'जया बच्चन संसद में चैयरमैन को भी टोक देती हैं':कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला बोले- उन्हें अनुशासनहीनता बिल्कुल बदार्शत नहीं
एक्ट्रेस-पॉलिटिशियन जया बच्चन अक्सर अपने बेबाक अंदाज और सख्त मिजाज को लेकर सुर्खियों में रहती हैं। चाहे कोई सार्वजनिक कार्यक्रम हो या फिर संसद, जया बच्चन अपनी दोटूक राय रखने से कभी पीछे नहीं हटतीं। अब कांग्रेस के राज्यसभा सांसद राजीव शुक्ला ने जया बच्चन की इसी बेबाकी और उनके राजनीतिक कामकाज को लेकर खुलकर बात की है। इसके साथ ही उन्होंने रेखा की राजनीति में भूमिका पर भी अपनी राय रखी। राजीव शुक्ला ने बताया कि जया बच्चन बेहद सख्त और अनुशासित नेता हैं, जो गलत बात को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करतीं। उन्होंने कहा कि जया बच्चन संसद में मंत्रियों को उनके सामने ही फटकार लगाने से भी नहीं हिचकतीं। दरअसल, हाल ही में राजीव ANI पॉडकास्ट का हिस्सा बने। यहां पर उनसे होस्ट स्मिता प्रकाश ने पूछा कि क्या आपने जया बच्चन का इंटरव्यू किया है? जवाब में राजीव हामी भरते हैं। फिर स्मिता उनसे पूछती हैं कि ये हमेशा मीडिया से क्यों नाराज रहती हैं? राजीव के मुताबिक, “अगर जया बच्चन को लगता है कि कोई अनुशासनहीनता कर रहा है, तो वह उसे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करतीं। संसद में वह मंत्रियों या यहां तक कि चेयरमैन जगदीप धनखड़ जी को भी टोक देती हैं और गलत बात के खिलाफ बेखौफ आवाज उठाती हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि जया बच्चन की संसद में उपस्थिति रिकॉर्ड काफी बेहतरीन है और वह नियमित रूप से सदन की कार्यवाही में हिस्सा लेती हैं। वहीं, राजीव शुक्ला ने रेखा को लेकर कहा कि वे उन्हें एक सक्रिय राजनेता के रूप में नहीं देखते। उन्होंने बताया कि रेखा हर सेशन में सिर्फ एक बार संसद आती थीं और सक्रिय राजनीति में उनकी भागीदारी सीमित रही। उन्होंने कहा, “रेखा जी हर सेशन में सिर्फ एक बार आती थीं। उनका कार्यकाल खत्म हुआ और वहीं उनकी राजनीतिक भूमिका भी समाप्त हो गई।” साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि रेखा और सचिन तेंदुलकर ने सांसद बनने के बाद सरकारी आवास तक नहीं लिया, जबकि लता मंगेशकर ने सांसदों को मिलने वाली कई सुविधाएं स्वीकार करने से इनकार कर दिया था, जिसमें MPLADS फंड और अन्य सुविधाएं भी शामिल थीं। जया बच्चन और रेखा का राजनीतिक सफर जया बच्चन को पहली बार 2004 में समाजवादी पार्टी से राज्यसभा सांसद चुना गया था। इसके बाद वो कई बार निर्वाचित हुईं और संसद में बहस में सक्रिय रूप से हिस्सा लेती रही हैं। वहीं, रेखा ने 2012 में राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ ली थी, लेकिन उन्हें सदन की चर्चाओं में ज्यादा सक्रिय नहीं देखा गया।
Source link

