इटावा भागवत कथा के दूसरे दिन अमर कथा:कथावाचक बोले- प्यासे मन से कथा सुनें, कृष्ण प्राप्ति से बढ़कर कोई संपदा नहीं

इटावा भागवत कथा के दूसरे दिन अमर कथा:कथावाचक बोले- प्यासे मन से कथा सुनें, कृष्ण प्राप्ति से बढ़कर कोई संपदा नहीं




कल्याणराय सेवा समिति सनाढ्य ब्राह्मण समाज की ओर से रामलीला मैदान में आयोजित श्रीमद् भागवत महापुराण कथा के दूसरे दिन शनिवार को श्रद्धा और भक्ति का विशेष माहौल देखने को मिला। कथा के दौरान अमर कथा और महर्षि शुकदेवजी के जन्म का वृतांत विस्तार से सुनाया गया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कथावाचक मुकेश मोहन शास्त्री ने कथा का शुभारंभ करते हुए कहा कि यह ठाकुर जी की विशेष कृपा है कि श्रद्धालु इस दिव्य कथा का श्रवण कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा का रस वही लोग ग्रहण कर पाते हैं, जिन्हें स्वयं गोविंद यह अवसर प्रदान करते हैं। कथा केवल सुनने का विषय नहीं, बल्कि आत्मा को परम शांति से जोड़ने का माध्यम है। प्यासे मन से कथा सुनने का आह्वान शास्त्री जी ने श्रोताओं को संबोधित करते हुए कहा कि यदि भागवत कथा से कुछ पाना और सीखना है, तो प्यासे बनकर कथा में आएं। सीखने और समझने की भावना से कथा सुनने पर यह जीवन को नई दिशा देती है। उन्होंने कहा कि कथा वही फल देती है, जो श्रद्धा और जिज्ञासा के साथ सुनी जाए। कृष्णभक्ति ही मानव जीवन का उद्देश्य कथावाचक ने जोर देकर कहा कि मनुष्य का जीवन सांसारिक भोग-विलास में उलझने के लिए नहीं, बल्कि कृष्णभक्ति के लिए मिला है। आज का मनुष्य भगवान की भक्ति को छोड़कर विषय-वस्तुओं में लीन होता जा रहा है, जबकि मानव जीवन का शाश्वत लक्ष्य श्रीकृष्ण की प्राप्ति है। कृष्ण प्राप्ति से बढ़कर कोई संपदा नहीं शास्त्री जी ने कहा कि यदि मनुष्य यह दृढ़ निश्चय कर ले कि उसे जीवन में कृष्ण को पाना है, तो प्रभु से बढ़कर न कोई सुख है और न कोई संपत्ति। उन्होंने बताया कि श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण करने वालों का सदैव कल्याण होता है और उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है।



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