Elephant terror on Jharkhand-Odisha border, 22 dead | झारखंड-ओडिशा सीमा पर हाथी का आतंक, 22 मौतें: चाईबासा की ओर लौटा खूनी हाथी, ट्रेंकुलाइज गन से बेहोश करने की तैयारी – Chaibasa (West Singhbhum) News
झारखंड-ओडिशा सीमा पर स्थित बनीसागर क्षेत्र में एक जंगली हाथी का उपद्रव जारी है। शुक्रवार को हाथी ने तीन लोगों को कुचल दिया, जिसके बाद वह एक बार फिर झारखंड की सीमा में प्रवेश कर गया। वन विभाग की तमाम कोशिशों के बावजूद हाथी को अब तक नियंत्रित नहीं किया
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चाईबासा वन विभाग ने गुरुवार देर शाम हाथी को ओडिशा के जंगलों की ओर खदेड़ा था। हालांकि, ओडिशा के वन कर्मियों ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए हाथी को वापस झारखंड की सीमा में धकेल दिया।
देर रात हाथी ने पुनः चाईबासा सीमा में प्रवेश किया, जिसके बाद वन विभाग की टीमें उसकी तलाश में जुट गई हैं। हाथी को ट्रेंकुलाइज करने की तैयारी है।
हाथियों को भागने वाली टीम के एक सदस्य सुखराम बेसरा (57) को हाथी ने उठाकर फेंक दिया।
बंगाल से आए हरकारे को उठाकर फेंका, मौत
मझगांव प्रखंड के बेनीसागर के जंगल में शुक्रवार को हाथी को देखने गए बोदरा (11 साल) और जेसीबी चालक प्रकाश कुमार पान को हाथी ने पटक-पटक कर मार डाला। हाथी दोनों लाशों को लेकर जंगल में 10 घंटे तक गोल-गोल घूमता रहा। हाथी ने प्रकाश का सिर धड़ से अलग कर दिया।
इस बीच दोपहर 1:30 बजे बंगाल के बांकुड़ा से पहुंची। हाथियों को भागने वाली टीम के एक सदस्य सुखराम बेसरा (57) को हाथी ने उठाकर फेंक दिया। गंभीर रूस से घायल सुखराम की इलाज के दौरान ओडिशा के करंजी अस्पताल में मौत हो गई। घटना के बाद बंगाल टीम ने हाथी भागने से इनकार कर दिया।
हाथी को 20 से 25 मिनट तक बेहोश होने में लगता है
इसके साथ ही मृतकों की संख्या 22 हो गई है। वन विभाग को उम्मीद है कि हाथी को ट्रेंकुलाइज कर काबू में कर लिया जाएगा। वाइल्डलाइफ ओडिशा के ट्रेंकुलाइज स्पेशलिस्ट डॉ. बानराज ने कहा कि हाथी को टेंक्रुलाइज होने के बाद 20 से 25 मिनट तक बेहोश होने में लगता है। अगर ढंग से बेहोश नहीं किया जा सका तो भारी नुकसान पहुंचा सकता है, इसलिए सावधानी बरती जा रही है।
हाथी को नियंत्रित करने के लिए पश्चिम बंगाल, ओडिशा और गुजरात से ‘वनतारा रेस्क्यू टीम’ को बुलाया गया है। टीम आधुनिक संसाधनों के साथ अभियान चला रही है। यह हाथी 1 जनवरी से अब तक कुल 22 लोगों की जान ले चुका है।
दो दांत का हाथी अब तक 12 अलग-अलग जगहों पर हमला कर चुका है।
प्रतिदिन लगभग 30 किलोमीटर की दूरी तय कर रहा
वन अधिकारियों के अनुसार, झुंड से बिछड़ने के कारण यह हाथी अत्यधिक हिंसक हो गया है। इसकी तेज गति भी एक बड़ी चुनौती है; यह प्रतिदिन लगभग 30 किलोमीटर की दूरी तय कर रहा है, जिससे इसकी सटीक लोकेशन का पता लगाना मुश्किल हो रहा है।
चाईबासा के डीएफओ आदित्य नारायण ने बताया कि हाथी के दोबारा झारखंड में प्रवेश की पुष्टि हो गई है। उन्होंने कहा, “हमारी टीम पूरी तरह अलर्ट पर है और उसे बेहोश करने का प्रयास फिर से शुरू किया जाएगा। ग्रामीणों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे जंगलों की ओर न जाएं और सतर्क रहें।”

