दिशोम गुरु शिबू सोरेन को मिला पद्य भूषण:लोक कल्याण के क्षेत्र में काम करने के लिए पुरस्कार से नवाजा गया

दिशोम गुरु शिबू सोरेन को मिला पद्य भूषण:लोक कल्याण के क्षेत्र में काम करने के लिए पुरस्कार से नवाजा गया




राज्यसभा सांसद और झारखंड के पूर्व सीएम शिबू सोरेन को पद्य भूषण पुरस्कार से नवाजा गया है। उन्हें मरणोपरांत यह पुरस्कार दिया गया है। दिशोम गुरु को लोक कल्याण के क्षेत्र में काम करने के लिए इस पुरस्कार के लिए चुना गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आज पद्य पुरस्कारों की घोषणा की है। इस लिस्ट में दिशोम गुरु शिबू सोरेन भी शामिल हैं। महाजनों के खिलाफ किया आंदोलन, आमजन तक पहुंचे महज 13 साल की उम्र के थे, जब उनके पिता की हत्या महाजनों ने कर दी। इसके बाद शिबू सोरेन ने पढ़ाई छोड़ दी और महाजनों के खिलाफ संघर्ष का फैसला किया। पिता की हत्या के बाद उन्हें लगा कि पढ़ाई से ज्यादा जरूरी है महाजनों के खिलाफ आदिवासी समाज को इकट्‌ठा करना। उन्होंने सूदखोर महाजनों के खिलाफ काम करना शुरू किया। 1970 में वे महाजनों के खिलाफ खुल कर सामने आए और धान कटनी आंदोलन की शुरुआत की। सूदखोरों के खिलाफ आंदोलन चलाकर शिबू सोरेन चर्चा में आए। यहीं से वह आम लोगों के लिए खुद को समर्पित कर दिया। झारखंड के तीन बार सीएम भी रहे हैं शिबू सोरेन पद्य भूषण शिबू सोरेन झारखंड के तीन बार सीएम भी रह चुके हैं। तीन बार के कार्यकाल में शिबू सोरेन को 10 महीना 10 दिन ही राज्य की कमान संभालने का मौका मिला। शिबू सोरेन पहली बार सिर्फ 10 दिनों के लिए मुख्यमंत्री बने थे। इसके बाद शिबू सोरेन दूसरी बार 28 अगस्त 2008 को झारखंड के मुख्यमंत्री बने। इस बार उन्हें पांच महीने तक मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने का मौका मिला। उन्होंने 18 जनवरी 2009 को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। फिर तीसरी बार 30 दिसंबर 2009 को शिबू सोरेन झारखंड के मुख्यमंत्री बने। इस बार उनका कार्यकाल सिर्फ पांच महीने का रहा। उन्होंने 31 मई 2009 को मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। 4 अगस्त को दिल्ली में ली थी अंतिम सांस दिशोम गुरु शिबू सोरेन लंबे समय से किडनी की बीमारी से जूझ रहे थे। उन्हें कई और शारीरिक समस्या थी। जिसके बाद बेहतर इलाज के लिए उन्हें दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल ले जाया गया था। जहां उन्होंने बीते 4 अगस्त को अंतिम सांस ली। शिबू सोरेन झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक संरक्षक थे। वह यूपीए के पहले कार्यकाल के दौरान कोयला मंत्री रह चुके थे। हालांकि चिरूडीह हत्याकांड में नाम आने के बाद उन्होंने केंद्रीय मंत्रीमंडल से इस्तीफा दे दिया था।



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