बाद जिला प्रशासन और पुलिस की टीम दोबारा ग्रामीणों से बातचीत करने के लिए गई, लेकिन भीड़ उग्र थी। भीड़ ने फिर से पथराव कर दिया। प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने की कोशिश हो रही है। घायलों का इलाज रायगढ़ में चल रहा है।
देखिए हिंसा की तस्वीरें…
प्रदर्शनकारियों ने तीन वाहनों में आग लगा दी।
महिला थाना प्रभारी को महिलाओं ने मारी लात। जमीन पर गिर गईं अधिकारी।
महिला थाना प्रभारी जख्मी हो गईं, जिसे पानी पिलाया जा रहा।
जानिए क्या है पूरा मामला ?
दरअसल, मामला 8 दिसंबर 2025 को धौराभाठा में हुई जनसुनवाई के विरोध से जुड़ा है। JPL कोयला खदान सेक्टर-1 कोल ब्लॉक से प्रभावित 14 गांवों के लोग 12 दिसंबर से धरने पर बैठे हुए हैं। सुबह करीब 9 बजे लिबरा चौक पर लगभग 300 ग्रामीण जमा हो गए। सड़क पर बैठकर आने-जाने का रास्ता रोक दिया।
स्थिति बिगड़ती देख सुबह करीब 10 बजे अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, अनुविभागीय अधिकारी पुलिस और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने लोगों को समझाया। धरना स्थल पर लगे टेंट में वापस भेज दिया। कुछ समय के लिए माहौल शांत हुआ, लेकिन तनाव बना रहा।
भीड़ की संख्या करीब 1000 के आसपास थी
जिला प्रशासन के मुताबिक आसपास के गांवों से और लोग मौके पर पहुंचने लगे। दोपहर तक भीड़ की संख्या करीब 1000 के आसपास हो गई। घरघोड़ा के एसडीएम और पुलिस अधिकारी लगातार माइक से लोगों से शांति बनाए रखने की अपील करते रहे, लेकिन भीड़ बार-बार सड़क पर आकर रास्ता रोकने की कोशिश करती रही।
करीब दोपहर ढाई बजे अचानक हालात बिगड़ गए। भीड़ ने पुलिस के बैरिकेड तोड़ दिए। पत्थर और डंडों से हमला कर दिया। पुलिस पर जमकर लाठियां और पत्थर बरसाए गए। कई पुलिसकर्मी और महिला आरक्षक भी घायल हुए, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।
रायगढ़ में भीड़ ने तीन वाहनों में आग लगा दी।
जिंदल के कोल हैंडलिंग प्लांट में घुसकर लगाई आग
जिला प्रशासन के मुताबिक उग्र भीड़ ने मौके पर खड़ी पुलिस बस, जीप और एम्बुलेंस में आग लगा दी। कई अन्य सरकारी वाहनों को भी नुकसान पहुंचाया गया। इसके बाद भीड़ जिंदल के कोल हैंडलिंग प्लांट की ओर बढ़ गई। वहां घुसकर कन्वेयर बेल्ट, दो ट्रैक्टर और अन्य वाहनों में आग लगा दी गई। प्लांट के दफ्तर में भी तोड़फोड़ की गई।
अधिकारियों की मौजूदगी में भी पथराव
स्थिति संभालने के लिए लैलूंगा की विधायक विद्यावती सिदार, रायगढ़ कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक खुद मौके पर पहुंचे, लेकिन भीड़ और ज्यादा उग्र हो गई। अधिकारियों की मौजूदगी में भी पथराव हुआ और भीड़ दोबारा प्लांट की ओर जाकर आगजनी करती रही।
फिलहाल इलाके में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। हालात काबू में बताए जा रहे हैं। पुलिस उपद्रव करने वालों की पहचान कर रही है। प्रशासन का कहना है कि सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और पुलिस पर हमला करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अब पढ़िए कोल खदान के खिलाफ कहां-कहां विरोध प्रदर्शन ?
पहला मामला- सरगुजा में 25 पुलिसकर्मी घायल, ग्रामीणों पर भी पथराव
पहला मामला सरगुजा जिले के अमेरा ओपनकास्ट कोल माइंस का है। कोल माइंस विस्तार के खिलाफ ग्रामीण विरोध जता रहे हैं। 3 दिसंबर 2025 को पुलिस और ग्रामीणों के बीच झड़प हो गई। इस दौरान ग्रामीणों ने पुलिस पर पथराव और गुलेल से हमला किया।
हमले में ASP, थाना प्रभारी समेत लगभग 25 पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। 12 से अधिक ग्रामीण भी चोटिल हुए थे। स्थिति नियंत्रण में लाने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। यह मामला लखनपुर थाना क्षेत्र का है।
जानकारी के अनुसार, SECL ने अमेरा खदान के विस्तार के लिए परसोढ़ी गांव की जमीनें साल 2001 में अधिग्रहित की थीं। ग्रामीण अपनी जमीन देने के लिए तैयार नहीं हैं। प्रशासनिक अधिकारी लगभग 500 पुलिसकर्मियों के साथ जमीन अधिग्रहण के लिए गांव पहुंचे थे। पढ़ें पूरी खबर…
दूसरा मामला- रायगढ़ में कोल माइंस का विरोध
वहीं दूसरा मामला रायगढ़ जिले के छाल क्षेत्र में कोयला खदान का है। ग्रामीण आंदोलन कर रहे हैं। पुरूंगा, साम्हरसिंघा और तेंदूमुड़ी के लोग अपनी जल, जंगल और जमीन को खदान के लिए देने से इनकार कर चुके हैं। 6 नवंबर को उन्होंने धरना प्रदर्शन किया।
कोयला खदान के लिए 11 नवंबर को होने वाली जनसुनवाई को ग्रामीण रद्द की मांग कर रहे थे। 6 नवंबर को करीब 300 ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे, लेकिन कलेक्टर उनसे मिलने नहीं आए। इसके बाद ग्रामीण रातभर कलेक्ट्रेट के सामने धरने पर बैठे रहे। इस धरने में महिलाएं, बच्चे और लड़कियां भी शामिल थीं। पढ़ें पूरी खबर….
तीसरा मामला- कोरबा में CISF ने ग्रामीणों पर बरसाई लाठियां
तीसरा मामला कोरबा जिले के SECL (साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) की गेवरा खदान का है। गेवरा खदान में भू-विस्थापितों के प्रदर्शन के दौरान CISF (केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल) ने लाठीचार्ज किया था। लाठीचार्ज के दौरान वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।
इस दौरान जवानों ने प्रदर्शनकारियों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा था। भू-विस्थापित रोजगार, पुनर्वास और मुआवजे की मांग कर रहे थे। लाठीचार्ज में किसान सभा के जिला सचिव दीपक साहू, रमेश दास, बिमल दास और गुलाब दास समेत लगभग 10 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। पढ़ें पूरी खबर…

