PM Modi LIVE | Narendra Modi Somnath Temple Visit Photos Update; Somnath Swabhiman Parv – Bhupendra Patel | मोदी बोले- सोमनाथ तोड़ने वाले इतिहास के पन्नों में सिमटे: दुर्भाग्य से देश में आज भी मंदिर पुनर्निर्माण का विरोध करने वाली ताकतें मौजूद

PM Modi LIVE | Narendra Modi Somnath Temple Visit Photos Update; Somnath Swabhiman Parv – Bhupendra Patel | मोदी बोले- सोमनाथ तोड़ने वाले इतिहास के पन्नों में सिमटे: दुर्भाग्य से देश में आज भी मंदिर पुनर्निर्माण का विरोध करने वाली ताकतें मौजूद


03:50 AM11 जनवरी 2026

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सोमनाथ मंदिर से जुड़ी 5 मान्यताएं

1. चंद्रदेव से जुड़ा इकलौता शिव तीर्थ

ऐसी मान्यता है कि चंद्रदेव (सोम) ने भगवान ब्रह्मा के पुत्र राजा दक्ष प्रजापति की 27 बेटियों से विवाह किया था, लेकिन वे सिर्फ रोहिणी से प्रेम करते थे। इससे नाराज़ होकर दक्ष ने उन्हें क्षय रोग (टीबी) का श्राप दे दिया। देवता चंद्रदेव को सोमनाथ लाए। यहां उन्होंने शिव की कठोर तपस्या की। भगवान शिव ने उन्हें आंशिक मुक्ति दी। शिव यहां सोमनाथ यानी सोम (चंद्रमा) के नाथ कहलाए। यही वजह है कि यह मंदिर चंद्र से जुड़ा एकमात्र शिव तीर्थ माना जाता है।

2. दक्षिण में 6000 किमी तक कोई जमीन नहीं

सोमनाथ मंदिर 20.89° N अक्षांश, 70.40° E देशांतर पर है। मंदिर का शिखर जिस दिशा में है, उसे कहते हैं “निष्कलंक अक्षांश”। सोमनाथ से दक्षिण दिशा में लगभग 6000 किमी तक कोई भूमि नहीं आती। हालांकि, ईस्ट-वेस्ट में छोटे छोटे द्वीप जरूर हैं।

मंदिर परिसर के बाणस्तंभ पर संस्कृत (आसमुद्रांत दक्षिण ध्रुव पर्यंत अबाधित ज्योतिरमार्ग) और दूसरी तरफ इंग्लिश में एक अभिलेख है। इसमें लिखा है- इस बिंदु से साउथ पोल तक सीधी रेखा में कोई अवरोध नहीं है।

3. समुद्र किनारे, गर्भगृह तक नहीं आती लहरें

सोमनाथ मंदिर अरब सागर के किनारे है, फिर भी सदियों से समुद्र की लहरें गर्भगृह को कभी नहीं छूतीं। मान्यता है कि इसे शिव की कृपा माना जाता है। स्थानीय पंडितों का कहना है कि समुद्र महादेव की मर्यादा में आज भी सीमा नहीं लांघता।

4. हर बार टूटा, हर बार फिर बना

इसके तोड़ने और बनने के दावे अलग-अलग हैं। कुछ इतिहासकार इसे 7 बार तोड़ने की बात कहते हैं तो कुछ 17 बार। लेकिन यह हर बार उसी स्थान पर फिर बनाया गया। इसलिए कहा जाता है- यह इकलौता मंदिर है, जो हर बार राख से उठ खड़ा हुआ।

5. लूटे गए द्वार, इतिहास पर मतभेद

गजनवी सोमनाथ से मंदिर के चंदन द्वार लूटकर गजनी (अफगानिस्तान) ले गया और मस्जिद में लगा दिए। 1951 में राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के प्रयास से वे द्वार भारत वापस लाए गए और सोमनाथ में स्थापित किए गए। इतिहासकार रोमिला थापर ने लिखा कि द्वारों को वापस लाने का जो मामला सामने आया वह 1842 का ब्रिटिश प्रोपेगैंडा था, न कि 1026 के लूट का वास्तविक प्रमाण।



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