नए बोर में डाले जाएंगे टेलीमीटर, जल-स्तर गिरते ही अलर्ट:रस्सी-पाइप नहीं, अब पीजो मीटर से नापा जाएगा शहर का भू-जल स्तर
शहर का भू-जल स्तर नापने के लिए अब रस्सी और पाइप की पुरानी प्रक्रिया को बंद किया जाएगा। इसके स्थान पर भू-जल का स्तर नापने के लिए पीजो मीटर की सहायता ली जाएगी। सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड की मदद से अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग कर भू-जल स्तर को नापा जाएगा। इसके लिए निगम के 66 वार्ड सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्र में पीजो मीटर लगाए जाएंगे। उसमें एक टेलीमीटर (आटो मैटिक डेटा रिपोर्टर) होगा, जो तीन-तीन घंटे में भू-जल स्तर की रीडिंग देगा। ये रीडिंग मोबाइल पर एप के माध्यम से नगर निगम और बोर्ड के अधिकारी घर-ऑफिस में बैठकर देख सकेंगे। इसके लिए 21 स्थलों का चयन कर पीजो मीटर लगाने का काम शुरू हो गया है। निगम के शहरी सहित ग्रामीण वार्डों 66 वार्डों में 2603 बोरिंग और हैंडपंप है। उनके माध्यम से जनता को पानी उपलब्ध कराया जाता है। गर्मी के दिनों में सबसे ज्यादा समस्या सामने आती है, जब जल स्तर कम होता है। क्योंकि मैदानी अमले को घटते जल स्तर का पता ही नहीं चलता। जब जनता पानी की शिकायत करती है। तब समस्या का समाधान खोजने की कोशिश होती है। आधुनिक विधि से ऐसे नापेंगे भू-जल स्तर को नापने के लिए पीजो मीटर लगाए जाएंगे। नई बोरिंग होगी। उसमें टेलीमीटर डालकर इसे बंद कर दिया जाएगा, ताकि कोई उपयोग न करे। टेलीमीटर के माध्यम से ऑटोमेटिक तरीके से भू-जल स्तर के गिरने और बढ़ने की रीडिंग एप पर स्वत: दिखाई देने लगेगी। जहां जरूरी वहां होगा बोर गर्मी के दिनों में अक्सर निगम के एरिया में पानी की समस्याएं सामने आने लगती है। निगम के अधिकारी समस्या निराकरण के लिए बोरिंग करा देते है। कई बार बोरिंग में पानी नहीं निकलता। ऐसे में निगम का नुकसान होता है। अब जल स्तर का पता चलने पर उक्त एरिया में बोरिंग कराने का अफसर तय कर पाएंगे।
ऐसे समझें: अभी भू-जल स्तर नापने का सिस्टम लोहे के पाइप: बोरिंग या हैंडपंप का जल स्तर कम होने पर निगम का अमला उसमें 3-3 मीटर के पाइप डालता है। जितने पाइप नए डालते हैं उससे भूजल स्तर का आकलन करता है। रस्सी की मदद: कई बार बोरिंग-हैंडपंप में डले पाइपों को निकाल लिया जाता है। फिर उसकी फिजिकल पड़ताल करने के लिए रस्सी डाली जाती है। जितनी वह गीली होती है, उसे हिसाब से जल स्तर का आंकलन होता है। पहले चरण में शहर के 21 स्थानों पर लगेंगे सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड ने पहले चरण में भू-जल स्तर मापने के लिए 21 स्थान तय किए हैं। इनमें बहोड़ापुर, पुरानी छावनी, मोहनपुर, सुसेरा कोठी, थाटीपुर (ओल्ड) जहांगीरपुरा, रूद्रपुरा, नयागांव, पिपरौली, कृषि विज्ञान केंद्र, वीरपुर बांध, बरौआ, अलीनगर, पनिहार, सुमेरपर्दा, ककरारी, गुठीना, गणेशपुरा, जहांगीरपुर, बिलौआ, बागवई आदि शामिल हैं। यहां पीजो मीटर लगाना तय किया है। इन स्थलों पर भौतिक सत्यापन चल रहा है। यहां पर पहले 60 मीटर गहराई तक बोरिंग कर पीजो मीटर से रीडिंग ली जाएगी। जहां भू-जल स्तर नीचे होगा तो वहां भू-जल स्तर ज्यादा नीचे होने पर जरूरत के अनुसार बोरिंग की गहराई बढ़ाई जाएगी। इसके बाद पीजो मीटर लगाया जाएगा। शहरी क्षेत्र से होगी प्रोजेक्ट की शुरुआत, डेशबोर्ड पर दिखेगा पूरा डेटा सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड पीजो मीटर लगाने का काम कर रहा है। अभी नगर निगम सीमा के क्षेत्र में पीजो मीटर लगाने के लिए ड्रिलिंग का काम करना है। फिलहाल घाटीगांव में ड्रिलिंग का काम चालू हो गया है। ये काम पूरा होने के बाद बोर्ड द्वारा निगम को डेशबोर्ड देगा। उसके माध्यम से जहां-जहां पीजो मीटर लगाए गए है। वहां की ऑनलाइन मॉनिटरिंग निगम को ग्राउंड वाटर के माध्यम से मिलती रहेगी। -संघ प्रिय, आयुक्त ननि
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