Nalanda Bihar Eco-Tourism Hub | 5.37 Cr Budget 100% Spent
प्राचीन इतिहास और आधुनिक पर्यटन का संगम ‘नालंदा’ अब बिहार का सबसे बड़ा ‘ईको-टूरिज्म हॉटस्पॉट’ बन गया है। बिहार सरकार की ओर से जारी आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 की रिपोर्ट में नालंदा ने पर्यटन के क्षेत्र में पूरे राज्य में बाजी मारी है। रिपोर्ट के मुताबिक,
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यह आंकड़ा पिछले साल की तुलना में 5.3 प्रतिशत अधिक है। वर्ष 2023-24 में यह संख्या 16.33 लाख थी, जबकि 2022-23 में 13.95 लाख थी। लगातार बढ़ते ये आंकड़े बताते हैं कि देश-दुनिया के सैलानियों के लिए नालंदा पहली पसंद बना हुआ है।
7.37 लाख विदेशी मेहमान बिहार आए
सिर्फ देसी ही नहीं, विदेशी सैलानियों की आमद भी बिहार में बढ़ी है, जिसका बड़ा लाभ नालंदा को मिला है। सर्वेक्षण के अनुसार, साल 2024 में राज्य में कुल 7.37 लाख विदेशी पर्यटक पहुंचे, जबकि 2023 में यह संख्या 5.47 लाख थी। नालंदा के ऐतिहासिक खंडहर और राजगीर की वादियों ने इन विदेशी मेहमानों को सबसे ज्यादा आकर्षित किया है।
आंकड़े एक नजर में
विकास पर पूरा जोर: बजट का 100% उपयोग
नालंदा जिला प्रशासन ने पर्यटन सुविधाओं को विश्वस्तरीय बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। रिपोर्ट बताती है कि ईको-टूरिज्म और पार्क विकास योजना के तहत जिले को मिले 5.37 करोड़ रुपए की पूरी राशि शत-प्रतिशत खर्च कर ली गई है। इसके अलावा, राजगीर जू-सफारी के रख-रखाव के लिए आवंटित 13 लाख रुपए का भी पूरा उपयोग किया गया, जिससे पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं।
‘डे-टूरिज्म’ से ‘स्टे-टूरिज्म’ की ओर बढ़ता कदम
सरकार अब नालंदा को केवल दिन में घूमने वाली जगह (डे-टूरिज्म) के बजाय ठहरने वाले पर्यटन स्थल (स्टे-टूरिज्म) के रूप में विकसित कर रही है। बिहार पर्यटन नीति 2023 और ब्रांडिंग एंड मार्केटिंग पॉलिसी 2024 के तहत इसे प्रमोट किया जा रहा है। इसका सीधा असर स्थानीय रोजगार पर पड़ा है। गाइड, ई-रिक्शा चालक, होटल व्यवसायी और सिलाव का खाजा बेचने वाले छोटे कारोबारियों की आय में वृद्धि हुई है।
इन जगहों पर उमड़ रही भीड़
पर्यटकों का सबसे ज्यादा रुझान राजगीर नेचर सफारी, जू सफारी, घोड़ाकटोरा झील, वेणुवन और प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के खंडहरों की ओर देखा गया है। जू सफारी में खुले में विचरते शेर, बाघ और भालू बच्चों और बड़ों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र हैं।

