हाईकोर्ट की सख्ती, फायर-स्टेशन का वर्क ऑर्डर जारी:5 साल से रुका था काम, हाईकोर्ट बोला- अब निर्माण और गुणवत्ता की होगी निगरानी

हाईकोर्ट की सख्ती, फायर-स्टेशन का वर्क ऑर्डर जारी:5 साल से रुका था काम, हाईकोर्ट बोला- अब निर्माण और गुणवत्ता की होगी निगरानी




बिलासपुर में फायर स्टेशन बनाने को लेकर चल रही मनमानी अब नहीं चलेगी। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में राज्य शासन ने शपथपत्र में बताया कि नए फायर स्टेशन के निर्माण के लिए वर्क ऑर्डर जारी कर दिया गया है। ठेकेदार को 15 दिनों के अंदर अनुबंध करने को कहा गया है। डिवीजन बेंच ने कहा कि अब इस जनहित याचिका में निर्माण कार्य की समय सीमा और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए लगातार निगरानी की जाएगी। मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च को होगी। दरअसल, फायर स्टेशन निर्माण के लिए साल 2020 में मंजूरी मिल गई थी। लेकिन, ढाई साल में जिला प्रशासन के जिम्मेदार अफसर जगह की तलाश नहीं कर पाए। पिछले दिनों मोपका स्थित विद्युत वितरण कंपनी के सब स्टेशन और दुकानों में आग लगने के बाद फायर स्टेशन निर्माण का मामला फिर से उठा। इसे लेकर मीडिया में खबरें भी आई, जिसे हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने संज्ञान में लेकर जनहित याचिका मानकर सुनवाई शुरू की। इस केस में हाईकोर्ट ने राज्य शासन से शपथपत्र के साथ जवाब मांगा था। ढाई साल में जगह तलाश नहीं कर पाए अफसर
मामले में राज्य शासन की तरफ से शपथपत्र प्रस्तुत किया गया है, जिसमें बताया गया कि 2020 में फायर स्टेशन की स्वीकृति मिली थी। इसके लिए सकरी रोड और कोनी जैसे विकल्पों पर विचार करने के बाद आखिरकार कुदुदंड में जगह फाइनल की गई। यहां की जमीन दलदली होने के कारण निर्माण के लिए विशेष राफ्ट फाउंडेशन तकनीक की जरूरत पड़ी, जिस पर संशोधित एस्टीमेट को पास कराने में ही प्रशासन ने दो साल और लगा दिए। इसके बाद नियमों का पालन न होने की वजह से पुराने टेंडर को रद्द करना पड़ा, क्योंकि एसई कार्यालय से समय पर चेकलिस्ट ही नहीं भेजी गई थी। शहर की सुरक्षा अस्थायी फायर स्टेशन के भरोसे शहर की सुरक्षा
वर्तमान में आगजनी जैसी घटनाओं के दौरान शहर की सुरक्षा व्यवस्था अस्थायी फायर स्टेशन के भरोसे है। यहां न तो पर्याप्त कर्मचारी हैं और न ही आधुनिक उपकरण। पुराने वाहनों और पानी के कम भंडारण की वजह से किसी बड़ी आपात स्थिति में बचाव कार्य करना लगभग असंभव है। अब हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद प्रशासन ने कोर्ट को बताया है कि 1.55 करोड़ की लागत से बनने वाले इस स्टेशन के लिए वर्क ऑर्डर जारी कर दिया गया है। ठेकेदार को 15 दिनों के भीतर अनुबंध पूरा करने का निर्देश दिया गया है, ऐसा नहीं करने उसकी अमानत राशि जब्त कर ली जाएगी। पूरे प्रदेश के फायर स्टेशन की मांगी जानकारी
हाईकोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए बिलासपुर के साथ ही पूरे प्रदेश में फायर स्टेशनों की स्थिति पर जवाब मांगा है। जानकारी के अनुसार, प्रदेश में वर्तमान में केवल 9 स्थानों पर ही पूरी तरह से तैयार फायर स्टेशन संचालित हैं। हाईकोर्ट ने कहा है कि निर्माण कार्य की समय सीमा और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए इस मामले की लगातार निगरानी की जाएगी।



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