Gwalior Jeweler Fraud: Loan Default, Fake Affidavit

Gwalior Jeweler Fraud: Loan Default, Fake Affidavit


सराफा कारोबारी अजीत जैन और उनके दुकान।

सराफा बाजार बाड़ा (लश्कर) स्थित विमल ज्वेलर्स के संचालक पिता-पुत्र अजीत जैन और विमल जैन के खिलाफ कोतवाली थाना पुलिस ने शुक्रवार को धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। आरोप है कि दोनों ने साल 2012 से 2016 के बीच तीन लोगों से कुल 16 लाख रुपए उधार लिए, लेकिन

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शपथ पत्र देखकर पीड़ित परिवार हैरान पैसे देने वाले व्यापारी परिवार ने पुलिस को बताया कि उन्होंने न तो कोई शपथ पत्र बनवाया था और न ही किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए थे। इसके बावजूद उनके नाम से शपथ पत्र तैयार कर दिखाया गया। मामले की शिकायत 5 मार्च 2021 को कोतवाली थाने में की गई थी। लंबी जांच के बाद अब पुलिस ने केस दर्ज किया है।

मामले में जांच करती कोतवाली थाना पुलिस।

जैन परिवार से रिश्तों का फायदा उठाया शिकायतकर्ता शारदा जैन पत्नी धर्मपाल जैन निवासी गुड़ा चक्की नाका कंपू ने बताया कि उनके पिता लालमणि प्रसाद जैन निवासी नया बाजार सकल जैन समाज में सम्मानित वृद्ध जैन संत हैं। पारिवारिक संबंधों के चलते अजीत जैन और उनके बेटे विमल जैन से विश्वास का रिश्ता था।

आरोप है कि सराफा कारोबारी पिता-पुत्र ने पहले व्यापारिक जरूरत बताकर 9 जुलाई 2012 को लालमणि प्रसाद जैन से 3 लाख रुपए चेक के जरिए उधार लिए। जून 2013 तक नियमित ब्याज भी चुकाया गया, जिससे विश्वास और मजबूत हुआ।

विश्वास जीतकर लिए 16 लाख, फिर बंद किया भुगतान इसके बाद आरोपियों ने शारदा जैन की बहन शशि जैन और भतीजी-बहू प्रियंका जैन से भी समय-समय पर रुपए लिए। साल 2012 से 2016 के बीच कुल 16 लाख रुपए उधार लिए गए। कुछ समय तक ब्याज दिया गया, लेकिन बाद में न तो ब्याज दिया गया और न ही मूल राशि लौटाई गई। लगातार मांग के बाद दोनों पक्षों में विवाद बढ़ता गया।

डॉक्यूमेंट लेकर बनाया फर्जी शपथ पत्र पीड़ितों का आरोप है कि नवंबर 2020 में आरोपियों ने “फाइनल सेटलमेंट” का भरोसा दिलाकर शारदा, शशि और प्रियंका जैन से फोटो, आधार कार्ड, पैन कार्ड सहित अन्य दस्तावेज ले लिए। इसके बाद 21 दिसंबर 2020 को फर्जी शपथ पत्र तैयार कर लिया गया।

जब रुपए मांगे गए तो 7 फरवरी 2021 को आरोपियों ने शपथ पत्र की कॉपी भेजी, जिसमें लिखा था कि सभी की सहमति से फाइनल सेटलमेंट हो चुका है। पीड़ित परिवार यह देखकर स्तब्ध रह गया, क्योंकि उन्होंने न कोई स्टांप खरीदा था और न ही किसी कागज पर हस्ताक्षर किए थे।

पांच साल चली जांच, अब दर्ज हुआ केस शिकायत के बाद मामला जांच में लिया गया। तत्कालीन एडिशनल एसपी सत्येंद्र सिंह तोमर ने जांच कर रिपोर्ट सौंपी। आरोप है कि इस दौरान आरोपी अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर जांच को प्रभावित करते रहे। अंततः एएसपी की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने अजीत जैन और विमल जैन के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया।

कोतवाली थाना प्रभारी मोहिनी वर्मा ने बताया-

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मामले में अजीत जैन और विमल जैन के खिलाफ फ्रॉड का प्रकरण दर्ज किया गया है। आरोप है कि उन्होंने उधार लिया पैसा नहीं लौटाया और फर्जी तरीके से शपथ पत्र तैयार कराया।

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फर्जी दस्तावेजों से वाहन ट्रांसफर, आरटीओ की भूमिका सवालों में

भोपाल का क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है। आरोप है कि दलालों के जरिए बिना वाहन मालिक की जानकारी और उपस्थिति के 13 लाख कीमत की टाटा 407 को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दूसरे व्यक्ति के नाम ट्रांसफर कर दिया गया। मामला सामने आने के बाद आरटीओ ने कागजों में तो वाहन को असली मालिक के नाम वापस कर दिया, लेकिन न तो आरोपी पर कार्रवाई हुई और न ही वाहन अब तक मालिक को वापस मिल सका।पूरी खबर पढ़ें



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