मंडी में पानी की दरें बढ़ीं, 26 संस्थाएं विरोध में:बोले- बिलों में 70 से 200 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की; प्रशासन को सौंपा ज्ञापन

मंडी में पानी की दरें बढ़ीं, 26 संस्थाएं विरोध में:बोले- बिलों में 70 से 200 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की; प्रशासन को सौंपा ज्ञापन




हिमाचल प्रदेश के मंडी में नागरिक सभा और 26 अन्य संगठनों के प्रतिनिधियों ने घरेलू जल शुल्क में हुई भारी वृद्धि और शहर की अन्य नागरिक समस्याओं को लेकर जिला प्रशासन और राज्य सरकार को ज्ञापन सौंपा। सभा ने नई दरों को अव्यावहारिक और जनविरोधी बताते हुए इन्हें तर्कसंगत स्तर पर लाने की मांग की है। नागरिक सभा के अध्यक्ष हरीश वैद्य ने बताया कि पहले घरेलू नल कनेक्शनों के लिए जल शुल्क ₹13.86 प्रति किलोलीटर की एक समान दर पर था। अब नई दरों के तहत 0 से 20 किलोलीटर पर ₹19.30, 20 से 30 किलोलीटर पर ₹33.28 और 30 किलोलीटर से अधिक पर ₹59.90 प्रति किलोलीटर शुल्क लिया जा रहा है। इसके साथ ही 30 प्रतिशत सीवरेज चार्ज और ₹110 प्रति माह मीटरिंग चार्ज भी जोड़ा गया है। इससे पानी के बिलों में 70 से 200 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। लंबित बिलों ने बढ़ाई उपभोक्ताओं की परेशानी सभा ने बताया कि जुलाई 2025 से लंबित बिल जनवरी 2026 में एक साथ जारी किए गए हैं, जिससे उपभोक्ताओं पर अचानक भारी वित्तीय बोझ पड़ा है। नागरिक सभा ने मांग की है कि बकाया बिल आसान किस्तों में लिए जाएं और किसी भी प्रकार का कनेक्शन विच्छेद या विलंब शुल्क न लगाया जाए। शहर की अन्य समस्याओं पर भी जताई चिंता जल शुल्क के अलावा, नागरिक सभा ने मंडी शहर की अन्य प्रमुख समस्याओं पर भी ध्यान आकर्षित किया। इनमें फोरलेन निर्माण के बाद पुराने नगर प्रवेश मार्ग की खराब स्थिति, पुरानी मंडी पुल के निर्माण में देरी, विश्वकर्मा चौक क्षेत्र में भू-स्खलन का खतरा और सार्वजनिक शौचालयों की दयनीय स्थिति शामिल हैं। सभा ने अव्यवस्थित बिजली और संचार तारों से दुर्घटना की आशंका, कई स्थानों पर खराब पड़े सीसीटीवी कैमरे तथा संकरी गलियों में अनियंत्रित यातायात के कारण पैदल चलने वालों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता व्यक्त की। प्रशासन से शीघ्र समाधान की मांग नागरिक सभा मंडी ने प्रशासन से आग्रह किया है कि पानी की दरों में की गई वृद्धि पर पुनर्विचार किया जाए और शहर की सभी प्रमुख समस्याओं का शीघ्र, स्थायी और प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जाए, ताकि आम जनता को राहत मिल सके।



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