चांदी ने नया रिकॉर्ड बनाया:1 साल में 250 प्रतिशत से ज्यादा उछली चांदी, रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची, मची हलचल
पिछले एक साल में निवेशकों को चौंकाने वाला रिटर्न देने वाली चांदी ने मंगलवार को अपने अब तक के उच्चतम स्तर को छू लिया। एक जनवरी 2025 को 90,500 रुपए प्रति किलो बिकने वाली चांदी अब बढ़कर 3.24 लाख रुपए तक पहुंच गई है। यानी महज एक साल में चांदी की कीमतों में करीब 250 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। मंगलवार को बाजार खुलते ही आरटीजीएस में चांदी ने 3,24,999 रुपए का स्तर छूकर नया रिकॉर्ड बनाया, जिससे सर्राफा बाजार में खलबली मच गई। मंगलवार सुबह चांदी आरटीजीएस में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद कुछ ही घंटों में मुनाफावसूली का दबाव झेलने लगी। शाम होते-होते भाव फिसलकर 3,21,575 रुपए के आसपास आ गए और रात आठ बजे तक इसी दायरे में घूमते रहे। हाजिर बाजार में भी यही रुख देखने को मिला। चांदी ने यहां 3,19,499 रुपए का उच्चतम स्तर छुआ, लेकिन बाद में गिरकर 3,16,476 रुपए प्रति किलो पर टिक गई। लगातार हो रही इस उठा-पटक ने कारोबारियों और ग्राहकों दोनों को सतर्क कर दिया है। चांदी की महंगाई का सबसे बड़ा असर शादी-विवाह वाले घरों पर पड़ा है। मध्यम वर्गीय परिवारों को या तो खरीद घटानी पड़ रही है या शादी का कुल बजट बढ़ाना पड़ रहा है। एक साल में 250% से ज्यादा की छलांग लगाने वाली चांदी ने बाजार को रोमांचित भी किया है और डरा भी दिया है। आने वाले दिनों में इसकी चाल काफी हद तक वैश्विक संकेतों और घरेलू सट्टेबाजी पर निर्भर करेगी। पिछले एक साल के आंकड़े क्या कहते हैं अगर पीछे मुड़कर देखें तो चांदी की तेजी असाधारण रही है। 1 जनवरी 2025 को 90,500 प्रति किलो के भाव थे। इसी प्रकार जुलाई 2025 में 1.55 लाख के आसपास भाव रहे। इसके बाद दिसंबर 2025 में चांदी के भाव करीब 2.40 लाख के आसपास थे। इसके बाद 20 जनवरी 2026 को 3.24 लाख (रिकॉर्ड) स्तर पर चांदी के भाव पहुंच गए। इन आंकड़ों से साफ है कि चांदी ने न सिर्फ निवेशकों को आकर्षित किया, बल्कि बाजार के पारंपरिक ट्रेंड को भी पीछे छोड़ दिया। भास्कर एक्सपर्ट–श्रीनारायण सोनी, वरिष्ठ सर्राफा विशेषज्ञ “चांदी की कीमतों में मौजूदा उछाल का बड़ा कारण सट्टेबाजी है। यह तेजी स्थायी भी हो सकती है और अस्थायी भी। निवेशकों को चाहिए कि एकमुश्त बड़ी रकम लगाने से बचें और चरणबद्ध निवेश करें। जिन ग्राहकों को तुरंत जरूरत नहीं है, वे भाव स्थिर होने का इंतजार करें। जल्दबाजी में लिया गया फैसला नुकसान का कारण बन सकता है।” “हमने चांदी के जो गहने तय किए थे, अब उनका वजन कम करना पड़ रहा है। भाव इतने बढ़ गए हैं कि पूरा बजट बिगड़ गया। मजबूरी में परंपरा निभाने के तरीके बदलने पड़ रहे हैं।”
-शचि शर्मा, पारीक चौक, निवासी सट्टेबाज, वैश्विक संकेत और औद्योगिक मांग का तिहरा असर
सर्राफा बाजार से जुड़े जानकारों के अनुसार, चांदी की मौजूदा अस्थिरता के पीछे कई वजहें हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में डॉलर की चाल, ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और वैश्विक आर्थिक तनाव ने निवेशकों को सुरक्षित विकल्पों की ओर मोड़ा है। वहीं सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और ग्रीन एनर्जी सेक्टर में चांदी की मांग लगातार बढ़ रही है। इसके साथ ही घरेलू बाजार में सटोरियों की सक्रियता ने कीमतों को जरूरत से ज्यादा ऊपर धकेल दिया है। अचानक खरीद-बिक्री के कारण रोजाना हजारों रुपए का उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है, जिससे बाजार सहमा हुआ है। विशेषज्ञों की मानें तो मौजूदा माहौल में जल्दबाजी नुकसानदेह हो सकती है। गहनों के खरीदारों को कुछ समय इंतजार करना चाहिए, जबकि निवेशकों के लिए चरणबद्ध निवेश ज्यादा सुरक्षित विकल्प माना जा रहा है। अचानक तेजी के पीछे भागने के बजाय दीर्घकालीन नजरिया अपनाने की सलाह दी जा रही है।
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