गुजरात में 'हुं नाथुराम' नाटक का विरोध:निर्देशक-निर्माता ने कहा-नाटक में बताया कि नाथूराम गांधीजी का दुश्मन नहीं, उनका प्रशंसक था
गुजरात में ‘हुं नाथुराम’ नाटक के प्रदर्शन का विरोध लगातार जारी है। कांग्रेस के कड़े विरोध के बाद सोमवार को अहमदाबाद में भी गुजराती नाटक ‘हुं नाथुराम’ का प्रदर्शन रद्द कर दिया गया।
इससे पहले कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन के चलते शनिवार को राजकोट और रविवार को जामनगर में भी नाटक का प्रदर्शन रद्द कर दिया था। कांग्रेस ने इस नाटक को ऐतिहासिक वास्तविकताओं को बदलने की एक सुनियोजित साजिश बताया है। इसी विवाद को लेकर भास्कर ने ‘आई एम नाथुराम गोडसे’ के निर्देशक भरत दाभोलकर और निर्माता सेजल पेंटर से इस विवादास्पद नाटक के बारे में बात की। निर्देशक भरत दाभोलकर और निर्माता सेजल पेंटर ने बताया कि नाटक ‘नाथूराम गोडसे’ पिछले डेढ़ साल से हिंदी, अंग्रेजी और गुजराती – तीन भाषाओं में प्रदर्शित हो रहा है। अब तक मुंबई में इसके लगभग 50 शो सफलतापूर्वक संपन्न हो चुके हैं। इसके अलावा, इसे कोलकाता, पुणे, दिल्ली और उदयपुर में भी अच्छा प्रतिसाद मिला है और सूरत, वडोदरा और भावनगर में भी इसके शो हुए हैं, जहां लोगों ने इसकी खूब तारीफ की है। निर्देशक भरत दाभोलकर ने आगे कहा कि गांधीजी की हत्या के बाद, उस समय की सरकार ने अदालत में चले मुकदमे को सेंसर कर दिया था। नाथूराम के 10 पन्नों के इकबालिया बयान को प्रकाशित नहीं होने दिया गया था। हमने यह नाटक दो मुख्य पुस्तकों पर आधारित बनाया है। दो पुस्तकों में पहली प्रकाश श्रीवास्तव की ‘हे राम’ है, जिसे 18 वर्षों के शोध के बाद लिखा गया है। दूसरी पुस्तक नाथूराम को फांसी की सजा सुनाने वाले जस्टिस आत्मा चरण की ‘द मर्डर ऑफ महात्मा’है। यह नाटक बताता है कि नाथूराम गांधीजी का दुश्मन नहीं, बल्कि उनका प्रशंसक था। वह गांधीजी के अहिंसा के सिद्धांतों का सम्मान करता था। नाटक में एक संवाद है, जिसमें नाथूराम कहता है कि मैं गांधीजी का प्रशंसक हूं। अदालत में दिए गए नाथूराम के बयान फाड़ दिए गए थे
भरत दाभोलकर ने स्पष्ट किया कि हम किसी की हत्या का समर्थन नहीं करते। नाटक में गोडसे खुद कहता है कि अगर मैंने गांधीजी को मारा है, तो मुझे जीने का कोई अधिकार नहीं है। मुझे फांसी दी जानी चाहिए। जब नाथूराम के अदालत में दिए गए बयान की हर फाइल फाड़ दी गई थी और कहा गया कि था कि नाथूराम के बारे में कोई कुछ न लिखे। नाटक पिछले 25 वर्षों से मराठी में चल रहा है वहीं, नाटक की निर्माता सेजल पेंटर ने कहा- महात्मा गांधी के परिवार से इस बारे में पूछा, तो उन्होंने बताया कि तुषार गांधी या गांधी परिवार से इस नाटक के बारे में नहीं पूछा गया था, बल्कि लेखक (जो अब जीवित नहीं हैं) की पत्नी की अनुमति ली गई थी। यह नाटक पिछले 25 वर्षों से मराठी में चल रहा है। निर्देशक ने स्वतंत्रता संग्राम के बारे में बात करते हुए कहा कि गांधीजी से लेकर नेहरूजी तक सभी ने देश की आजादी में योगदान दिया। नाथूराम भी लेख लिखता था। हम यह तय नहीं कर सकते कि उनमें से कौन बड़ा था और कौन छोटा। नाटक गांधीजी का अपमान है या नहीं? इस सवाल के जवाब में सेजल पेंटर ने कहा- लोग नाटक देखे बिना ही अपनी राय दे देते हैं, लेकिन लोगों को यह नाटक देखना चाहिए। क्योंकि इसमें हमने गांधीजी का अपमान नहीं किया है। मैं भी गांधीजी में विश्वास रखती हूं।
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