CM बोले-वंदे मातरम् गायन प्रदेश में तुरंत लागू करेंगे:कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद का पलटवार- 'मजहबी आजादी पर अंकुश मंजूर नहीं'
केन्द्र सरकार के ऐलान के बाद मध्यप्रदेश में अब सभी शिक्षण संस्थानों, मदरसों और सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के सभी 6 छंदों का गायन अनिवार्य होगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे ‘ऐतिहासिक निर्णय’ बताते हुए तत्काल लागू करने के निर्देश दिए हैं। वहीं, इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने इसे मजहबी आजादी पर अंकुश करार दिया है। मुख्यमंत्री बोले: ‘जिस मंत्र ने आजादी दिलाई, वह अब हर जगह गूंजेगा’ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने केंद्र सरकार के इस निर्णय का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया। सीएम ने कहा, “भारत सरकार द्वारा लिया गया यह निर्णय सच में ऐतिहासिक है। जिस ‘वंदे मातरम्’ मंत्र ने आजादी की लड़ाई में ऊर्जा डाली और हमारे सेनानियों के संघर्ष की ताकत को बढ़ाया, उसकी अनिवार्यता प्रशंसनीय है। मध्यप्रदेश सरकार इसे तुरंत लागू करने वाली है। अब हर कार्यक्रम में जन-गण-मन से पहले वंदे मातरम् का ससम्मान गायन किया जाएगा। यह हमारे अमर शहीदों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।” कांग्रेस विधायक बोले: ‘विवाद सम्मान का नहीं, मजहबी आजादी का है’ मुख्यमंत्री के ऐलान और स्कूल शिक्षा मंत्री के कड़े रुख के बाद कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने मोर्चा खोल दिया है। मसूद ने कहा, “भारत एक प्रजातांत्रिक देश है और हमें संविधान के आर्टिकल 25 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार मिला हुआ है। वंदे मातरम् के सम्मान को लेकर कोई झगड़ा नहीं है, विवाद केवल उसकी कुछ लाइनों को लेकर है जो हमारी मजहबी आजादी पर अंकुश लगाती हैं। इस पर हमने पहले भी ऐतराज जताया था। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड इस नए कानून का अध्ययन कर रहा है, जब तक बोर्ड अपनी राय नहीं बना लेता, तब तक हम कोई निर्णय नहीं लेंगे।” मसूद ने तंज कसते हुए यह भी कहा कि जो लोग आज वंदे मातरम् पर बहस कर रहे हैं, वही सबसे ज्यादा संविधान का मजाक उड़ाते हैं। शिक्षा मंत्री की चेतावनी: ‘मदरसा हो या स्कूल, कानून सबके लिए बराबर’ स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने कहा कि जो भी राष्ट्र का नागरिक है, उसे राष्ट्र का कानून मानना ही होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि चाहे मदरसा हो या कोई अन्य स्कूल, सभी को वंदे मातरम् का गायन करना होगा। मंत्री ने कहा कि आजादी की लड़ाई का ठेका केवल कांग्रेस का नहीं था और यह निर्णय युवा पीढ़ी को राष्ट्रवाद से जोड़ने के लिए बहुत पहले हो जाना चाहिए था। क्या है 6 छंदों का विवाद? आमतौर पर अब तक वंदे मातरम् का केवल पहला हिस्सा ही गाया जाता था, लेकिन अब सरकार ने पूरे 6 छंदों को अनिवार्य किया है। मुस्लिम समुदाय के कुछ नेताओं का तर्क है कि बाद के छंदों में मातृभूमि की वंदना जिस स्वरूप में की गई है, वह उनके मजहबी सिद्धांतों (एकेश्वरवाद) के खिलाफ है। इसी कारण अब आरिफ मसूद और पर्सनल लॉ बोर्ड ने इसे ‘अध्ययन’ और ‘मजहबी स्वतंत्रता’ के दायरे में रखा है।
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