₹8,129 Cr Inflow on India-US Trade Deal
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मुंबई4 घंटे पहले
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फरवरी के पहले हफ्ते में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) भारतीय शेयर बाजार में नेट खरीदार बन गए हैं। उन्होंने एक हफ्ते में ₹8,100 करोड़ से ज्यादा का निवेश किया है।
ये खरीदारी इंडिया-US ट्रेड डील की वजह से आई है, जिससे मार्केट में पॉजिटिव सेंटिमेंट आया है। पिछले तीन महीनों से FPI लगातार बिकवाली कर रहे थे, लेकिन अब ट्रेंड बदल गया है।
FPI ने फरवरी में अब तक ₹8,129 करोड़ की खरीदारी की
NSDL के डेटा के मुताबिक, फरवरी के पहले 6 दिनों तक FPI ने भारतीय इक्विटी में ₹8,129 करोड़ का निवेश किया। ये आंकड़ा 6 फरवरी तक का है। इससे पहले जनवरी में FPI ने ₹35,962 करोड़ निकाले थे।
दिसंबर में ₹22,611 करोड़ और नवंबर में ₹3,765 करोड़ की बिकवाली की थी। 2025 पूरे साल में FPI ने नेट 1.71 लाख करोड़ रुपए निकाले थे, जो काफी लंबे समय का सबसे खराब पीरियड था।
US ट्रेड डील ने बदला माहौल
इंडिया और US के बीच ट्रेड डील पर ब्रेकथ्रू होने से ग्लोबल अनिश्चितता कम हुई है। US ने भारतीय गुड्स पर टैरिफ कम करने की बात की है, जिससे मार्केट में रिस्क ऐपेटाइट में सुधार हुआ है।
रुपए में भी सुधार आया है, जो पहले रिकॉर्ड लो 90.30 पर पहुंचा था, लेकिन अब स्टेबल हो रहा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ये डील ग्लोबल ट्रेड टेंशन कम करने में मददगार साबित होगी।
जनवरी में FPI ने भारतीय बाजार से ₹35,962 करोड़ निकाले थे।
एक्सपर्ट्स क्या कह रहे हैं
मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा, “हाल की खरीदारी से रिस्क ऐपेटाइट में सुधार और भारत की ग्रोथ आउटलुक पर नई उम्मीद दिख रही है। ग्लोबल अनिश्चितता कम होने, घरेलू इंटरेस्ट रेट में स्टेबिलिटी और इंडिया-US ट्रेड डेवलपमेंट्स से सेंटिमेंट मजबूत हुआ है।”
एंजेल वन के वकारजावेद खान ने बताया, “इंडिया-US ट्रेड टॉक्स में ब्रेकथ्रू से जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता घटी और मार्केट रैली आई। US यील्ड्स स्टेबल होने और FY26 बजट में फिस्कल स्टिमुलस से भी मदद मिली।”
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के VK विजयकुमार ने कहा, “रुपए के अप्रीशिएशन से भी सेंटिमेंट बेहतर हुआ। रुपया मार्च 2026 के अंत तक 90 से नीचे आ सकता है, जिससे और FPI इनफ्लो आ सकता है, लेकिन ग्लोबल ट्रेड और AI डेवलपमेंट्स पर निर्भर करेगा।”
पिछले महीनों की बिकवाली की वजह
पिछले महीनों में FPI ने रुपए की वोलेटिलिटी, ग्लोबल ट्रेड टेंशन, US टैरिफ की आशंका और हाई वैल्यूएशन की वजह से बिकवाली की। जनवरी में ग्लोबल माहौल और US बॉन्ड यील्ड्स हाई होने से आउटफ्लो बढ़ा। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर कॉर्पोरेट अर्निंग्स मजबूत रहे और ग्लोबल ट्रेड टेंशन कंट्रोल में रहे तो और इनफ्लो आ सकता है।
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