ATM Numbers Drop 2360 in India 2025 Digital Payments Boom RBI Report | देश में अब 2.51 लाख ATM: साल भर में 2,360 ATM बंद; प्राइवेट बैंकों ने सबसे ज्यादा बंद किए, डिजिटल पेमेंट बढ़ने का असर
नई दिल्ली39 मिनट पहले
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डिजिटल पेमेंट की बढ़ती पॉपुलैरिटी के कारण अब एटीएम (ATM) का इस्तेमाल कम हो रहा है। इसका सीधा असर देश भर में लगे ऑटोमेटेड टेलर मशीनों की संख्या पर पड़ा है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ‘ट्रेंड एंड प्रोग्रेस ऑफ बैंकिंग इन इंडिया’ रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025 में देश में कुल एटीएम की संख्या 2,360 यूनिट तक कम हो गई है।
31 मार्च 2025 तक देश में कुल एटीएम की संख्या 2,51,057 रह गई, जबकि पिछले साल (वित्त वर्ष 2024) यह आंकड़ा 2,53,417 था। आरबीआई ने कहा कि ग्राहक रोजमर्रा के लेन-देन के लिए नकदी निकालने के बजाय डिजिटल चैनलों का इस्तेमाल ज्यादा कर रहे हैं, जिससे एटीएम की जरूरत कम हो गई है।
प्राइवेट बैंकों ने सबसे ज्यादा एटीएम बंद किए
एटीएम बंद करने में प्राइवेट सेक्टर के बैंक सबसे आगे रहे। इनके एटीएम की संख्या 79,884 से घटकर 77,117 हो गई, जो सबसे तेज गिरावट है। वहीं पब्लिक सेक्टर बैंकों का नेटवर्क अब भी सबसे बड़ा है, लेकिन इनकी संख्या भी कम हुई है। यह 1,34,694 से घटकर 1,33,544 हो गई।
आरबीआई ने बताया कि पब्लिक और प्राइवेट दोनों बैंकों ने शहरों में स्थित अपने ऑफ-साइट एटीएम ( जो बैंक शाखा से दूर लगे होते हैं) को बंद किया है। जहां बैंक-ओन्ड एटीएम की संख्या कम हुई, वहीं इंडिपेंडेंट यानी स्वतंत्र रूप से संचालित होने वाले व्हाइट-लेबल एटीएम की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। यह 34,602 से बढ़कर 36,216 हो गई है।
ब्रांच खोलने में पब्लिक सेक्टर बैंक आगे
एटीएम कम होने के बावजूद बैंकों की कुल शाखाएं बढ़ी हैं। 31 मार्च 2025 तक देश में कुल शाखाओं की संख्या 1.64 लाख हो गई, जो पिछले साल के मुकाबले 2.8% ज्यादा है।
पब्लिक सेक्टर बैंक इस विस्तार में सबसे आगे रहे। नई शाखाएं खोलने में पब्लिक सेक्टर बैंकों का हिस्सा बढ़ा, जबकि प्राइवेट बैंकों का हिस्सा पिछले साल के 67.3% से घटकर 51.8% रह गया।
पब्लिक सेक्टर बैंकों ने अपनी दो-तिहाई से ज्यादा शाखाएं ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में खोलीं। इसके उलट, प्राइवेट बैंकों ने अपनी सिर्फ 37.5% शाखाएं ही ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में खोलीं। वे अब भी महानगरों और शहरी केंद्रों पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।

