सूरत में टेस्टिंग में ही ढही 21 करोड़ की टंकी:अहमदाबाद में 75 साल पुरानी टंकी गिराने में लगानी पड़ी जेसीबी, कांग्रेस बोली- यह है बीजेपी मॉडल
गुजरात के सूरत में टेस्टिंग के लिए पानी भरते ही 21 करोड़ की लागत से बनी पानी की टंकी भरभराकर गिर गई थी। इसे लेकर प्रशासन पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सरकार ने इस मामले में तत्काल कार्रवाई करते हुए उप कार्यकारी अभियंता जय चौधरी और तत्कालीन कार्यकारी अभियंता रजनीकांत चौधरी को निलंबित कर दिया है। इसके अलावा, टैंक बनाने वाली एजेंसी को किए जाने वाले सभी भुगतान रोक दिए गए हैं। इस पूरी घटना की विभागीय जांच भी की जाएगी, ताकि दोषियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जा सके। 75 साल पुरानी टंकी को तोड़ने जेसीबी लगानी पड़ी
वहीं, अहमदाबाद 75 साल पुरानी एक 10 मंजिला पानी की टंकी थी। यह टंकी इतनी मजबूत थी कि इसे तोड़ने के लिए 8 टन की जेसीबी मशीन टंकी पर क्रेन की मदद से चढ़ानी पड़ गई थी। इन दोनों मामलों ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। कांग्रेसी नेता इन दोनों टंकियों की फोटो शेयर कर बता रहे हैं कि 75 साल पुरानी टंकी कांग्रेस के समय बनी थी, जिसे तोड़ने में मशक्क्त करनी पड़ी। जबकि सारत में बनी टंकी भाजपा शासन में हो रहे करप्शन को दिखा रही है। कांग्रेस पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने अकाउंट से पानी की टंकी गिरने का वीडियो को साझा करते हुए लिखा है एक तरफ कांग्रेस के शासन काल में बनाई गई पानी की टंकी जेबीसी से तोड़नी पड़ी, तो वहीं दूसरी तरफ बीजेपी के शासन काल में बनी टंकी उद्घाटन से पहले ही गिर गई। कांग्रेस ने अपनी पोस्ट में कांग्रेस मॉडल Vs बीजेपी मॉडल लिखाकर निशाना साधा है। कांग्रेस ने जिस पानी की टंकी का हवाला दिया है वह 70 साल पुरानी थी। जिसे बुलडोजर से तोड़ना पड़ा था। अब इन दोनों घटनाओं के बारे में विस्तार से जानिए…
अहमदाबाद के सारंगपुर इलाके में एक 10 मंजिला इमारत जितनी ऊंची पानी की टंकी गिराई जानी थी। दिसंबर महीने में इसे तोड़ने का काम शुरू हुआ था। लेकिन कंस्ट्रक्शन इतना मजबूत था कि मजदूरों से टंकी का ऊपरी हिस्सा टूट ही नहीं पा रहा था। इसके चलते 13 जनवरी के इस पर क्रेन की मदद से एक जेसीबी चढ़ाई गई। इसके बाद टंकी टूट पाई। लोग उस समय के निर्माण की मजबूती के बारे में चर्चा कर रहे हैं। इस टैंक से दो इलाकों में पानी की आपूर्ति होती थी
यह टैंक अहमदाबाद के कोट क्षेत्र के खाडिया और सारंगपुर इलाकों में पीने का पानी पहुंचाता था। नगर निगम ने दिसंबर में 75 साल पुराने सारंगपुर जल टैंक को तोड़ने की प्रक्रिया शुरू की। टैंक 1500 टन भार वहन कर सकता है, इसलिए इसे ध्वस्त करने के लिए जेसीबी मशीन लगाई गई थी। सूरत में बनी टंकी टेस्टिंग में ही ढह गई
19 जनवरी को कामरेज तालुका के गयापगला गांव में एक घटना घटी। दरअसल, तापी नदी से गांव को स्वच्छ जल उपलब्ध कराने के लिए यहां 21 करोड़ रुपये की लागत से टंकी बनाई गई थी। नई और चमचमाती टंकी की टेस्टिंग होनी थी। लेकिन सोमवार को जैसे ही टंकी में पानी भरा गया तो टंकी भरभराकर ढह गई। इस दुर्घटना में एक महिला समेत तीन मजदूर घायल हो गए, जिसके चलते स्थानीय लोगों में इस व्यवस्था को लेकर काफी गुस्सा है। अधिकारियों ने मौके पर निरीक्षण के दौरान पाया कि टैंक की संरचना घटिया थी। ठेकेदार ने लोहे और सीमेंट के इस्तेमाल में गंभीर अनियमितताएं बरती थीं। जल आपूर्ति विभाग के कार्यकारी अभियंता जय चौधरी ने कहा- फिलहाल इसकी जांच की जा रही है। रिपोर्ट आने के बाद जिम्मेदार ठेकेदार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
Source link

