श्रीरामकुल्लेश्वर महादेव मंदिर की मान्यता त्रेता युग से जुड़ी:नागदेव और स्वयंभू गणेश मंदिर सदियों पुरानी; समाजन कर रहे धरोहर के संरक्षण की मांग

श्रीरामकुल्लेश्वर महादेव मंदिर की मान्यता त्रेता युग से जुड़ी:नागदेव और स्वयंभू गणेश मंदिर सदियों पुरानी; समाजन कर रहे धरोहर के संरक्षण की मांग




बड़वानी स्थित श्रीरामकुल्लेश्वर महादेव मंदिर नर्मदा तट पर धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है। इसे क्षेत्र की प्राचीन सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर का संबंध त्रेता युग और भगवान श्रीराम के वनवास काल से है। इतिहासकारों के अनुसार, नर्मदा तट सदियों से साधना और धार्मिक गतिविधियों का केंद्र रहा है। यह मंदिर इसी परंपरा का प्रमाण है। इसकी स्थापत्य शैली और परिसर में स्थित प्राचीन बाउड़ी इसकी प्राचीनता को दर्शाती है। स्थानीय लोग बाउड़ी को सैकड़ों वर्ष पुरानी संरचना बताते हैं, जो आज भी जलस्रोत के रूप में उपयोग की जाती है। नागदेव और स्वयंभू गणेश मंदिर आस्था केंद्र मंदिर परिसर में नागदेव मंदिर और स्वयंभू गणेश मंदिर भी मौजूद हैं। ये स्थल क्षेत्र की लोक आस्था और प्राचीन परंपराओं के परिचायक हैं, जो इस क्षेत्र को लंबे समय से धार्मिक साधना का केंद्र बताते हैं। समाजजनों ने ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण की मांग स्थानीय समाजजनों ने इस ऐतिहासिक धरोहर के व्यवस्थित सर्वेक्षण और संरक्षण की मांग की है। उनका कहना है कि इससे यह स्थल जिले के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों में शामिल हो सकता है। मंदिर की संरचना, बाउड़ी और आसपास के प्राचीन अवशेष शोध का विषय भी बन सकते हैं। इस प्रकार, श्रीरामकुल्लेश्वर महादेव मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि बड़वानी की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान का जीवंत प्रतीक है, जो प्राचीन परंपराओं को आज भी सहेजे हुए है।



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